Constitutional Crisis : पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद राजनीति और संविधान आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। क्या हार के बाद मुख्यमंत्री का इस्तीफा सिर्फ परंपरा है या कानूनी मजबूरी? अगर सरकार बदल चुकी है, तो पुरानी सत्ता कितनी देर तक रह सकती है? क्या राज्यपाल की भूमिका ही अंतिम निर्णय तय करती है, या जनादेश के बाद सब कुछ अपने आप बदल जाता है? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि लोकतंत्र में असली शक्ति किसके हाथ में है-कानून, राज्यपाल या जनता का वोट?