SIR Protest Kolkata: कोलकाता में पश्चिम बंगाल जमियत उलमा के आह्वान पर एक विशाल प्रदर्शन मार्च का आयोजन किया गया। यह प्रदर्शन एसआईआर यानी संदिग्ध मतदाता पहचान रिपोर्ट के नाम पर असली नागरिकों को परेशान किए जाने और उन्हें मतदाता सूची से हटाने की कथित साजिश के खिलाफ था। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चुनाव आयोग भाजपा के पक्ष में काम कर रहा है और लोगों के मताधिकार को छीनने की कोशिश की जा रही है।
राजाबाजार, शियालदह, मौलाली और एसएन बनर्जी रोड से शुरू हुए यह मार्च धर्मतला होते हुए राजभवन की ओर बढ़ा। हजारों की संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने इस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। जमियत के प्रमुख नेता सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए।
एसआईआर विवाद क्या है
एसआईआर यानी संदिग्ध मतदाता पहचान रिपोर्ट एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें चुनाव आयोग संदिग्ध मतदाताओं की पहचान करता है। इसका उद्देश्य नकली मतदाताओं को सूची से हटाना होता है। लेकिन पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों का आरोप है कि इस प्रक्रिया का दुरुपयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि असली और वैध नागरिकों को भी इस बहाने से परेशान किया जा रहा है और उनके नाम मतदाता सूची से काटे जा रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह सब एक सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है। उनका मानना है कि अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं को चुनाव में भाग लेने से रोकने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। इससे लोकतंत्र और मताधिकार पर सीधा हमला हो रहा है।
चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप
विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों ने चुनाव आयोग पर भाजपा के पक्ष में काम करने का गंभीर आरोप लगाया। उनका कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को निष्पक्ष रहना चाहिए, लेकिन वर्तमान में ऐसा नहीं हो रहा है। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि एसआईआर की आड़ में एक खास समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।
जमियत उलमा के नेताओं ने कहा कि जो लोग दशकों से इस देश में रह रहे हैं, जिनके पास सभी जरूरी कागजात हैं, उन्हें भी संदिग्ध बताया जा रहा है। उन्हें बार-बार दस्तावेज दिखाने के लिए कहा जा रहा है। यह प्रक्रिया न केवल परेशान करने वाली है बल्कि अपमानजनक भी है।
विरोध प्रदर्शन की रणनीति
SIR Protest Kolkata: कोलकाता में आयोजित इस महा मिछिल की योजना बड़े ध्यान से बनाई गई थी। शहर के चार अलग-अलग स्थानों से मार्च शुरू हुआ। राजाबाजार, शियालदह, मौलाली और एसएन बनर्जी रोड से चले प्रदर्शनकारी धर्मतला में एकत्रित हुए। फिर वहां से एक विशाल जुलूस राजभवन की ओर बढ़ा।
इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाओं और युवाओं ने भी हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए और अपनी मांगों को लेकर तख्तियां उठाईं। पूरा प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे और पुलिस की मौजूदगी भी रही।
सिद्दीकुल्लाह चौधरी का बयान
जमियत उलमा के प्रमुख नेता सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने इस मौके पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह आंदोलन अल्पसंख्यक समुदाय के मताधिकार की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि एसआईआर के नाम पर जो हो रहा है वह संविधान के खिलाफ है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए और जिन लोगों के नाम गलत तरीके से काटे गए हैं, उन्हें बहाल किया जाए।
चौधरी ने कहा कि अगर सरकार ने इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि पूरे राज्य में इसी तरह के विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल अल्पसंख्यकों की नहीं बल्कि लोकतंत्र और न्याय की लड़ाई है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस विरोध प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक घेरेबंदी भी शुरू हो गई है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कई राजनीतिक दल इस आरोप को गंभीरता से ले रहे हैं कि एसआईआर का दुरुपयोग किया जा रहा है।
वहीं, सत्तारूढ़ पार्टी का कहना है कि एसआईआर एक नियमित प्रक्रिया है जो चुनाव की पवित्रता बनाए रखने के लिए जरूरी है। उनका तर्क है कि केवल उन्हीं लोगों को नोटिस भेजा जा रहा है जिनके दस्तावेजों में कुछ संदेह है। सरकार के प्रवक्ताओं ने कहा कि किसी भी असली नागरिक को डरने की जरूरत नहीं है।
मताधिकार और लोकतंत्र का सवाल
यह मुद्दा केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है बल्कि यह पूरे देश के लोकतांत्रिक ढांचे से जुड़ा हुआ है। मताधिकार संविधान द्वारा दिया गया एक मौलिक अधिकार है। अगर किसी भी नागरिक को बिना उचित कारण के इस अधिकार से वंचित किया जाता है तो यह लोकतंत्र के लिए खतरा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एसआईआर जैसी प्रक्रियाओं को पारदर्शी तरीके से चलाया जाना चाहिए। लोगों को पर्याप्त समय और अवसर दिया जाना चाहिए कि वे अपनी नागरिकता साबित कर सकें। किसी भी समुदाय को निशाना बनाना अनुचित और गैर-कानूनी है।
आगे की राह
इस विरोध प्रदर्शन के बाद अब देखना यह है कि सरकार और चुनाव आयोग क्या कदम उठाते हैं। प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपने की योजना बनाई है जिसमें अपनी सभी मांगें शामिल होंगी। उनकी मुख्य मांग है कि एसआईआर प्रक्रिया की समीक्षा की जाए और जो गलतियां हुई हैं उन्हें ठीक किया जाए।
जमियत उलमा ने यह भी संकेत दिया है कि अगर उचित समय में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। वे अन्य राज्यों में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन करने की योजना बना रहे हैं।
यह पूरा मामला राजनीतिक, सामाजिक और संवैधानिक सवाल उठाता है। इसका समाधान संवाद और कानूनी तरीकों से ही निकलना चाहिए ताकि लोकतंत्र मजबूत हो और हर नागरिक को उसका अधिकार मिले।