NDA की नजर विपक्षी सांसदों पर! TMC के बाद अब उद्धव ठाकरे की शिवसेना UBT में बड़ी टूट की आशंका

लोकसभा में अपना संख्याबल बढ़ाने की कोशिशों के बीच एनडीए की नजर अब विपक्षी दलों के सांसदों पर है। टीएमसी के बाद शिवसेना (यूबीटी) में भी टूट की अटकलें तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उद्धव ठाकरे गुट के कई सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थाम सकते हैं।
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Shiv Sena: केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) लोकसभा में अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश में जुटा हुआ है। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ नेताओं द्वारा पार्टी में बगावत और कई सांसदों के समर्थन का दावा किए जाने के बाद अब महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर भी बड़ी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। खबरें हैं कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) में भी टूट हो सकती है।
लोकसभा में शिवसेना के 9 सांसद
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिवसेना (UBT) के कुछ सांसद पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। लोकसभा में फिलहाल उद्धव ठाकरे गुट के 9 सांसद हैं। दल-बदल कानून के अनुसार यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई सांसद एक साथ किसी दूसरे दल में शामिल होते हैं, तो उनकी सदस्यता नहीं जाती। इसी वजह से कम से कम 6 सांसदों के एक साथ पाला बदलने की चर्चा हो रही है।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में एनडीए की बड़ी जीत के बाद से ही उद्धव ठाकरे गुट में असंतोष की खबरें सामने आती रही हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एकनाथ शिंदे ने पिछले कुछ वर्षों में राज्य के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपने साथ जोड़कर अपनी स्थिति मजबूत की है। यही कारण है कि शिवसेना (UBT) के भीतर भी लगातार दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।
भाजपा की रणनीति
दरअसल, बीजेपी और एनडीए की नजर लोकसभा में अपने संख्याबल को और मजबूत करने पर है। वर्तमान में लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं, जिनमें से कुछ सीटें खाली हैं। दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए लगभग 360 सांसदों का समर्थन जरूरी माना जाता है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि एनडीए इसी आंकड़े के करीब पहुंचने के लिए विपक्षी दलों के सांसदों को अपने साथ लाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
फिलहाल शिवसेना (UBT) में संभावित टूट को लेकर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यह साफ नहीं है कि बगावत की चर्चाएं कितनी सही साबित होंगी। लेकिन यदि ऐसा होता है तो महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ लोकसभा के संख्याबल पर भी इसका बड़ा असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

