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पटना मेट्रो जॉब स्कैम: इंटरव्यू से ट्रेनिंग तक पूरी तरह फर्जी निकली भर्ती प्रक्रिया, करोड़ों की ठगी

पटना मेट्रो जॉब स्कैम
पटना मेट्रो जॉब स्कैम

पटना मेट्रो में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से बड़े पैमाने पर ठगी का खुलासा हुआ है। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। फर्जी परीक्षा, इंटरव्यू और ट्रेनिंग के जरिए लाखों रुपये वसूले गए।

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Patna Metro Job Fraud: पटना मेट्रो… यह नाम सुनते ही हजारों युवाओं के मन में एक सुरक्षित भविष्य, स्थायी नौकरी और सम्मानजनक जीवन की तस्वीर उभर आती है। लेकिन इसी भरोसे और उम्मीद को हथियार बनाकर कुछ शातिर जालसाजों ने बेरोजगार युवाओं की मेहनत की कमाई लूट ली। पटना मेट्रो में नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश पटना पुलिस ने किया है, जिसने यह साबित कर दिया कि ठग अब कितनी योजनाबद्ध और पेशेवर तरीके से युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे हैं।

पटना मेट्रो भर्ती के नाम पर रचा गया पूरा जाल

पटना पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह कोई अचानक किया गया अपराध नहीं था, बल्कि बीते दो वर्षों से संगठित तरीके से चलाया जा रहा एक पूरा नेटवर्क था। गिरोह ने पटना मेट्रो जैसी प्रतिष्ठित परियोजना का नाम इस्तेमाल कर खुद को विश्वसनीय साबित किया। वेबसाइट बनाई गई, सोशल मीडिया पर विज्ञापन चलाए गए और पूरी भर्ती प्रक्रिया को बिल्कुल असली सरकारी चयन की तरह पेश किया गया।

युवाओं को ऑनलाइन आवेदन भरवाया गया, कॉल और मेल के जरिए संपर्क किया गया और उन्हें इंटरव्यू के लिए पटना बुलाया गया। इन सबका मकसद सिर्फ एक था, भरोसा जीतना।

गिरफ्तार आरोपी और गिरोह का सरगना

इस मामले में पुलिस ने तीन शातिर जालसाजों को गिरफ्तार किया है। इनमें सुपौल का अखिलेश कुमार चौधरी, नवादा का दिनेश कुमार साव और मधेपुरा का नवनीत कुमार शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह का मास्टरमाइंड अखिलेश कुमार चौधरी है, जो पूरी ठगी की योजना बनाता और संचालन करता था।

एएसपी सदर अभिनव कुमार के मुताबिक, एक अभ्यर्थी की शिकायत के बाद जब पुलिस ने छापेमारी की, तो आरोपी इंटरव्यू लेते हुए रंगेहाथ पकड़े गए। यहीं से पूरे फर्जीवाड़े की परतें खुलनी शुरू हुईं।

हजारों आवेदन और सैकड़ों फर्जी चयन

जांच में सामने आया है कि 2000 से अधिक बेरोजगार युवाओं ने इस फर्जी भर्ती प्रक्रिया के तहत आवेदन किया था। इनमें से करीब 700 अभ्यर्थियों को चयनित दिखाया गया। जुलाई महीने में पटना के उर्मिला इंटरप्राइजेज नामक एक परीक्षा केंद्र पर बाकायदा लिखित परीक्षा भी कराई गई, ताकि किसी को शक न हो।

यहां तक कि इंटरव्यू के दौरान जानबूझकर कठिन सवाल पूछे जाते थे, जिससे उम्मीदवारों को लगे कि चयन प्रक्रिया वास्तव में सख्त और वास्तविक है।

ट्रेनिंग के नाम पर की गई मोटी वसूली

इस ठगी का सबसे खतरनाक हिस्सा तब सामने आया, जब चयन के बाद युवाओं से ट्रेनिंग के नाम पर पैसे मांगे गए। करीब 700 में से लगभग 80 युवाओं को यह कहकर रोक दिया गया कि उनकी नौकरी अभी पक्की नहीं है, लेकिन यदि वे डेटा ऑपरेटर, इलेक्ट्रिशियन या फिटर की ट्रेनिंग कर लें, तो नियुक्ति आसान हो जाएगी।

इसके बदले 30 हजार से लेकर 55 हजार रुपये तक की वसूली की गई। जब अभ्यर्थी बताए गए ट्रेनिंग सेंटर पहुंचे, तो वहां न कोई संस्थान मिला और न ही कोई ट्रेनिंग।

ओडिशा तक फैला तकनीकी नेटवर्क

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने अपनी फर्जी वेबसाइट और डिजिटल सिस्टम को मजबूत दिखाने के लिए ओडिशा की एक कंपनी की तकनीकी मदद ली थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर पर लगातार विज्ञापन चलाए जा रहे थे, जिससे युवाओं को यह पूरी प्रक्रिया सरकारी और भरोसेमंद लगती थी।

जक्कनपुर और रामकृष्ण नगर थाने में दर्ज शिकायतों के बाद पुलिस हरकत में आई और अंततः इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

पुलिस की आगे की कार्रवाई और बड़ा सवाल

पुलिस अब सरगना को रिमांड पर लेकर यह जानने की कोशिश कर रही है कि इस सिंडिकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। आशंका जताई जा रही है कि इस ठगी में कुछ सफेदपोश चेहरे भी जुड़े हो सकते हैं।

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Dipali Kumari

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