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नागपुर की दीक्षाभूमि से दुनिया को मिलता है शांति और करुणा का संदेश, भदंत ससाई ने पवित्रता बनाए रखने की अपील की

नागपुर की दीक्षाभूमि से दुनिया को मिलता है शांति और करुणा का संदेश, भदंत ससाई ने पवित्रता बनाए रखने की अपील की
Deekshabhoomi Buddhism Bhadant Surai Sasai Message: नागपुर की दीक्षाभूमि से दुनिया को मिलता है शांति और करुणा का संदेश, भदंत ससाई ने पवित्रता बनाए रखने की अपील की (Photo source: Wikipedia)

Deekshabhoomi Buddhism Bhadant Surai Sasai Message: नागपुर की दीक्षाभूमि को भदंत आर्य नागार्जुन सुरेई ससाई ने दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों की आस्था और प्रेरणा का मूल स्तंभ बताया। उन्होंने इसकी पवित्रता, गरिमा और अनुशासन बनाए रखने का आह्वान किया। साथ ही लोगों से करुणा, प्रेम, मैत्री और पंचशील के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने तथा विकास के कार्य को आगे बढ़ाने की बात कही।

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Asfi Shadab
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दीक्षाभूमि की पवित्रता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी

Deekshabhoomi Buddhism Bhadant Surai Sasai Message: नागपुर। दीक्षाभूमि केवल एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों की आस्था और प्रेरणा का मूल स्तंभ है। यहां से शांति, करुणा, प्रेम और मैत्री का संदेश पूरे विश्व में पहुंचता है। इसलिए इस पवित्र स्थल की गरिमा और पवित्रता बनाए रखना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। यह आह्वान डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक समिति (दीक्षाभूमि) के अध्यक्ष तथा धम्मसेनानायक भदंत आर्य नागार्जुन सुरेई ससाई ने किया।

इंदौर स्थित बुद्ध विहार में धम्म संदेश देते हुए भदंत ससाई ने कहा कि शरीर नश्वर है और एक दिन उसका अस्तित्व समाप्त होकर राख में बदल जाएगा। इसलिए शारीरिक सुंदरता की अपेक्षा मन की सुंदरता अधिक महत्वपूर्ण है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने मन को सुंदर बनाने और उसमें करुणा, प्रेम तथा मैत्री जैसे मानवीय गुणों का विकास करने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि महामानव डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने दीक्षाभूमि पर लाखों बौद्ध अनुयायियों को धम्म दीक्षा प्रदान की थी। उन्होंने समाज को “शिक्षित बनो, संगठित हो और संघर्ष करो” का मूलमंत्र दिया तथा पंचशील के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। इन विचारों के आधार पर समाज के अनेक लोग शिक्षित हुए और आज देश-विदेश में विभिन्न क्षेत्रों में उच्च पदों पर कार्यरत हैं।

करुणा, प्रेम और मैत्री के मार्ग पर चलने का दिया संदेश

भदंत ससाई ने कहा कि दीक्षाभूमि का सर्वांगीण विकास केवल स्मारक के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के हित से जुड़ा विषय है। यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को स्थल की पवित्रता, अनुशासन और मर्यादा बनाए रखनी चाहिए तथा झूठ बोलने या किसी के विश्वास को ठेस पहुंचाने वाले कार्यों से बचना चाहिए।

समिति के तत्कालीन अध्यक्ष दिवंगत रा.सु. गवई और तत्कालीन सचिव सदानंद फुलझेले ने अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए दीक्षाभूमि के विकास की नींव रखी थी। भदंत ससाई ने कहा, “उनके विश्वास को सार्थक करते हुए दीक्षाभूमि के विकास को आगे बढ़ाना तथा उनके कार्य और नाम को अमर बनाने के लिए निरंतर प्रयास करता रहूंगा।”

आगे भदंत ससाई की अगुवाई में दीक्षाभूमि के विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।


रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

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