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NDA की नजर विपक्षी सांसदों पर! TMC के बाद अब उद्धव ठाकरे की शिवसेना UBT में बड़ी टूट की आशंका

NDA की नजर विपक्षी सांसदों पर! TMC के बाद अब उद्धव ठाकरे की शिवसेना UBT में बड़ी टूट की आशंका
NDA की नजर विपक्षी सांसदों पर! TMC के बाद अब उद्धव ठाकरे की शिवसेना UBT में बड़ी टूट की आशंका (File Photo)

लोकसभा में अपना संख्याबल बढ़ाने की कोशिशों के बीच एनडीए की नजर अब विपक्षी दलों के सांसदों पर है। टीएमसी के बाद शिवसेना (यूबीटी) में भी टूट की अटकलें तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उद्धव ठाकरे गुट के कई सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थाम सकते हैं।

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Dipali Kumari
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Shiv Sena: केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) लोकसभा में अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश में जुटा हुआ है। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ नेताओं द्वारा पार्टी में बगावत और कई सांसदों के समर्थन का दावा किए जाने के बाद अब महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर भी बड़ी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। खबरें हैं कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) में भी टूट हो सकती है।

लोकसभा में शिवसेना के 9 सांसद

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिवसेना (UBT) के कुछ सांसद पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। लोकसभा में फिलहाल उद्धव ठाकरे गुट के 9 सांसद हैं। दल-बदल कानून के अनुसार यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई सांसद एक साथ किसी दूसरे दल में शामिल होते हैं, तो उनकी सदस्यता नहीं जाती। इसी वजह से कम से कम 6 सांसदों के एक साथ पाला बदलने की चर्चा हो रही है।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में एनडीए की बड़ी जीत के बाद से ही उद्धव ठाकरे गुट में असंतोष की खबरें सामने आती रही हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एकनाथ शिंदे ने पिछले कुछ वर्षों में राज्य के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपने साथ जोड़कर अपनी स्थिति मजबूत की है। यही कारण है कि शिवसेना (UBT) के भीतर भी लगातार दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

भाजपा की रणनीति

दरअसल, बीजेपी और एनडीए की नजर लोकसभा में अपने संख्याबल को और मजबूत करने पर है। वर्तमान में लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं, जिनमें से कुछ सीटें खाली हैं। दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए लगभग 360 सांसदों का समर्थन जरूरी माना जाता है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि एनडीए इसी आंकड़े के करीब पहुंचने के लिए विपक्षी दलों के सांसदों को अपने साथ लाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

फिलहाल शिवसेना (UBT) में संभावित टूट को लेकर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यह साफ नहीं है कि बगावत की चर्चाएं कितनी सही साबित होंगी। लेकिन यदि ऐसा होता है तो महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ लोकसभा के संख्याबल पर भी इसका बड़ा असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।