Ashok Mittal: देश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आज बुधवार की सुबह आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है। जानकारी के अनुसार ईडी की टीम सांसद के गुरुग्राम, जालंधर और पंजाब स्थित कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है। इस कार्रवाई के बाद एक ओर जहां जांच एजेंसी अपने काम में जुटी है, वहीं सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है।
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से जुड़ा है मामला
इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार, यह छापेमारी 8 से 9 ठिकानों पर की गई, जिसमें लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से जुड़े वित्तीय लेन-देन और कथित अनियमितताओं की जांच की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि ईडी को विश्वविद्यालय के फंड के इस्तेमाल में गड़बड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कुछ इनपुट मिले थे, जिसके आधार पर यह कार्रवाई शुरू की गई।
सांसद के बेटे के ठिकाने पर भी रेड
सुबह-सुबह हुई इस छापेमारी ने मित्तल परिवार को भी चौंका दिया। बताया जा रहा है कि जांच एजेंसी की टीम ने सांसद के बेटे से जुड़े कई ठिकानों पर भी दबिश दी है, क्योंकि वे भी विभिन्न कारोबारी गतिविधियों में सक्रिय हैं। ईडी अधिकारी मौके पर दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं और डिजिटल सबूतों को खंगालने में जुटे हैं। एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं किसी विदेशी निवेश या दान में नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ।
अरविंद केजरीवाल ने केंद्र पर लगाया आरोप
इस पूरी कार्रवाई के बीच राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ गया है। आम आदमी पार्टी ने इसे सीधा-सीधा राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सब पंजाब में आगामी चुनावों की तैयारी का हिस्सा है। उनका आरोप है कि चुनाव से पहले केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को दबाने के लिए किया जा रहा है।
वहीं AAP के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जहां-जहां चुनाव होते हैं, वहां पहले केंद्रीय एजेंसियां भेज दी जाती हैं। उनका दावा है कि इस तरह की कार्रवाई से बीजेपी को कोई फायदा नहीं होगा और पंजाब में जनता इसका जवाब देगी।
राज्यसभा में AAP ने अशोक मित्तल को चुना था उपनेता
गौरतलब है कि अशोक मित्तल को हाल ही में आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में अपना उपनेता नियुक्त किया था। उन्होंने इस पद पर राघव चड्ढा की जगह ली थी। ऐसे में यह छापेमारी राजनीतिक तौर पर और भी अहम मानी जा रही है।