जरूर पढ़ें

परिसीमन बिल क्या है और क्यों मचा है इतना बवाल? आसान भाषा में समझिए पूरा मामला

परिसीमन बिल क्या है और क्यों मचा है इतना बवाल? आसान भाषा में समझिए पूरा मामला
परिसीमन बिल क्या है और क्यों मचा है इतना बवाल? आसान भाषा में समझिए पूरा मामला (File Photo)

Delimitation Bill: सरकार नया परिसीमन बिल लाई है, जिससे चुनावी सीटों की संख्या और उनकी सीमाएं बदली जाएंगी। इससे लोकसभा सीटें बढ़ सकती हैं और महिलाओं को 33% आरक्षण मिलेगा। लेकिन इस बदलाव को लेकर कई राज्यों और विपक्ष की तरफ से सवाल और विरोध भी सामने आ रहे हैं। यहां जानिए परिसीमन बिल से जुड़े सभी सवालों के जवाब.

Updated:

Delimitation Bill: संसद में आज तीन बड़े बिल पेश किए गए हैं, जिनमें सबसे ज्यादा चर्चा परिसीमन बिल को लेकर हो रही है। सरकार का मकसद है देश में लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों को नई जनसंख्या के हिसाब से फिर से तय करना और महिलाओं को 33% आरक्षण जल्दी लागू करना। अगर यह बिल पास होता है, तो आने वाले समय में लोकसभा सीटों की संख्या 800 से भी ज्यादा हो सकती है।

परिसीमन होता क्या है?

बहुत आसान भाषा में समझें तो परिसीमन का मतलब है चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं और सीटों की संख्या को तय करना या बदलना। जैसे आपके शहर या जिले में कौन सा इलाका किस लोकसभा सीट में आएगा, यह परिसीमन से तय होता है। समय के साथ जनसंख्या बढ़ती या घटती है, इसलिए इन सीमाओं में बदलाव करना जरूरी हो जाता है ताकि हर क्षेत्र को बराबर प्रतिनिधित्व मिल सके।

1971 की जनगणना के आधार पर तय है सीटें

सरकार जो नया परिसीमन विधेयक लाई है, उसके तहत एक नया परिसीमन आयोग बनाया जाएगा। यह आयोग ताजा जनगणना के आंकड़ों के आधार पर तय करेगा कि किस राज्य में कितनी सीटें होंगी और उनकी सीमाएं क्या होंगी। अभी जो सीटें हैं, वे 1971 की जनगणना के आधार पर तय की गई थीं, जबकि देश की आबादी और हालात काफी बदल चुके हैं।

850 तक पहुंच सकती हैं लोकसभा की कुल सीटें

अगर यह बिल लागू होता है, तो लोकसभा की कुल सीटें बढ़कर करीब 850 तक पहुंच सकती हैं। इसमें राज्यों के लिए लगभग 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए करीब 35 सीटें हो सकती हैं। इसका सीधा असर यह होगा कि ज्यादा जनसंख्या वाले राज्यों में सीटें बढ़ेंगी और प्रतिनिधित्व मजबूत होगा।

क्यों हो रहा परिसीमन बिल के लेकर विरोध ?

लेकिन इस बिल का विरोध भी कम नहीं है। विपक्ष का कहना है कि सरकार इतनी जल्दी यह बदलाव क्यों करना चाहती है? कुछ राज्यों को डर है कि इससे उनके राजनीतिक महत्व में कमी आ सकती है। दरअसल, 1971 के बाद सीटों के बंटवारे को रोक दिया गया था, ताकि जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा दिया जा सके। अब इस रोक को हटाने की बात हो रही है, जिससे कई राज्यों के बीच संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।

आखिरी बार 2002 में हुआ था परिसीमन

आखिरी बार 2002 में परिसीमन हुआ था, लेकिन तब सिर्फ सीमाएं बदली गई थीं, सीटों की संख्या नहीं। अब सरकार पहली बार सीटों की संख्या भी बढ़ाने जा रही है।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।

Dipali Kumari

दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है।

अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है।

वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें।

मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) :
• सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग।
• जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना।
• जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन।
• हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता।

विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) :
जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।