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दिल्ली ब्लास्ट: उजागर हुआ ‘सफेदपोश आतंक मॉड्यूल’, फंड, भर्ती और बम निर्माण का भयावह जाल

Delhi Blast
Delhi Blast: सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल की फंडिंग, भर्ती और बम निर्माण का नेटवर्क (File Photo)

दिल्ली ब्लास्ट की जांच में एक सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल का खुलासा हुआ है, जिसमें डॉक्टर, तकनीशियन और मौलवी शामिल रहे। यह नेटवर्क फंडिंग, आतंकियों की भर्ती और बम निर्माण की जिम्मेदारी संभाल रहा था। इस मॉड्यूल का उद्देश्य शिक्षित युवाओं को आतंकवाद की ओर मोड़कर बड़े हमले करना था।

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दिल्ली ब्लास्ट में सामने आया सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल

भारत की राजधानी दिल्ली में हुए आत्मघाती कार धमाके ने सुरक्षा एजेंसियों को नए तरह के आतंक मॉडल से रूबरू कराया है। यह मॉडल साधारण उग्रवादियों का नहीं बल्कि शिक्षित, सामाजिक रूप से सम्मानजनक और खुद को सभ्य दिखाने वाले आतंकियों का नेटवर्क है। इन्हें ‘व्हाइट कॉलर मॉड्यूल’ कहा गया है। इनकी भूमिका सिर्फ हमले करने तक सीमित नहीं थी, बल्कि ये फंड इकट्ठा करते थे, विस्फोटक तैयार करते थे और खासतौर पर पढ़े-लिखे युवाओं को आतंकी संगठन से जुड़ने के लिए तैयार करते थे।

यह नेटवर्क जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों में फैला बताया जा रहा है। इस मॉड्यूल का उद्देश्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में भय पैदा करना और अपनी विचारधारा को ‘शिक्षित समाज’ तक पहुंचाना था ताकि आतंकवाद का नया चेहरा तैयार किया जा सके।

शिक्षित युवाओं की भर्ती का सुनियोजित अभियान

इस मॉड्यूल की सबसे अहम कड़ी जम्मू-कश्मीर के शोपियां में मस्जिद के मौलवी इरफान अहमद को माना जा रहा है। उसका लक्ष्य खासतौर पर पढ़े-लिखे युवाओं को कट्टरपंथी बनाना था। वह छात्रों और डॉक्टरों को प्रभावित कर उन्हें जैश-ए-मोहम्मद की ओर धकेलता था। इरफान ने सबसे पहले फरीदाबाद के अल-फलाह विश्वविद्यालय के डॉक्टर मुजम्मिल शकील से संपर्क स्थापित किया, जिसे इस मॉड्यूल के विस्तार की जिम्मेदारी मिली।

डॉक्टर, तकनीशियन और फंड कलेक्टर बने आतंकी

मुजम्मिल शकील ने यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों को आतंकी विचारधारा से जोड़ा। इसमें अदील अहमद राथर, अदील के माध्यम से शाहीन सईद और फिर उसके भाई परवेज अंसारी तक भर्ती की प्रक्रिया पहुंच गई। इनका काम सिर्फ वैचारिक समर्थन देना नहीं था, बल्कि छिपे हुए तरीकों से हथियार और विस्फोटक जुटाना भी था।

शाहीन सईद इस मॉड्यूल की दूसरी बड़ी भूमिका निभा रही थी। वह गरीब महिलाओं को कट्टरपंथ से जोड़ती थी और फंड जुटाने के लिए विभिन्न नेटवर्क का इस्तेमाल करती थी। उसने करीब 20 लाख रुपये तक फंड इकट्ठा किया, जो मॉड्यूल के विस्तार के लिए बेहद महत्वपूर्ण था।

फंडिंग नेटवर्क और हवाला तंत्र का इस्तेमाल

इस मॉड्यूल के कई सदस्य हवाला के माध्यम से पैसे भेजने और आतंकियों के लिए फंड जुटाने में शामिल थे। ये पैसे आतंकी गतिविधियों, बम निर्माण और भर्ती प्रक्रिया में लगाए गए। पुलिस और एजेंसियों ने फरीदाबाद में 2,900 किलोग्राम विस्फोटक बरामद किए, जो इस मॉड्यूल की तैयारी और गहराई को प्रमाणित करता है।

हमले की योजना और आत्मघाती कार का रहस्य

दिल्ली के लाल किले के पास आत्मघाती विस्फोट करने वाला उमर उन नबी इस मॉड्यूल का सबसे कट्टरपंथी सदस्य था। वह अमोनियम नाइट्रेट से बम बनाने में प्रशिक्षित था। जांच में सामने आए वीडियो में वह अपनी विचारधारा को सही ठहराते हुए हमला करने की तैयारी दिखाता है। उसकी कार आईईडी से भरी हुई थी और इस हमले में इस्तेमाल की गई कार की व्यवस्था आमिर राशिद अली ने की थी, जिसे दिल्ली से गिरफ्तार किया गया।

ड्रोन और रॉकेट से हमले की योजना

इस मॉड्यूल का एक और सदस्य जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश तकनीशियन के रूप में काम कर रहा था। उसे ड्रोन पर विस्फोटक लगाने, रॉकेट बनाने और नई तकनीकों द्वारा हमले की योजना तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। यह दर्शाता है कि यह मॉड्यूल सिर्फ जमीनी हमलों तक सीमित नहीं रहना चाहता था, बल्कि उच्च तकनीक का उपयोग करके भविष्य के हमलों की तैयारी कर रहा था।

खतरा सिर्फ एक हमले तक सीमित नहीं

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इस सफेदपोश मॉड्यूल का लक्ष्य सिर्फ एक धमाका नहीं था, बल्कि देश में पढ़े-लिखे युवाओं की नई पीढ़ी को आतंकी संगठनों की ओर मोड़ना था। यह भविष्य में और ज्यादा संगठित हमलों की दिशा में एक बड़े अभियान की शुरुआत हो सकती थी। मॉड्यूल का पर्दाफाश आतंकवाद के नए रूप की पहचान करता है, जहां हथियारों से ज्यादा शिक्षा और तकनीक सबसे बड़ा हथियार बना दी गई है।

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Asfi Shadab

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