Delimitation Bill: संसद में आज तीन बड़े बिल पेश किए गए हैं, जिनमें सबसे ज्यादा चर्चा परिसीमन बिल को लेकर हो रही है। सरकार का मकसद है देश में लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों को नई जनसंख्या के हिसाब से फिर से तय करना और महिलाओं को 33% आरक्षण जल्दी लागू करना। अगर यह बिल पास होता है, तो आने वाले समय में लोकसभा सीटों की संख्या 800 से भी ज्यादा हो सकती है।
परिसीमन होता क्या है?
बहुत आसान भाषा में समझें तो परिसीमन का मतलब है चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं और सीटों की संख्या को तय करना या बदलना। जैसे आपके शहर या जिले में कौन सा इलाका किस लोकसभा सीट में आएगा, यह परिसीमन से तय होता है। समय के साथ जनसंख्या बढ़ती या घटती है, इसलिए इन सीमाओं में बदलाव करना जरूरी हो जाता है ताकि हर क्षेत्र को बराबर प्रतिनिधित्व मिल सके।
1971 की जनगणना के आधार पर तय है सीटें
सरकार जो नया परिसीमन विधेयक लाई है, उसके तहत एक नया परिसीमन आयोग बनाया जाएगा। यह आयोग ताजा जनगणना के आंकड़ों के आधार पर तय करेगा कि किस राज्य में कितनी सीटें होंगी और उनकी सीमाएं क्या होंगी। अभी जो सीटें हैं, वे 1971 की जनगणना के आधार पर तय की गई थीं, जबकि देश की आबादी और हालात काफी बदल चुके हैं।
850 तक पहुंच सकती हैं लोकसभा की कुल सीटें
अगर यह बिल लागू होता है, तो लोकसभा की कुल सीटें बढ़कर करीब 850 तक पहुंच सकती हैं। इसमें राज्यों के लिए लगभग 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए करीब 35 सीटें हो सकती हैं। इसका सीधा असर यह होगा कि ज्यादा जनसंख्या वाले राज्यों में सीटें बढ़ेंगी और प्रतिनिधित्व मजबूत होगा।
क्यों हो रहा परिसीमन बिल के लेकर विरोध ?
लेकिन इस बिल का विरोध भी कम नहीं है। विपक्ष का कहना है कि सरकार इतनी जल्दी यह बदलाव क्यों करना चाहती है? कुछ राज्यों को डर है कि इससे उनके राजनीतिक महत्व में कमी आ सकती है। दरअसल, 1971 के बाद सीटों के बंटवारे को रोक दिया गया था, ताकि जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा दिया जा सके। अब इस रोक को हटाने की बात हो रही है, जिससे कई राज्यों के बीच संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
आखिरी बार 2002 में हुआ था परिसीमन
आखिरी बार 2002 में परिसीमन हुआ था, लेकिन तब सिर्फ सीमाएं बदली गई थीं, सीटों की संख्या नहीं। अब सरकार पहली बार सीटों की संख्या भी बढ़ाने जा रही है।