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दिल्ली हाई कोर्ट से उमर खालिद को बड़ी राहत! 3 दिन की अंतरिम जमानत मंजूर

दिल्ली हाई कोर्ट से उमर खालिद को बड़ी राहत! 3 दिन की अंतरिम जमानत मंजूर
दिल्ली हाई कोर्ट से उमर खालिद को बड़ी राहत! 3 दिन की अंतरिम जमानत मंजूर (फाइल फोटो)

दिल्ली दंगा मामले में जेल में बंद उमर खालिद को अचानक बड़ी राहत मिल गई है। हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब वह कुछ दिनों के लिए जेल से बाहर आ सकेंगे। इस फैसले ने राजनीतिक और कानूनी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। आखिर कोर्ट ने क्यों दी यह राहत, जानिए पूरी कहानी।

Updated:

Umar Khalid: दिल्ली दंगों के मामले में जेल में बंद सामाजिक कार्यकर्ता उमर खालिद को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी मां की सर्जरी को देखते हुए उन्हें तीन दिन की अंतरिम जमानत देने का फैसला सुनाया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार उमर खालिद को 1 जून से 3 जून तक जेल से बाहर रहने की अनुमति दी गई है। इस फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

निचली अदालत में ख़ारिज हुई थी याचिका

दरअसल, उमर खालिद ने हाल ही में निचली अदालत के उस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। उन्होंने अदालत से 15 दिनों की अंतरिम जमानत मांगी थी। उनका कहना था कि उनके चाचा का निधन हो गया है और वह उनके चेहलुम में शामिल होना चाहते हैं। साथ ही उनकी मां की सर्जरी भी होनी है, इसलिए परिवार के साथ रहना जरूरी है।

हालांकि निचली अदालत ने उनकी दलील को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया था। अदालत ने कहा था कि अंतिम संस्कार में शामिल होना इतना जरूरी नहीं है और उनकी मां की देखभाल के लिए परिवार के अन्य सदस्य मौजूद हैं। इसके बाद उमर खालिद ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

शर्तों के साथ मिली जमानत

अब हाई कोर्ट ने मामले को मानवीय आधार पर देखते हुए उन्हें सीमित समय के लिए राहत दी है। कोर्ट ने साफ किया कि यह जमानत सिर्फ मां की सर्जरी और पारिवारिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दी जा रही है। इस दौरान उन्हें कोर्ट द्वारा तय सभी नियमों का पालन करना होगा।

दिल्ली दंगों में हुई थी  53 लोगों की मौत

बता दें कि उमर खालिद फरवरी 2020 में हुए उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी हैं। उन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल इस मामले की जांच कर रही है। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। यह हिंसा नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी के विरोध के दौरान भड़की थी।

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Dipali Kumari

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