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महाराष्ट्र, उत्खनन रॉयल्टी माफ, अकृषि अनुमति प्रक्रिया होगी ऑनलाइन – राजस्व मंत्री बावनकुळे ने क्रेडाई की मांगें मानीं

Maharashtra excavation royalty waiver NA process online CREDAI: महाराष्ट्र में उत्खनन रॉयल्टी माफ और अकृषि अनुमति प्रक्रिया दस दिनों में ऑनलाइन होगी - राजस्व मंत्री बावनकुळे ने मंत्रालय में क्रेडाई से बैठक के बाद लिए अहम फैसले।
Maharashtra excavation royalty waiver NA process online CREDAI: महाराष्ट्र में उत्खनन रॉयल्टी माफ और अकृषि अनुमति प्रक्रिया दस दिनों में ऑनलाइन होगी - राजस्व मंत्री बावनकुळे ने मंत्रालय में क्रेडाई से बैठक के बाद लिए अहम फैसले। (Image:Ai)

Maharashtra excavation royalty waiver NA process online CREDAI: राज्य सरकार ने निर्माण क्षेत्र को राहत देते हुए उत्खनन रॉयल्टी खत्म करने और गैर कृषि अनुमति को ऑनलाइन करने का फैसला लिया है। इससे परियोजना लागत कम होगी और प्रक्रिया आसान बनेगी। डिजिटल सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ेगी और काम तेजी से होगा, जिससे बिल्डरों और निवेशकों को बड़ा फायदा मिलेगा।

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उत्खनन रॉयल्टी खत्म और गैर कृषि अनुमति ऑनलाइन, निर्माण क्षेत्र को बड़ी राहत

Maharashtra excavation royalty waiver NA process online CREDAI: मुंबई, 8 अप्रैल। महाराष्ट्र सरकार ने निर्माण क्षेत्र को बड़ी राहत देते हुए दो अहम फैसले लिए हैं। निर्माण कार्य के दौरान निकाले गए गौण खनिज का यदि उसी स्थल पर उपयोग किया जाए, तो अब उस पर कोई रॉयल्टी नहीं लगेगी। साथ ही, अकृषि अनुमति की पूरी प्रक्रिया अगले दस दिनों में ऑनलाइन कर दी जाएगी।

ये निर्णय राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने मंत्रालय, मुंबई में क्रेडाई के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में लिए। बैठक में राज्यभर के निर्माणकर्ताओं की लंबित मांगों और प्रशासनिक अड़चनों पर चर्चा की गई।

रॉयल्टी में राहत अब तक निर्माण स्थल पर उत्खनन से निकले खनिज पर भी रॉयल्टी वसूली जाती थी। नए निर्णय के अनुसार, यदि वह खनिज उसी परियोजना में उपयोग होता है, तो रॉयल्टी नहीं लगेगी – जिससे परियोजना की कुल लागत में कमी आएगी। रॉयल्टी भुगतान की प्रक्रिया को भी सरल बनाते हुए छह महीने की अवधि के लिए लागू किया गया है।

डिजिटल प्रक्रिया से निर्माण कार्य होगा तेज और आसान

अकृषि अनुमति होगी पूर्णतः डिजिटल अकृषि अनुमति के लिए अब विकासकर्ताओं को जिला कलेक्टर कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। यह प्रक्रिया समयबद्ध और पूर्णतः डिजिटल होगी। पुणे में लागू डिजिटल निगरानी प्रणाली को राज्यभर में विस्तारित करने पर विचार किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।

इसके अलावा, मंत्री बावनकुळे ने नगर महापालिका और संपत्ति पत्रक से जुड़े मुद्दों पर संबंधित अधिकारियों के साथ अलग से बैठक बुलाने का आश्वासन दिया है।

पुणे की निगरानी प्रणाली के राज्यव्यापी क्रियान्वयन पर अगले कुछ सप्ताहों में निर्णय अपेक्षित है।


रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

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Asfi Shadab

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