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16वीं बार जेल से बाहर आए गुरमीत राम रहीम, 10 साल की सजा में 406 दिन जेल से बाहर, देखिए पूरा रिकॉर्ड

16वीं बार जेल से बाहर आए गुरमीत राम रहीम,  10 साल की सजा में 406 दिन जेल से बाहर, देखिए पूरा रिकॉर्ड
16वीं बार जेल से बाहर आए गुरमीत राम रहीम, 10 साल की सजा में 406 दिन जेल से बाहर, देखिए पूरा रिकॉर्ड (File Photo)

एक बार फिर गुरमीत राम रहीम जेल से बाहर आ गए हैं और इसके साथ ही पुरानी बहसें भी तेज हो गई हैं। 20 साल की सजा काट रहे डेरा प्रमुख को आखिर इतनी बार पैरोल कैसे मिल जाती है? 10 साल की सजा में 400 से ज्यादा दिन बाहर बिताने का आंकड़ा अब सवाल खड़े कर रहा है।

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Dipali Kumari
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Ram Rahim  Parole: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह एक बार फिर पैरोल पर जेल से बाहर आ गए हैं। साध्वी यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा काट रहे राम रहीम को हरियाणा सरकार की सक्षम अथॉरिटी की मंजूरी के बाद 30 दिनों की पैरोल दी गई है। कल सोमवार सुबह करीब 6:34 बजे वह रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर निकले। उनकी रिहाई के बाद एक बार फिर राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

राम रहीम 2017 से जेल में बंद हैं, लेकिन इस दौरान उन्हें कई बार पैरोल और फरलो मिल चुकी है। यह उनकी 16वीं अस्थायी रिहाई है। पैरोल के दौरान वह सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा आश्रम में रहेंगे। उनके वकील जितेंद्र खुराना ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए पैरोल मंजूर की गई है।

जनवरी में मिली थी 40 दिनों की पैरोल

गौरतलब है कि अगस्त 2017 में सीबीआई अदालत ने दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में राम रहीम को दोषी ठहराते हुए 20 साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद उन्हें रोहतक की सुनारिया जेल भेजा गया था। हालांकि जेल में रहते हुए भी उन्हें लगातार राहत मिलती रही है। इसी साल जनवरी 2026 में भी उन्हें 40 दिनों की पैरोल मिली थी।

पत्रकार की हत्या मामले में बड़ी राहत

राम रहीम को हाल के वर्षों में कई मामलों में राहत भी मिली है। मार्च 2026 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में उन्हें बरी कर दिया था। इससे पहले रणजीत सिंह हत्या केस में भी हाई कोर्ट ने उन्हें राहत दी थी। इन फैसलों के बाद उनके समर्थकों में खुशी का माहौल देखा गया, जबकि विपक्षी दल लगातार उनकी बार-बार होने वाली रिहाई पर सवाल उठाते रहे हैं।

 406 दिन जेल से बाहर

सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि 10 साल की जेल अवधि में राम रहीम अब तक 406 दिन जेल से बाहर बिता चुके हैं। मौजूदा 30 दिन की पैरोल के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 436 दिन हो जाएगा। विपक्ष का आरोप है कि चुनावी समय के आसपास मिलने वाली पैरोल राजनीतिक लाभ से जुड़ी हो सकती है, हालांकि प्रशासन हर बार इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताता रहा है।

गुरमीत राम रहीम की पैरोल और रिहाई का रिकॉर्ड

क्रम संख्यासाल/माहरिहाई की अवधि
पहली रिहाईअक्टूबर 20201 दिन
दूसरी रिहाईमई 202112 घंटे
तीसरी रिहाईफरवरी 202221 दिन
चौथी रिहाईजून 202230 दिन
पांचवीं रिहाईअक्टूबर 202240 दिन
छठी रिहाईजनवरी 202340 दिन
सातवीं रिहाईजुलाई 202330 दिन
आठवीं रिहाईनवंबर 202321 दिन
नौवीं रिहाईजनवरी 202450 दिन
दसवीं रिहाईअगस्त 202421 दिन
11वीं rिहाईअक्टूबर 202420 दिन
12वीं रिहाईजनवरी 202530 दिन
13वीं रिहाईअप्रैल 202521 दिन
14वीं रिहाईअगस्त 202540 दिन
15वीं रिहाईजनवरी 202640 दिन
16वीं रिहाईमई 202630 दिन (मौजूदा पैरोल)
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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।