
अररिया में बाढ़ से बेहाल जनजीवन अररिया, बिहार – 7 अक्टूबर 2025नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण अररिया जिले में तबाही का माहौल है। परमान, बकरा, रतुआ, सुरसर और नूना जैसी नदियाँ उफान पर हैं, जिससे जिले के दर्जनों गांव जलमग्न हो गए हैं। ग्रामीण ऊँचे स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं, वहीं खेत-खलिहान और घर बाढ़ के पानी में समा गए हैं। प्रभावित क्षेत्र और सड़कें सबसे ज्यादा असर फारबिसगंज-कुर्साकांटा-सिकटी मार्ग पर देखा जा रहा है, जहां कई स्थानों पर सड़कें कट गई हैं। धनपुरा शिव मंदिर के पास और अम्हारा जाने वाली सड़क को

अररिया में बाढ़ से बेहाल जनजीवन अररिया, बिहार – 7 अक्टूबर 2025नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण अररिया जिले में तबाही का माहौल है। परमान, बकरा, रतुआ, सुरसर और नूना जैसी नदियाँ उफान पर हैं, जिससे जिले के दर्जनों गांव जलमग्न हो गए हैं। ग्रामीण ऊँचे स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं, वहीं खेत-खलिहान और घर बाढ़ के पानी में समा गए हैं। प्रभावित क्षेत्र और सड़कें सबसे ज्यादा असर फारबिसगंज-कुर्साकांटा-सिकटी मार्ग पर देखा जा रहा है, जहां कई स्थानों पर सड़कें कट गई हैं। धनपुरा शिव मंदिर के पास और अम्हारा जाने वाली सड़क को

नेपाल में भारी बारिश और सीमावर्ती क्षेत्रों पर Nepal flood impact on Bihar की चेतावनी नेपाल में भारी बारिश और बिहार में संभावित खतरा नेपाल सरकार ने देश में लगातार हो रही भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की है। गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने पत्र संख्या ०८२/८३ के तहत राष्ट्रीय स्तर पर सभी जिलों में लंबी दूरी की यात्री वाहनों की आवाजाही सोमवार, 2082 आसोज 20 तक रोकने का निर्देश दिया है। यह कदम आकाशीय बिजली, अत्यधिक वर्षा, भूस्खलन और जलप्लावन जैसी संभावित आपदाओं को देखते हुए उठाया गया है। विशेषज्ञों का कहना

नेपाल में भारी बारिश और सीमावर्ती क्षेत्रों पर Nepal flood impact on Bihar की चेतावनी नेपाल में भारी बारिश और बिहार में संभावित खतरा नेपाल सरकार ने देश में लगातार हो रही भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की है। गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने पत्र संख्या ०८२/८३ के तहत राष्ट्रीय स्तर पर सभी जिलों में लंबी दूरी की यात्री वाहनों की आवाजाही सोमवार, 2082 आसोज 20 तक रोकने का निर्देश दिया है। यह कदम आकाशीय बिजली, अत्यधिक वर्षा, भूस्खलन और जलप्लावन जैसी संभावित आपदाओं को देखते हुए उठाया गया है। विशेषज्ञों का कहना