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कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन तेज! 20 जुलाई को संसद घेरने की तैयारी, 12 दिनों से भूख हड़ताल पर सोनम वांगचुक

कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन तेज! 20 जुलाई को संसद घेरने की तैयारी, 12 दिनों से भूख हड़ताल पर सोनम वांगचुक
NEET विवाद पर आंदोलन तेज! 20 जुलाई को संसद घेरने की तैयारी, 12 दिनों से भूख हड़ताल पर सोनम वांगचुक (Pic Credit- X @CJP_for_India)

दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आंदोलन तेज हो गया है। प्रदर्शनकारी 20 जुलाई को संसद तक मार्च निकालेंगे। वहीं, पिछले 12 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का वजन 7 किलो से ज्यादा घट गया है, जिससे उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है।

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Dipali Kumari
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CJP Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं का आंदोलन अब संसद तक पहुंचने वाला है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने घोषणा की है कि 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन जंतर-मंतर से संसद तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा।

संगठन का कहना है कि इस मार्च का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग करना और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को और मजबूत करना है। CJP ने देशभर के छात्रों, अभिभावकों और आम लोगों से इस मार्च में शामिल होने की अपील की है।

12 दिनों से भूख हड़ताल पर सोनम वांगचुक

इस आंदोलन में सामाजिक कार्यकर्ता और जलवायु एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी शामिल हैं। वह पिछले 12 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, इस दौरान उनका 7 किलो से अधिक वजन कम हो चुका है। उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।

सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर लोगों से 20 जुलाई को जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सिर्फ सोशल मीडिया पर समर्थन देने से बदलाव नहीं आएगा। अगर लोग वास्तव में बदलाव चाहते हैं, तो उन्हें संसद तक होने वाले शांतिपूर्ण मार्च का हिस्सा बनना चाहिए, ताकि सांसद इस मुद्दे को संसद में उठा सकें।

आखिर क्या है छात्रों की मांग

CJP का आरोप है कि NEET-UG समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं की वजह से कई छात्रों ने आत्महत्या की। संगठन इन छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने, परीक्षा प्रणाली में सुधार करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है।

अब सभी की नजर 20 जुलाई पर है, जब संसद के मानसून सत्र के पहले दिन हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकालकर अपनी मांगों को सरकार के सामने रखने की कोशिश करेंगे।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।