
देश की सर्वोच्च अदालत में बुधवार को एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने सभी को हैरान कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने एक महिला वकील ने जमकर हंगामा किया। यह घटना उस समय हुई जब महिला वकील ने अपनी दोस्त की हत्या से जुड़े एक मामले का उल्लेख करते हुए पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, जब उन्होंने अदालत की प्रक्रिया का पालन करने से इनकार कर दिया तो सुरक्षाकर्मियों को उन्हें कोर्ट रूम से बाहर निकालना पड़ा। कैसे शुरू हुआ पूरा मामला यह घटना नई दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट

देश की सर्वोच्च अदालत में बुधवार को एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने सभी को हैरान कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने एक महिला वकील ने जमकर हंगामा किया। यह घटना उस समय हुई जब महिला वकील ने अपनी दोस्त की हत्या से जुड़े एक मामले का उल्लेख करते हुए पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, जब उन्होंने अदालत की प्रक्रिया का पालन करने से इनकार कर दिया तो सुरक्षाकर्मियों को उन्हें कोर्ट रूम से बाहर निकालना पड़ा। कैसे शुरू हुआ पूरा मामला यह घटना नई दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट

देश के सर्वोच्च न्यायालय में जल्द ही बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। नए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने साफ संकेत दिए हैं कि एक दिसंबर से सुप्रीम कोर्ट में केस मेंशनिंग की प्रक्रिया में व्यापक सुधार लागू किए जाएंगे। यह कदम न्यायिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में उठाया गया है। सीजेआई ने दिए संकेत मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने हाल ही में अदालत में केस मेंशन करने आए एक वकील से कहा कि एक दिसंबर तक इंतजार करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह कुछ नई योजना पर काम कर रहे हैं और

देश के सर्वोच्च न्यायालय में जल्द ही बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। नए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने साफ संकेत दिए हैं कि एक दिसंबर से सुप्रीम कोर्ट में केस मेंशनिंग की प्रक्रिया में व्यापक सुधार लागू किए जाएंगे। यह कदम न्यायिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में उठाया गया है। सीजेआई ने दिए संकेत मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने हाल ही में अदालत में केस मेंशन करने आए एक वकील से कहा कि एक दिसंबर तक इंतजार करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह कुछ नई योजना पर काम कर रहे हैं और

नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि अदालतें राज्यपाल या राष्ट्रपति पर विधेयकों को मंजूरी देने के लिए समय सीमा नहीं लगा सकतीं। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि तमिलनाडु विधेयक मामले में इस वर्ष की शुरुआत में लागू की गई डीम्ड एसेंट की अवधारणा संविधान की भावना के विरुद्ध है और शक्ति पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन करती है। संविधान पीठ का महत्वपूर्ण निर्णय भारत के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने तमिलनाडु विधेयक फैसले के बाद दिए गए राष्ट्रपति संदर्भ पर जवाब देते

नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि अदालतें राज्यपाल या राष्ट्रपति पर विधेयकों को मंजूरी देने के लिए समय सीमा नहीं लगा सकतीं। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि तमिलनाडु विधेयक मामले में इस वर्ष की शुरुआत में लागू की गई डीम्ड एसेंट की अवधारणा संविधान की भावना के विरुद्ध है और शक्ति पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन करती है। संविधान पीठ का महत्वपूर्ण निर्णय भारत के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने तमिलनाडु विधेयक फैसले के बाद दिए गए राष्ट्रपति संदर्भ पर जवाब देते

तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट: कानूनी चुनौती नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष को अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। यह कदम राज्य की राजनीतिक स्थिरता और विधायकों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अध्यक्ष ने बीआरएस के दस विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर समय पर निर्णय नहीं लिया, जिससे न्याय प्रक्रिया बाधित हुई। सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी और न्यायिक असंतोष सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बी.आर. गवई की अगुवाई वाली बेंच ने स्पष्ट किया

तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट: कानूनी चुनौती नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष को अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। यह कदम राज्य की राजनीतिक स्थिरता और विधायकों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अध्यक्ष ने बीआरएस के दस विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर समय पर निर्णय नहीं लिया, जिससे न्याय प्रक्रिया बाधित हुई। सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी और न्यायिक असंतोष सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बी.आर. गवई की अगुवाई वाली बेंच ने स्पष्ट किया