नागपुर समाचार: रामटेक संस्कृत विश्वविद्यालय में 21 दिवसीय ज्योतिर्विज्ञान कार्यक्रम शुरू

रामटेक कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय ज्योतिर्विज्ञान कार्यक्रम: रामटेक के कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय में 21 दिवसीय ज्योतिर्विज्ञान कार्यक्रम शुरू हुआ। वेदांग ज्योतिष विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में 57 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया। प्रो. उमाशंकर ने वेदांग ज्योतिष और भारतीय कालगणना पर मार्गदर्शन दिया। प्रो. ललिता चंद्रात्रे ने भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने और सुरक्षित रखने की जरूरत बताई। विद्यार्थियों को ज्योतिर्विज्ञान के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कराया जाएगा।
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21 दिवसीय ज्योतिर्विज्ञान कार्यक्रम का शुभारंभ
रामटेक कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय ज्योतिर्विज्ञान कार्यक्रम: रामटेक स्थित कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय के वेदांग ज्योतिष विभाग ने विश्वविद्यालय परिसर में 21 दिवसीय ज्योतिर्विज्ञान कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को वेदांग ज्योतिष की मूलभूत संकल्पनाओं, उसके उपयोगों तथा भारतीय कालगणना पद्धति के महत्व से परिचित कराना है।
कार्यक्रम के संयोजक प्रो. प्रसाद गोखले ने प्रस्तावना में उद्देश्यों, स्वरूप और नियोजित गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के लिए कुल 57 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है, जो ज्योतिर्विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति बढ़ती रुचि दर्शाता है। विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. अतुल वैद्य ने आयोजकों तथा सहभागी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं।
दिल्ली विश्वविद्यालय के ज्योतिर्विज्ञान विषय के प्रोफेसर प्रो. उमाशंकर ने उद्घाटनपरक मार्गदर्शन देते हुए वेदांग ज्योतिष के महत्व को रेखांकित किया और भारतीय कालगणना पद्धति की वर्तमान प्रासंगिकता को विस्तार से समझाया।
57 विद्यार्थियों ने कराया पंजीकरण
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता केकेएसयू की शिक्षा संकाय की अधिष्ठाता प्रो. ललिता चंद्रात्रे ने की। उन्होंने आधुनिक समय में ज्योतिर्विज्ञान की उपयोगिता पर प्रकाश डाला और भारतीय पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को संरक्षित कर व्यापक स्तर पर प्रसारित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस अवसर पर प्रो. हरेकृष्ण अगस्ती, प्रो. कलापिनी अगस्ती और प्रो. पराग जोशी उपस्थित रहे। श्री अनुज शर्मा ने संचालन किया, जबकि डॉ. हृषीकेश साहू ने आभार व्यक्त किया।
आगामी 21 दिनों में विद्यार्थी ज्योतिर्विज्ञान के विभिन्न आयामों तथा भारतीय ज्ञान परंपरा में इसके स्थान का व्यवस्थित अध्ययन करेंगे।
रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

