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नागपुर में रिश्वत मामले में दो आरोपी बरी, अदालत ने दिया संदेह का लाभ

नागपुर में रिश्वत मामले में दो आरोपी बरी, अदालत ने दिया संदेह का लाभ
Nagpur Bribery Case Two Accused Acquitted: नागपुर में रिश्वत मामले में दो आरोपी बरी, अदालत ने दिया संदेह का लाभ (Image: AI)

नागपुर रिश्वत मामले में दो आरोपी बरी: नागपुर के रिश्वत मामले में विशेष अदालत ने प्रफुल्ल उदाराम गाणार और हरिराम रहांगडाले को संदेह का लाभ देते हुए निर्दोष बरी कर दिया। मामला 2014 में दो हजार रुपये की कथित रिश्वत से जुड़ा था। सुनवाई में शिकायतकर्ता ने तहसीलदार से मुलाकात नहीं होने की बात कही। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार कर दोनों आरोपियों को राहत दी।

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Asfi Shadab
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रिश्वत मामले में दो आरोपी बरी

नागपुर रिश्वत मामले में दो आरोपी बरी: नागपुर की विशेष अदालत ने रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के आरोप में गिरफ्तार तहसीलदार हरिराम रहांगडाले और प्रफुल्ल उदाराम गाणार (दोनों उम्र 50 वर्ष) को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। यह फैसला विशेष न्यायाधीश जहीर अब्बास शेख ने सुनाया।

मामला 2014 का है। शिकायतकर्ता युवराज रेवडे के कलमना क्षेत्र में दो प्लॉट थे, जिन पर गैर-कृषि कर निर्धारण के लिए वे नागपुर तहसील कार्यालय पहुंचे थे। आरोप है कि वहां भास्कर जांभुलकर (अब मृत) ने काम कराने के लिए दो हजार रुपये मांगे और कहा कि तहसीलदार रहांगडाले के जरिए काम हो जाएगा।

इसके बाद रेवडे ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अधिकारी विनोद वाकडे ने सत्यापन के बाद जाल बिछाया। 3 दिसंबर 2014 को शिकायतकर्ता पैसे लेकर पहुंचा, भास्कर जांभुलकर ने उसे पैसे प्रफुल्ल गाणार को देने को कहा। पैसे स्वीकार करते ही एसीबी ने गाणार को गिरफ्तार किया।

अदालत ने संदेह का लाभ देकर दी राहत

सुनवाई में पांच गवाहों के बयान दर्ज हुए। शिकायतकर्ता ने जिरह में स्वीकार किया कि वह कभी तहसीलदार रहांगडाले से मिला ही नहीं था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता चंद्रशेखर जलतारे ने इसी आधार पर तहसीलदार की भूमिका को खारिज किया। अधिवक्ता मुकेश शुक्ला ने दलील दी कि गाणार निजी व्यक्ति है, सरकारी कर्मचारी नहीं, और भास्कर ने खुद तहसीलदार का नाम इस्तेमाल किया होगा।

सरकारी पक्ष के अधिवक्ता लीलाधर शेंद्रे ने दोषसिद्धि की मांग की, लेकिन सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी भास्कर जांभुलकर की मृत्यु हो जाने से मुकदमा शेष दो आरोपियों तक सीमित रह गया। सभी साक्ष्यों पर विचार कर अदालत ने दोनों को बरी कर दिया।

आरोपी पक्ष की ओर से अधिवक्ता चंद्रशेखर जलतारे, मिलिंद चौरसिया, हर्षवर्धन नानोटी और मुकेश शुक्ला ने पैरवी की।


रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

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