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PM मोदी को ‘झालमुड़ी’ खिलाना पड़ा भारी! दुकानदार को मिल रहीं जान से मारने की धमकियां

PM मोदी को ‘झालमुड़ी’ खिलाना पड़ा भारी! दुकानदार को मिल रहीं जान से मारने की धमकियां
PM मोदी को ‘झालमुड़ी’ खिलाना पड़ा भारी! दुकानदार को मिल रहीं जान से मारने की धमकियां (Pic Credit- X Screen Grab @sengarlive)

प्रधानमंत्री मोदी को एक प्लेट झालमुड़ी खिलाने के बाद एक साधारण दुकानदार की जिंदगी अचानक बदल गई। पहले सोशल मीडिया पर मिली जबरदस्त लोकप्रियता ने उसे स्टार बना दिया, लेकिन अब वही पहचान उसके परिवार के लिए डर का कारण बन चुकी है। विदेशों से आ रही धमकियों ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है।

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Dipali Kumari
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West Bengal News: पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। कुछ दिन पहले तक एक साधारण सड़क किनारे दुकान लगाने वाला व्यक्ति अचानक सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गया था। लेकिन अब वही लोकप्रियता उसके और उसके परिवार के लिए डर और चिंता की वजह बन गई है।

दरअसल, झाड़ग्राम के रहने वाले बिक्रम साव उस समय सुर्खियों में आए थे, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान उनकी दुकान पर रुककर उनके हाथ की बनी ‘झालमुड़ी’ खाई थी। यह घटना 19 अप्रैल की बताई जा रही है। पीएम मोदी झाड़ग्राम में एक चुनावी सभा को संबोधित करने पहुंचे थे। सभा खत्म होने के बाद जब उनका काफिला लौट रहा था, तभी उन्होंने सड़क किनारे स्थित बिक्रम की छोटी सी दुकान पर रुकने का फैसला किया।

चंद घंटों में सोशल मीडिया पर छा गए थे बिक्रम

प्रधानमंत्री ने बड़े ही सामान्य अंदाज में बिक्रम से बात की और उनकी बनाई झालमुड़ी खाई। वहां मौजूद लोगों ने इस पूरे पल को कैमरे में कैद कर लिया। देखते ही देखते तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इसके बाद बिक्रम की दुकान पर लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। कई लोग सिर्फ उस दुकान को देखने और वहां की झालमुड़ी खाने पहुंचने लगे।

बिक्रम साऊ को विदेशों से आ रहा धमकी भरा कॉल

लेकिन यह खुशी ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी। बिक्रम साऊ का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से उन्हें लगातार विदेशों से धमकी भरे फोन कॉल और व्हाट्सएप वीडियो कॉल्स आ रहे हैं। उनका दावा है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय नंबरों से कॉल करके उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी जा रही है।

जांच में जुटी पुलिस

बिक्रम के मुताबिक, इन धमकियों के बाद उनका पूरा परिवार डरा हुआ है। रात में घर से बाहर निकलने में भी डर लग रहा है। उन्होंने इस मामले की जानकारी पुलिस को दे दी है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और कॉल्स के स्रोत का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

इलाके के लोग भी इस घटना से हैरान हैं। जिन लोगों ने कभी सोचा भी नहीं था कि एक छोटी सी दुकान इतनी चर्चा में आ जाएगी, अब वही लोग बिक्रम और उनके परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहे हैं।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।