
यूपी समेत छह राज्यों में चुनाव आयोग की दया: SIR की समयसीमा में मिला नया जीवन देश भर के लाखों मतदाताओं के लिए गुरुवार को एक खुशखबरी आई है। चुनाव आयोग (Election Commission) ने उन सभी लोगों की सुनी है जो मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करवाना चाहते हैं लेकिन अब तक समय की कमी के कारण परेशान थे। आयोग ने यूपी, तमिलनाडु, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) की अवधि को बढ़ाने का फैसला किया है। यह निर्णय उन राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की सीधी मांग के बाद

यूपी समेत छह राज्यों में चुनाव आयोग की दया: SIR की समयसीमा में मिला नया जीवन देश भर के लाखों मतदाताओं के लिए गुरुवार को एक खुशखबरी आई है। चुनाव आयोग (Election Commission) ने उन सभी लोगों की सुनी है जो मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करवाना चाहते हैं लेकिन अब तक समय की कमी के कारण परेशान थे। आयोग ने यूपी, तमिलनाडु, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) की अवधि को बढ़ाने का फैसला किया है। यह निर्णय उन राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की सीधी मांग के बाद

पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक विवाद तेज पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राजनीतिक शोर-गुल लगातार बढ़ता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी पर इस महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया को बाधित करने का गंभीर आरोप लगाया है। भाजपा का दावा है कि राज्य में एसआईआर को सुचारु रूप से चलने से रोकने के लिए तृणमूल नेतृत्व और स्थानीय गुंडों द्वारा बूथ स्तर अधिकारियों को डराया-धमकाया जा रहा है। इसके साथ ही निर्वाचन आयोग के निर्देशों को खुले तौर पर चुनौती देने का

पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक विवाद तेज पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राजनीतिक शोर-गुल लगातार बढ़ता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी पर इस महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया को बाधित करने का गंभीर आरोप लगाया है। भाजपा का दावा है कि राज्य में एसआईआर को सुचारु रूप से चलने से रोकने के लिए तृणमूल नेतृत्व और स्थानीय गुंडों द्वारा बूथ स्तर अधिकारियों को डराया-धमकाया जा रहा है। इसके साथ ही निर्वाचन आयोग के निर्देशों को खुले तौर पर चुनौती देने का