Intern Doctors Stipend: मध्यप्रदेश में सड़क पर इंटर्न डॉक्टर, स्टाइपेंड 30 हजार करने की मांग

Doctor Protest Bhopal : मध्यप्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर भोपाल में प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहा। डॉक्टर 14,337 से बढ़ाकर 30 हजार रुपये स्टाइपेंड करने और लिखित आदेश की मांग पर अड़े हैं। पुलिस कार्रवाई के बाद विवाद बढ़ गया है और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया है।
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पुलिस कार्रवाई ने बढ़ाया आक्रोश, सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों का भी समर्थन
Intern Doctors Stipend: मध्यप्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों के मानदेय में बढ़ोतरी की मांग को लेकर राजधानी भोपाल में चल रहा प्रदर्शन बुधवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। प्रदेश के विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टरों ने कमला पार्क चौराहे के पास धरना दिया और वर्तमान मासिक मानदेय 14,337 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये किए जाने की मांग की। आंदोलन को गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल के सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों का भी समर्थन मिला है। सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने ओपीडी के बहिष्कार की घोषणा की है। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना है कि वे पिछले करीब तीन वर्षों से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर अपनी मांग रखी, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि केवल आश्वासन मिलने से उनकी समस्या का समाधान नहीं होगा।
पुलिस ने किया लाठीचार्ज, कई डॉक्टर घायल
छिंदवाड़ा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल कॉलेज के इंटर्न डॉक्टर अभिषेक यादव ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने इंटर्न डॉक्टरों पर लाठीचार्ज किया और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। उन्होंने दावा किया कि कार्रवाई में कुछ डॉक्टर घायल हुए। वहीं पुलिस कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव के संज्ञान में मामला आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की है। जांच में घटनाक्रम और पुलिस कार्रवाई के कारणों की पड़ताल की जा रही है।
लिखित आदेश जारी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के इंटर्न डॉक्टर माधव शर्मा ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे। डॉक्टरों का कहना है कि सरकार को मानदेय बढ़ाने के संबंध में स्पष्ट निर्णय लेकर उसका लिखित आदेश जारी करना चाहिए। गांधी मेडिकल कॉलेज के इंटर्न डॉक्टर अनुराग ने कहा कि यदि सरकार लिखित आदेश जारी कर देती है या स्पष्ट रूप से बता देती है कि बढ़ा हुआ मानदेय किस तारीख से लागू होगा, तो डॉक्टर आंदोलन समाप्त कर देंगे।
पहली बार प्रदेशभर के इंटर्न डॉक्टर भोपाल पहुंचे
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के अनुसार बुधवार को पहली बार मध्य प्रदेश के विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टर बड़ी संख्या में भोपाल पहुंचे और आंदोलन में शामिल हुए। इससे आंदोलन का दायरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। डॉक्टरों ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान आपातकालीन सेवाएं जारी रखी जा रही हैं। उनका दावा है कि वे सड़क के एक तरफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ यातायात को सामान्य रखने का प्रयास किया जा रहा है। इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन को सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों का समर्थन मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग के सामने चुनौती बढ़ गई है। यदि आंदोलन लंबा चलता है और इसमें रेजिडेंट डॉक्टरों की भागीदारी बढ़ती है, तो इसका असर सरकारी अस्पतालों की नियमित स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है। हालांकि डॉक्टरों ने आपातकालीन सेवाएं जारी रखने की बात कही है।
सरकार को टकराव नहीं, समाधान चुनना चाहिए
- इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि डॉक्टरों ने प्रदर्शन क्यों किया।
- सवाल यह है कि क्या सरकार को ऐसी मांग के लिए डॉक्टरों के सड़क पर उतरने का इंतजार करना चाहिए था?
- सरकार को समझना चाहिए कि मेडिकल इंटर्न देश की स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
- इंटर्न डॉक्टर मेडिकल शिक्षा की उस अवस्था में होते हैं, जहां प्रशिक्षण के साथ वे अस्पतालों में मरीजों की देखभाल और क्लिनिकल सेवाओं में भी योगदान देते हैं। ऐसे में 14,337 रुपये का स्टाइपेंड निश्चित रूप से गंभीर समीक्षा का विषय है।
- 30,000 रुपये की मांग को स्वीकार करना सरकार के लिए सिर्फ डॉक्टरों को शांत कराने का फैसला नहीं होगा। यह मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में काम करने वाले युवाओं के प्रति सरकार के दृष्टिकोण का संकेत होगा।
डॉक्टर भी समझें अपनी जिम्मेदारी
Intern Doctors Stipend: डॉक्टरों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। मरीज आंदोलन का माध्यम नहीं हो सकता। अगर सरकार डॉक्टरों की मांग मानने में देरी करती है तो वह प्रशासनिक समस्या है, लेकिन अगर इसके विरोध में किसी गंभीर मरीज का इलाज प्रभावित होता है तो उसकी कीमत एक निर्दोष नागरिक को चुकानी पड़ती है। इसलिए समाधान का रास्ता स्पष्ट है- सरकार लिखित समयसीमा के साथ स्टाइपेंड पर निर्णय करे, पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराए और डॉक्टर इमरजेंसी सेवाओं को पूरी तरह चालू रखते हुए अपना आंदोलन जारी रखें।

