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बंगाल में बाल विवाह पर कड़ा एक्शन, सरकारी योजनाओं का लाभ रोकने का ऐलान

बंगाल में बाल विवाह पर कड़ा एक्शन, सरकारी योजनाओं का लाभ रोकने का ऐलान
West Bengal Child Marriage: पश्चिम बंगाल में बाल विवाह और नाबालिग प्रसव के बढ़ते मामलों पर सरकार का कड़ा एक्शन। नाबालिग माताओं के पतियों को नोटिस और सरकारी योजनाओं के लाभ होंगे बंद। (File Photo)

पश्चिम बंगाल में बाल विवाह और नाबालिग प्रसव के बढ़ते मामलों पर सरकार का कड़ा एक्शन। नाबालिग माताओं के पतियों को नोटिस और सरकारी योजनाओं के लाभ होंगे बंद।

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Shinki Singh
Shinki Singh
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छह महीने में 60 हजार नाबालिग बनीं मां

पश्चिम बंगाल में कानून की धज्जियां उड़ाकर धड़ल्ले से हो रहे बाल विवाह और कम उम्र में मातृत्व के मामलों ने गंभीर रूप ले लिया है। ताजा स्वास्थ्य आंकड़ों के अनुसार राज्य में केवल छह महीनों 1 जनवरी से 3 जून के बीच के भीतर अस्पतालों में नाबालिगों द्वारा बच्चे को जन्म देने के आंकड़े 60,000 को पार कर चुके हैं। इस शर्मनाक स्थिति में मुर्शिदाबाद, मालदह और दक्षिण 24 परगना जैसे जिले सबसे आगे हैं।

कड़े एक्शन की चेतावनी और सरकारी योजनाओं पर रोक

स्वास्थ्य विभाग के इन चौंकाने वाले आंकड़ों को सामने रखते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इन साठ हजार मामलों से जुड़े व्यक्तियों को नोटिस भेजने और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर इन सभी लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा और साथ ही केंद्र तथा राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं से मिलने वाली सुविधाएं भी पूरी तरह बंद कर दी जाएंगी।

जिलावार नाबालिग प्रसव के चौंकाने वाले आंकड़े

स्वास्थ्य विभाग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक विभिन्न जिलों में छह महीने के भीतर दर्ज किए गए नाबालिग माताओं के मामले इस प्रकार हैं।

  • मुर्शिदाबाद: 12,847

  • दक्षिण 24 परगना: 4,178

  • पूर्व बर्दवान: 3,777

  • मालदह: 3,753

  • पश्चिम मेदिनीपुर: 3,020

  • उत्तर दिनाजपुर: 2,940

  • नदिया: 2,925

  • रामपुरहाट: 2,391

  • पुरुलिया: 2,116

  • बशीरहाट: 2,014

  • उत्तर 24 परगना: 1,961

  • कूचबिहार: 1,940

  • पूर्व मेदिनीपुर: 1,884

  • बीरभूम: 1,873

  • डायमंड हार्बर: 1,806

कानून का कड़ाई से पालन और यूसीसी पर बयान

भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो कानून का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के इस दूषित रूप को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस कुप्रथा को जड़ से खत्म करने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। इसके अलावा समान नागरिक संहिता से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में बताया गया कि 2 सितंबर को दिल्ली में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति की बैठक में राज्य के गृह सचिव ने हिस्सा लिया था। सरकार इस समिति की रिपोर्ट आने के बाद विधानसभा में नया बिल लाने की तैयारी कर रही है।


रिपोर्ट: शिंकी सिंह, कोलकाता

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शिंकी सिंह (Shinki Singh) पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग एक दशक का अनुभव रखती हैं। उन्होंने वर्ष 2017 में दैनिक सन्मार्ग से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जहाँ कई वर्षों तक फील्ड रिपोर्टिंग और न्यूज़ डेस्क की जिम्मेदारियाँ निभाईं। इस दौरान उन्होंने राजनीति, सामाजिक सरोकारों, महिला मुद्दों और जनहित से जुड़े विषयों पर व्यापक रिपोर्टिंग की। इसके साथ ही न्यूज़ एंकरिंग और वीडियो एडिटिंग का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त किया, जिससे डिजिटल और मल्टीमीडिया पत्रकारिता की उनकी समझ और अधिक सशक्त हुई। इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर से जुड़कर हार्ड न्यूज़, समसामयिक घटनाओं और लाइफस्टाइल पत्रकारिता सहित विभिन्न विषयों पर रिपोर्टिंग और लेखन किया। तथ्यपरक, निष्पक्ष और संतुलित पत्रकारिता में विश्वास रखते हुए वे प्रत्येक समाचार को विश्वसनीय स्रोतों, तथ्यों के सत्यापन और गहन अध्ययन के आधार पर प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देती हैं। वर्तमान में शिंकी सिंह राष्ट्र भारत से जुड़ी हैं, जहाँ वे राष्ट्रीय, राजनीतिक, सामाजिक और जनहित से जुड़े विषयों पर समाचार, विश्लेषण और विशेष रिपोर्ट तैयार कर रही हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक, प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। शैक्षणिक रूप से उन्होंने महार्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU), रोहतक से बी.एड. की शिक्षा प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से इतिहास एवं अंग्रेज़ी विषयों में स्नातकोत्तर (Master's) की डिग्री हासिल की है। वे पत्रकारिता में निरंतर सीखने, बदलते मीडिया परिदृश्य के अनुरूप स्वयं को अपडेट रखने तथा तथ्यों की पुष्टि के बाद ही समाचार प्रकाशित करने में विश्वास रखती हैं।