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मथुरा में ‘फरसा वाले बाबा’ की हत्या से बवाल, हाईवे जाम और पुलिस से झड़प

मथुरा में ‘फरसा वाले बाबा’ की हत्या से बवाल, हाईवे जाम और पुलिस से झड़प
'फरसा बाबा’ की मौत पर साजिश का खुलासा, ईद पर तनाव फ़ैलाने का था इरादा!

मथुरा में ‘फरसा वाले बाबा’ की मौत के बाद भारी बवाल मच गया। गुस्साए समर्थकों ने हाईवे जाम कर दिया और पुलिस से झड़प हुई। पथराव और कार्रवाई में कई लोग घायल हुए। घटना के बाद इलाके में तनाव बना हुआ है और पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

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Dipali Kumari
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Farsa Wale Baba Murder: मथुरा के ब्रज क्षेत्र में आज शनिवार तड़के उस वक्त सनसनी फैल गई, जब प्रसिद्ध गौ रक्षक संत चंद्रशेखर फरसा वाले बाबा की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। घटना कोटवन चौकी क्षेत्र के नवीपुर गांव के पास हुई, जहां एक तेज रफ्तार कंटेनर ने उन्हें कुचल दिया। मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

गौ तस्करी की सूचना पर निकले थे फरसा वाले बाबा

बताया जा रहा है कि बाबा को तड़के करीब 4 बजे गौ तस्करी की सूचना मिली थी। हमेशा की तरह वे बिना देर किए मौके पर पहुंच गए और एक संदिग्ध कंटेनर को रोकने की कोशिश करने लगे। इसी दौरान यह हादसा हुआ। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह महज दुर्घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित हमला हो सकता है।

आक्रोशित लोगों ने किया राष्ट्रीय राजमार्ग जाम

घटना की खबर फैलते ही इलाके में भारी भीड़ जुट गई। बाबा के समर्थकों और गौ रक्षकों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। गुस्साए लोगों ने दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया, जिससे घंटों तक यातायात प्रभावित रहा। हालात को संभालने के लिए भारी पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया।

प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव

स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हो गया। भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया, जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और रबर बुलेट का इस्तेमाल किया। इस दौरान अफरा-तफरी मच गई और कई लोग इधर-उधर भागते नजर आए। आक्रोशित लोगों ने एडीएम प्रशासन की गाड़ी पर भी हमला कर दिया और उसमें तोड़फोड़ की। इस झड़प में कुछ पुलिसकर्मी और स्थानीय लोग घायल हुए हैं।

एक युवक हिरासत में

पुलिस ने मामले में एक युवक को हिरासत में लिया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। अधिकारियों का कहना है कि हर पहलू से जांच की जा रही है और दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

‘फरसा वाले बाबा’ ब्रज क्षेत्र में एक निडर और लोकप्रिय गौ रक्षक के रूप में जाने जाते थे। वे हमेशा हाथ में फरसा लेकर गौ-वंश की रक्षा के लिए तत्पर रहते थे और गौरक्षा आंदोलन का प्रमुख चेहरा माने जाते थे।

फिलहाल, उनके निधन के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल है। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं, ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे।

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।