
चुनावी प्रक्रिया में लापरवाही का मामला, सहायक अध्यापिका पर कार्रवाई उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद के मोदीपुरम क्षेत्र में निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान बीएलओ स्तर पर लापरवाही का मामला गहरा चुका है। सरधना तहसील के अंतर्गत नियुक्त एक सहायक अध्यापिका, जिन्हें बूथ लेवल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, के खिलाफ दौराला थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई सरधना तहसील के लेखपाल की तहरीर पर की गई है, जिसमें बीएलओ पर महत्वपूर्ण चुनावी दायित्वों से अनुपस्थित रहने और मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य में गंभीर उपेक्षा का आरोप लगाया गया है। निर्वाचन कार्य में लगातार अनुपस्थित रहने का

चुनावी प्रक्रिया में लापरवाही का मामला, सहायक अध्यापिका पर कार्रवाई उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद के मोदीपुरम क्षेत्र में निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान बीएलओ स्तर पर लापरवाही का मामला गहरा चुका है। सरधना तहसील के अंतर्गत नियुक्त एक सहायक अध्यापिका, जिन्हें बूथ लेवल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, के खिलाफ दौराला थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई सरधना तहसील के लेखपाल की तहरीर पर की गई है, जिसमें बीएलओ पर महत्वपूर्ण चुनावी दायित्वों से अनुपस्थित रहने और मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य में गंभीर उपेक्षा का आरोप लगाया गया है। निर्वाचन कार्य में लगातार अनुपस्थित रहने का

अवैध निर्माण का इतिहास मेरठ के शास्त्रीनगर क्षेत्र में स्थित सेंट्रल मार्केट का विवादित व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स लंबे समय से प्रशासन और व्यापारियों के बीच मुद्दा बना हुआ था। यह भूखंड 1986 में केवल आवासीय उपयोग के लिए आवंटित किया गया था, लेकिन वर्षों के दौरान यहां अवैध रूप से व्यावसायिक निर्माण विकसित हो गया। 1990 में आवास विकास परिषद ने इसे ध्वस्त करने के लिए नोटिस जारी किया था, लेकिन कानूनी प्रक्रिया लंबी और जटिल होने के कारण कार्रवाई स्थगित होती रही। व्यापारियों की याचिकाओं और स्थगन के अनुरोधों के कारण यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया। सुप्रीम कोर्ट

अवैध निर्माण का इतिहास मेरठ के शास्त्रीनगर क्षेत्र में स्थित सेंट्रल मार्केट का विवादित व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स लंबे समय से प्रशासन और व्यापारियों के बीच मुद्दा बना हुआ था। यह भूखंड 1986 में केवल आवासीय उपयोग के लिए आवंटित किया गया था, लेकिन वर्षों के दौरान यहां अवैध रूप से व्यावसायिक निर्माण विकसित हो गया। 1990 में आवास विकास परिषद ने इसे ध्वस्त करने के लिए नोटिस जारी किया था, लेकिन कानूनी प्रक्रिया लंबी और जटिल होने के कारण कार्रवाई स्थगित होती रही। व्यापारियों की याचिकाओं और स्थगन के अनुरोधों के कारण यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया। सुप्रीम कोर्ट