प्रयागराज में 11 सितंबर को होगा ‘महादेवी स्मृति समारोह’

प्रयागराज में 11 सितंबर को महादेवी वर्मा की 39वीं पुण्यतिथि पर महादेवी स्मृति समारोह आयोजित होगा। कार्यक्रम में पुस्तक विमोचन, विचार गोष्ठी और कवि सम्मेलन होंगे।
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पुस्तक विमोचन, विचार गोष्ठी और कवि सम्मेलन में जुटेंगे साहित्यकार
महादेवी स्मृति समारोह 2026: महान कवयित्री एवं साहित्यकार महादेवी वर्मा की 39वीं पुण्यतिथि पर साहित्यकार संसद की ओर से 11 सितंबर को ‘महादेवी स्मृति समारोह’ आयोजित किया जाएगा। साहित्यकार संसद भवन (गंगाटट), रसूलाबाद में होने वाले इस आयोजन में पुस्तक विमोचन, विचार गोष्ठी और कवि सम्मेलन आयोजित होगा। कार्यक्रम में साहित्यकारों, कवियों और साहित्यप्रेमियों की सहभागिता रहेगी।
समारोह दो सत्रों में होगा। पहला सत्र शाम 5 बजे शुरू होगा। इसमें डॉ. प्रमोद कुमार अग्रवाल, पूर्व मुख्य सचिव, पश्चिम बंगाल द्वारा रचित पुस्तक ‘गीता और युवा’ का विमोचन किया जाएगा। इसके बाद ‘आधुनिक युग की मीरा महादेवी वर्मा’ विषय पर विचार गोष्ठी होगी। गोष्ठी के विषय प्रवर्तक साहित्यकार संसद के महासचिव प्रद्युम्ननाथ तिवारी ‘करुणेश’ होंगे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. प्रमोद कुमार अग्रवाल होंगे। अध्यक्षता डॉ. रामकिशोर शर्मा, पूर्व विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय करेंगे। डॉ. संजय कुमार शुक्ल, उपाध्यक्ष, साहित्यकार संसद, स्वागताध्यक्ष तथा डॉ. अशोक कुमार पाण्डेय, पूर्व अपर आयुक्त, राजस्व (उत्तर प्रदेश), विशिष्ट अतिथि होंगे।
शाम 6:30 बजे होगा कवि सम्मेलन
दूसरा सत्र शाम 6:30 बजे शुरू होगा। इसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों से आमंत्रित कवि अपनी रचनाएं प्रस्तुत करेंगे। कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि सुरेंद्र कुमार तिवारी, सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद (उत्तर प्रदेश) होंगे। अध्यक्षता पं. रामलखन शुक्ल करेंगे। कवि सम्मेलन में भूषण त्यागी देवेरिया, डॉ. ईश्वर चन्द्र आजमगढ़, डॉ. नीलिमा मिश्रा, क्षमा द्विवेदी, डॉ. वीरेन्द्र कुमार तिवारी, डॉ. विनय सेन और बिहारीलाल ‘अम्बर’ प्रयागराज सहित अन्य कवि शामिल होंगे। रचनाओं के माध्यम से समकालीन कविता के विविध स्वर भी सुनने को मिलेंगे।
साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास
समारोह के निवेदक दीप नारायण तिवारी, अध्यक्ष, साहित्यकार संसद हैं, जबकि कार्यक्रम का संयोजन महासचिव प्रद्युम्ननाथ तिवारी ‘करुणेश’ करेंगे। आयोजकों ने साहित्यकारों और साहित्यप्रेमियों से समारोह में शामिल होने की अपील की है। साथ ही निर्धारित समय का विशेष ध्यान रखने का अनुरोध किया गया है। आयोजकों के अनुसार, महादेवी वर्मा की स्मृति में आयोजित यह समारोह उनके साहित्यिक योगदान को याद करने के साथ उनकी रचनाओं की वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिकता पर विचार का अवसर भी देगा। पुस्तक विमोचन और विचार गोष्ठी के जरिए साहित्य के समकालीन सरोकारों पर चर्चा होगी, जबकि कवि सम्मेलन आयोजन को रचनात्मक अभिव्यक्ति का मंच प्रदान करेगा।
छायावाद की प्रमुख कवयित्री थीं महादेवी
- महादेवी वर्मा (1907-1987) हिंदी साहित्य के छायावादी युग की प्रमुख कवयित्रियों में थीं। उनका जन्म 26 मार्च 1907 को फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ था और उनका निधन 11 सितंबर 1987 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुआ।
- महादेवी वर्मा की काव्य-साधना में संवेदना, विरह, करुणा, आध्यात्मिक अनुभूति और प्रकृति के विविध रूपों का प्रभाव दिखाई देता है। उनके प्रमुख काव्य-संग्रहों में ‘नीहार’, ‘रश्मि’, ‘नीरजा’, ‘सांध्यगीत’ और ‘दीपशिखा’ शामिल हैं। ‘नीहार’ 1930, ‘रश्मि’ 1932, ‘नीरजा’ 1934 और ‘सांध्यगीत’ 1936 में प्रकाशित हुए। इन चारों संग्रहों की कविताओं का संकलन ‘यामा’ में मिलता है।
- ‘दीपशिखा’ 1942 में प्रकाशित उनकी महत्वपूर्ण काव्य-कृति है। भारत सरकार के प्रकाशन विभाग की सामग्री के अनुसार, ‘दीपशिखा’ में 51 गीत हैं, जबकि ‘यामा’ में ‘नीहार’, ‘रश्मि’, ‘नीरजा’ और ‘सांध्यगीत’ की कविताएं संकलित हैं।
- महादेवी वर्मा का गद्य साहित्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ‘अतीत के चलचित्र’, ‘स्मृति की रेखाएं’, ‘पथ के साथी’, ‘मेरा परिवार’ और ‘श्रृंखला की कड़ियां’ उनकी चर्चित गद्य कृतियां हैं। उनके गद्य में संस्मरण, रेखाचित्र, सामाजिक सरोकार और विशेष रूप से स्त्री जीवन से जुड़े प्रश्नों की प्रभावी अभिव्यक्ति मिलती है। प्रकाशन विभाग की सामग्री भी उनके काव्य और गद्य के इस व्यापक रचनात्मक संसार को रेखांकित करती है।
- ‘यामा’ के लिए महादेवी वर्मा को 1982 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी साहित्यिक उपलब्धियों ने हिंदी कविता को नई संवेदना और अभिव्यक्ति दी। इसी कारण उन्हें हिंदी साहित्य में छायावाद की प्रमुख प्रतिनिधि कवयित्री के रूप में विशेष स्थान प्राप्त है।
- 11 सितंबर को होने वाला ‘महादेवी स्मृति समारोह’ उनकी पुण्यतिथि पर उनके साहित्य, व्यक्तित्व और रचनात्मक विरासत को स्मरण करने का अवसर होगा। प्रयागराज की साहित्यिक परंपरा के बीच आयोजित यह कार्यक्रम साहित्यप्रेमियों के लिए विचार और काव्य-सृजन से जुड़ने का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।

