निजी कंपनियों को बड़ी जिम्मेदारी
India Fifth Generation Fighter Jet: भारत ने अपनी सैन्य ताकत को नई दिशा देने की तैयारी तेज कर दी है। रक्षा मंत्रालय ने स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान कार्यक्रम के लिए तीन भारतीय निजी समूहों को प्रस्ताव अनुरोध जारी कर दिया है। इसके साथ ही देश में पहली बार अत्याधुनिक लड़ाकू विमान निर्माण में निजी क्षेत्र की निर्णायक भागीदारी का रास्ता खुल गया है।
जिन कंपनियों को इस परियोजना के लिए चुना गया है उनमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, लार्सन एंड टुब्रो और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का संयुक्त समूह तथा भारत फोर्ज और बीईएमएल का समूह शामिल है। रक्षा अधिकारियों के अनुसार इन कंपनियों में से किसी एक को स्वदेशी स्टील्थ लड़ाकू विमान के प्रारंभिक नमूने विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
क्या है एएमसीए परियोजना
एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एएमसीए को भारत की अब तक की सबसे महत्वाकांक्षी विमान परियोजना माना जा रहा है। यह दो इंजन वाला पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान होगा, जिसे आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है। इसमें दुश्मन के रडार से बच निकलने की क्षमता, भीतर हथियार रखने की व्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित युद्ध प्रणाली, उन्नत सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता और नेटवर्क आधारित संचालन जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल होंगी। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी इस परियोजना की मूल डिजाइन और तकनीकी निगरानी कर रहे हैं।
चीन और पाकिस्तान से बढ़ती चुनौती
रक्षा मंत्रालय ने इस परियोजना को ऐसे समय आगे बढ़ाया है जब भारतीय वायुसेना को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप आधुनिक लड़ाकू विमानों की जरूरत तेजी से महसूस हो रही है। चीन पहले से अपने जे-20 जैसे पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान का उपयोग कर रहा है और उसने जे-35 विमान को भी दुनिया के सामने पेश किया है। चीन के छठी पीढ़ी के विमान कार्यक्रम को लेकर भी लगातार खबरें सामने आ रही हैं। दूसरी ओर पाकिस्तान को भी भविष्य में आधुनिक स्टील्थ तकनीक मिलने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में भारत के लिए स्वदेशी स्तर पर अत्याधुनिक लड़ाकू विमान तैयार करना केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं बल्कि सामरिक आवश्यकता बन गया है।
पंद्रह हजार करोड़ रुपये की बड़ी योजना
सूत्रों के अनुसार एएमसीए परियोजना के तहत पांच पूर्ण आकार के नमूने तैयार किए जाएंगे, जिनकी कुल अनुमानित लागत लगभग पंद्रह हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है। सरकार की योजना है कि इन विमानों का निर्माण आंध्र प्रदेश में बनने वाली नई विमान निर्माण इकाई में किया जाए। हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने श्री सत्य साईं जिले में विशाल विमानन और रक्षा आधारभूत ढांचा परियोजना की आधारशिला रखी थी। इसे भारत के रक्षा उद्योग के लिए ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह परिसर आने वाले वर्षों में देश का सबसे बड़ा लड़ाकू विमान निर्माण केंद्र बन सकता है।
एचएएल को शुरुआती दौड़ से बाहर रखा गया
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पहली बार सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड को प्रारंभिक प्रतिस्पर्धा से बाहर रखा गया है। वर्षों तक भारत में लड़ाकू विमान निर्माण का लगभग पूरा दायित्व इसी सरकारी कंपनी के पास रहा है, लेकिन अब सरकार निजी क्षेत्र को भी बड़ी भूमिका देना चाहती है। जानकारों का मानना है कि निजी कंपनियों के आने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, उत्पादन क्षमता मजबूत होगी और तकनीकी नवाचार को गति मिलेगी। हालांकि यह भी माना जा रहा है कि भविष्य में बड़े पैमाने पर उत्पादन के चरण में हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड फिर से शामिल हो सकती है।
दुनिया के चुनिंदा देशों की कतार में भारत
दुनिया में अभी बहुत कम देशों के पास पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान मौजूद हैं। अमेरिका इस क्षेत्र में सबसे आगे माना जाता है। उसके पास एफ-22 रैप्टर और एफ-35 लाइटनिंग जैसे अत्याधुनिक विमान हैं। चीन ने जे-20 और जे-35 विकसित किए हैं जबकि रूस के पास एसयू-57 विमान है। इसके अलावा तुर्किये, जापान, दक्षिण कोरिया और स्वीडन जैसे देश भी अपने स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने में जुटे हुए हैं। भारत अब इसी श्रेणी में शामिल होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बड़ा सहारा
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एएमसीए परियोजना केवल एक लड़ाकू विमान कार्यक्रम नहीं बल्कि भारत के सैन्य औद्योगिक ढांचे में बड़े बदलाव का संकेत है। इससे देश में रक्षा उत्पादन का नया पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होगा, जिसमें बड़ी कंपनियों के साथ छोटे उद्योग, स्टार्टअप और उच्च तकनीक क्षेत्र की कंपनियां भी जुड़ेंगी। इससे रोजगार बढ़ने के साथ रक्षा निर्यात की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। सरकार की योजना है कि आने वाले वर्षों में भारत केवल हथियार खरीदने वाला देश न रहे बल्कि आधुनिक रक्षा तकनीक बनाने और निर्यात करने वाला प्रमुख राष्ट्र बने।
2035 तक वायुसेना में शामिल होने की उम्मीद
India Fifth Generation Fighter Jet: सूत्रों के अनुसार यदि परियोजना तय समय पर आगे बढ़ती है तो एएमसीए का पहला उड़ान परीक्षण वर्ष 2028 या 2029 तक हो सकता है, जबकि भारतीय वायुसेना में इसकी औपचारिक तैनाती 2035 के आसपास शुरू होने की संभावना है। भारतीय वायुसेना भविष्य में ऐसे छह स्क्वाड्रन शामिल करना चाहती है। माना जा रहा है कि यह विमान आगे चलकर पुराने पड़ चुके मिग, जगुआर और कुछ अन्य लड़ाकू विमानों की जगह ले सकता है। ऐसे में एएमसीए आने वाले दशकों में भारत की हवाई शक्ति की रीढ़ साबित हो सकता है।