
महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया दौर शुरू हो गया है। राज्य भर में नगरसेवक चुनाव की तैयारियां जोर पकड़ चुकी हैं। आज से इन चुनावों के लिए नामांकन पत्र भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस मौके पर सभी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं में जोश और उत्साह देखने को मिला। कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी समेत तमाम दलों ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है। नगरसेवक चुनाव स्थानीय शासन व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। इन चुनावों में जीतने वाले प्रतिनिधि सीधे तौर पर आम जनता की समस्याओं को हल करने का काम करते हैं।

महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया दौर शुरू हो गया है। राज्य भर में नगरसेवक चुनाव की तैयारियां जोर पकड़ चुकी हैं। आज से इन चुनावों के लिए नामांकन पत्र भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस मौके पर सभी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं में जोश और उत्साह देखने को मिला। कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी समेत तमाम दलों ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है। नगरसेवक चुनाव स्थानीय शासन व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। इन चुनावों में जीतने वाले प्रतिनिधि सीधे तौर पर आम जनता की समस्याओं को हल करने का काम करते हैं।

हिंगोली नगर परिषद चुनाव में तनाव का माहौल महाराष्ट्र के हिंगोली शहर में इस बार नगर परिषद चुनाव बेहद तनाव भरे माहौल में पूरा हुआ। यह चुनाव पहले से ही काफी चर्चा में था क्योंकि शिवसेना शिंदे गुट के विधायक संतोष बांगर ने अपनी भाभी को चुनाव मैदान में उतारा था। इसके बाद से पिछले एक महीने से शहर में लगातार तनाव बना हुआ था। लोगों के बीच आपसी मतभेद बढ़ गए थे और माहौल काफी गरमाया हुआ था। मतदान से एक दिन पहले भी हुआ विवाद मतदान से ठीक एक दिन पहले भी शहर के अलग अलग इलाकों में

हिंगोली नगर परिषद चुनाव में तनाव का माहौल महाराष्ट्र के हिंगोली शहर में इस बार नगर परिषद चुनाव बेहद तनाव भरे माहौल में पूरा हुआ। यह चुनाव पहले से ही काफी चर्चा में था क्योंकि शिवसेना शिंदे गुट के विधायक संतोष बांगर ने अपनी भाभी को चुनाव मैदान में उतारा था। इसके बाद से पिछले एक महीने से शहर में लगातार तनाव बना हुआ था। लोगों के बीच आपसी मतभेद बढ़ गए थे और माहौल काफी गरमाया हुआ था। मतदान से एक दिन पहले भी हुआ विवाद मतदान से ठीक एक दिन पहले भी शहर के अलग अलग इलाकों में

Nagpur Politics: मतदाता सूची में विसंगतियों का खुलासा देशमुख ने कहा कि किसान, व्यापारी, मजदूर, कर्मचारी और आम जनता में भाजपा के खिलाफ गहरा आक्रोश है। उन्होंने यह भी दावा किया कि लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिली हार से बचने के लिए मतदाता सूची में हेराफेरी की गई। उन्होंने बताया कि इस मामले की जांच के लिए 13 टीमें बनाई गईं। इन टीमों ने तीन महीनों में मतदाता सूची की गहन जाँच की। जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। 2019 से 2024 तक मतदाता संख्या केवल 1,952 बढ़ी, जबकि लोकसभा चुनाव 2024 से विधानसभा चुनाव 2024 के बीच

Nagpur Politics: मतदाता सूची में विसंगतियों का खुलासा देशमुख ने कहा कि किसान, व्यापारी, मजदूर, कर्मचारी और आम जनता में भाजपा के खिलाफ गहरा आक्रोश है। उन्होंने यह भी दावा किया कि लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिली हार से बचने के लिए मतदाता सूची में हेराफेरी की गई। उन्होंने बताया कि इस मामले की जांच के लिए 13 टीमें बनाई गईं। इन टीमों ने तीन महीनों में मतदाता सूची की गहन जाँच की। जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। 2019 से 2024 तक मतदाता संख्या केवल 1,952 बढ़ी, जबकि लोकसभा चुनाव 2024 से विधानसभा चुनाव 2024 के बीच