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पूर्वी कोलकाता के आनंदपुर गोदाम अग्निकांड में 10 लोगों की मौत, बचाव कार्य जारी

पूर्वी कोलकाता के आनंदपुर गोदाम अग्निकांड में 10 लोगों की मौत, बचाव कार्य जारी
Anandpur Godown Fire: पूर्वी कोलकाता के आनंदपुर में भीषण अग्निकांड, 10 से ज्यादा लोगों की मौत की आशंका (File Photo)

पूर्वी कोलकाता के आनंदपुर नाजिराबाद स्थित मोमो कंपनी के गोदाम में रविवार रात 3 बजे भीषण आग लगी। 19 घंटे बाद भी आग जारी है। 10 शव मिले, 20 परिवारों ने लापता रिपोर्ट दर्ज कराई। दमकल मंत्री सुजीत बोस ने घटनास्थल का दौरा किया, FIR दर्ज होगी। फायर ऑडिट की भी जांच होगी। बचाव कार्य जारी है।

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Asfi Shadab
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पूर्वी कोलकाता के आनंदपुर इलाके के नाजिराबाद में स्थित एक बड़े गोदाम में रविवार देर रात लगी भीषण आग ने पूरे इलाके को दहला दिया है। इस हादसे में अब तक 10 लोगों के शव और शव के अंग मिल चुके हैं, जबकि 20 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। करीब 19 घंटे बीत जाने के बाद भी आग पूरी तरह से काबू में नहीं आ पाई है और गोदाम के अंदर अभी भी धीमी आग जल रही है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, रविवार की रात करीब 3 बजे इस गोदाम में अचानक आग लग गई। यह गोदाम एक प्रसिद्ध मोमो कंपनी का है, जहां बड़ी मात्रा में सॉफ्ट ड्रिंक और सूखे खाने के पैकेट भरे हुए थे। आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू की गई।

मंत्री ने किया घटनास्थल का दौरा

दमकल मंत्री सुजीत बोस ने सोमवार को घटनास्थल का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया। मंत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इस घटना की गहन जांच की जाएगी और इस मामले में FIR दर्ज की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह भी जांचा जाएगा कि इस गोदाम में फायर ऑडिट हुआ था या नहीं। सुजीत बोस ने कहा, “हम यह देखेंगे कि यहां सुरक्षा के सभी नियमों का पालन किया गया था या नहीं। जो भी जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

19 घंटे की लड़ाई

दमकल विभाग और पुलिस की टीमें लगातार 19 घंटे से आग से जूझ रही हैं। आग इतनी भयंकर थी कि दो बड़े गोदामों को पूरी तरह से अपनी चपेट में ले लिया। गोदाम में रखे सॉफ्ट ड्रिंक और सूखे खाने के पैकेट आग के लिए ईंधन का काम कर रहे थे, जिससे आग को काबू करना बेहद मुश्किल हो गया।

दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गोदाम की बनावट और अंदर रखे सामान की वजह से आग तेजी से फैल गई। आग इतनी तेज थी कि कई घंटों तक दमकलकर्मी अंदर नहीं जा सके। धीरे-धीरे जब आग कुछ काबू में आई, तब जाकर बचाव कार्य शुरू हो सका।

मिले शव और शव के अंग

सोमवार रात 9 बजे तक सात शव के अंग मिलने की पुष्टि हुई। इससे पहले तीन शव निकाले गए थे, जो पूरी तरह से जलकर कंकाल जैसे हो गए थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, अब तक 20 परिवारों ने अपने सदस्यों की लापता होने की शिकायत दर्ज कराई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि हताहतों की संख्या और भी बढ़ सकती है।

मृतकों की शिनाख्त करना बेहद मुश्किल हो गया है क्योंकि शव पूरी तरह से जल चुके हैं। DNA टेस्ट की मदद से ही शिनाख्त हो पाएगी। पुलिस ने सभी परिवारों से संपर्क किया है और उनके DNA सैंपल लिए जा रहे हैं।

हवा में पसरी जली हुई बदबू

घटनास्थल पर पहुंचने पर चारों तरफ जले हुए सामान की बदबू महसूस हो रही है। आसपास के इलाकों में भी यह बदबू फैल गई है। स्थानीय लोगों ने बताया कि रात में जब आग लगी तो ऐसा लग रहा था जैसे कोई बम फटा हो। धमाके की आवाज काफी दूर तक सुनाई दी।

पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। कई लोग अपने परिजनों को ढूंढते हुए घटनास्थल पर मौजूद हैं। एक महिला ने रोते हुए बताया कि उसका बेटा गोदाम में काम करता था और रविवार रात से उसका कोई पता नहीं है। उसका फोन भी बंद आ रहा है।

क्या था गोदाम में

यह गोदाम एक जानी-मानी मोमो कंपनी का था। यहां सॉफ्ट ड्रिंक और सूखे खाने के पैकेट बड़ी मात्रा में स्टोर किए गए थे। गोदाम काफी बड़ा था और दो हिस्सों में बंटा हुआ था। दोनों हिस्से पूरी तरह से सामान से भरे हुए थे।

स्थानीय लोगों ने बताया कि इस गोदाम में कई मजदूर काम करते थे। कुछ मजदूर रात की पाली में भी काम करते थे। आग लगने के समय कितने लोग अंदर थे, इसकी सही जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है।

सुरक्षा नियमों का पालन नहीं

शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि गोदाम में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। फायर एग्जिट का भी सही प्रबंध नहीं था। यह भी साफ नहीं है कि फायर ऑडिट हुआ था या नहीं। दमकल मंत्री ने इन सभी बातों की जांच के आदेश दिए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे गोदामों में सख्त सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी है। फायर सेफ्टी इक्विपमेंट, आग बुझाने के यंत्र, और आपातकालीन निकास की व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन इस गोदाम में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी।

राजनीतिक घमासान भी शुरू

इस घटना को लेकर राजनीतिक घमासान भी शुरू हो गया है। विपक्षी दलों ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है। वहीं सत्ताधारी दल ने कहा है कि दोषियों को सजा जरूर मिलेगी। सभी राजनीतिक दल पीड़ित परिवारों से मिलने घटनास्थल पहुंच रहे हैं।

बचाव कार्य जारी

फिलहाल बचाव कार्य अभी भी जारी है। दमकल की कई गाड़ियां मौके पर मौजूद हैं। NDRF की टीम भी बुलाई गई है। पुलिस ने पूरे इलाके को सील कर दिया है। आम लोगों का आना-जाना बंद कर दिया गया है।

अधिकारियों का कहना है कि जब तक आग पूरी तरह से बुझ नहीं जाती और मलबा साफ नहीं हो जाता, तब तक सही आंकड़ा सामने नहीं आ पाएगा। अभी यह कहना मुश्किल है कि कितने लोगों की मौत हुई है।

यह घटना एक बार फिर सुरक्षा नियमों के पालन की अहमियत को सामने लाती है। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में फायर सेफ्टी के नियमों का सख्ती से पालन होना चाहिए, नहीं तो ऐसी दुर्घटनाएं होती रहेंगी।

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।