एनएमसी ने जारी किया ड्राफ्ट प्रस्ताव
MBBS Course Duration Extension: देशभर के मेडिकल छात्रों और उनके परिवारों के लिए राहत भरी एक बेहद महत्वपूर्ण खबर है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने एमबीबीएस कोर्स पूरा करने की अधिकतम समय-सीमा को बढ़ाने का एक बड़ा और संवेदनशील फैसला लिया है। अगर यह नया प्रस्ताव अंतिम रूप से मंजूर हो जाता है, तो मेडिकल छात्रों को अपनी स्नातक की पढ़ाई और इंटर्नशिप पूरी करने के लिए अब 9 साल के बजाय पूरे 10 साल का समय मिल सकेगा।
यह बदलाव एनएमसी द्वारा तैयार किए गए “स्नातक चिकित्सा शिक्षा (संशोधन) विनियम, 2026” के मसौदे में शामिल किया गया है। आयोग ने इस मसौदे को भारत सरकार के आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित कर दिया है। इसके साथ ही इस पर छात्रों, डॉक्टरों, मेडिकल कॉलेजों और आम जनता से अगले 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं।
क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?
वर्तमान नियमों के अनुसार, किसी भी छात्र को एमबीबीएस कोर्स में दाखिला लेने की तारीख से लेकर अधिकतम 9 वर्षों के भीतर अपनी पढ़ाई और अनिवार्य रोटेटरी मेडिकल इंटर्नशिप पूरी करनी होती है। लेकिन नए मसौदे में इस समय-सीमा को 10 वर्ष करने की वकालत की गई है।
चिकित्सा विशेषज्ञों और मनोचिकित्सकों का मानना है कि मेडिकल की पढ़ाई का पाठ्यक्रम बेहद कठिन और मानसिक रूप से थका देने वाला होता है। कई बार होनहार छात्र भी गंभीर बीमारी, मानसिक तनाव, पारिवारिक संकट, आर्थिक तंगी या किसी अप्रत्याशित हादसे के कारण अपनी पढ़ाई समय पर पूरी नहीं कर पाते। कोविड महामारी के बाद से छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं और बढ़ी हैं। ऐसे मामलों में यह अतिरिक्त एक साल का लचीलापन उन छात्रों का करियर टूटने से बचा सकता है जो वास्तविक परिस्थितियों के कारण पिछड़ जाते हैं।
योग्यता से कोई समझौता नहीं- पहले साल का नियम रहेगा सख्त
समय-सीमा में एक साल की ढील देने के बावजूद, एनएमसी ने पढ़ाई के स्तर और अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया है। आयोग ने एक बेहद महत्वपूर्ण शैक्षणिक नियम को जस का तस रखा है:
प्रथम प्रोफेशनल परीक्षा : एमबीबीएस के पहले साल की परीक्षा को पास करने के लिए छात्रों को पहले की तरह ही अधिकतम चार अवसर ही मिलेंगे।
यानी, यदि कोई छात्र चार प्रयासों में भी पहले साल की परीक्षा पास नहीं कर पाता, तो उसे कोर्स से बाहर कर दिया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि केवल योग्य और गंभीर छात्र ही इस संवेदनशील पेशे में आगे बढ़ें।
अभी सुझावों का इंतजार, फिर होगा अंतिम फैसला
यह ध्यान रखना जरूरी है कि फिलहाल यह केवल एक ड्राफ्ट प्रस्ताव है। एनएमसी ने इसे सार्वजनिक विमर्श के लिए जारी किया है। अधिसूचना जारी होने के एक महीने के भीतर जो भी व्यावहारिक सुझाव या आपत्तियां मिलेंगी, आयोग उन पर गहराई से विचार करेगा। इसके बाद ही अंतिम नियमों को अधिसूचित किया जाएगा।
लगातार छात्र-हित में फैसले ले रहा है आयोग
MBBS Course Duration Extension: पिछले कुछ समय से एनएमसी मेडिकल शिक्षा व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक और छात्र-अनुकूल बनाने के लिए लगातार कदम उठा रहा है। हाल ही में आयोग ने मेडिकल कॉलेजों को यह निर्देश भी दिया था कि वे छात्रों से केवल 4.5 साल की शैक्षणिक अवधि की ही फीस वसूलें और इंटर्नशिप के नाम पर अलग से कोई शुल्क न लें।
एनएमसी का यह नया कदम दिखाता है कि नियामक संस्थाएं अब छात्रों की व्यावहारिक और मानसिक चुनौतियों को समझने लगी हैं। 10 साल की समय-सीमा जहां एक तरफ संकट में फंसे छात्रों को ‘दूसरा मौका’ देगी, वहीं पहले साल में चार प्रयासों की पाबंदी मेडिकल पेशे की गरिमा और शैक्षणिक स्तर को कमजोर नहीं होने देगी।
नेशनल मेडिकल आयोग के फैसले के प्रमुख बिंदु
- एमबीबीएस कोर्स की वर्तमान अधिकतम अवधि: 9 वर्ष
- प्रस्तावित नई अधिकतम अवधि: 10 वर्ष
- अतिरिक्त समय में वृद्धि: 1 वर्ष
- सुझाव और आपत्तियां भेजने की अवधि: 30 दिन
- प्रथम प्रोफेशनल एमबीबीएस परीक्षा के अधिकतम प्रयास: 4 प्रयास (कोई बदलाव नहीं)
- कोर्स पूरा करने की कुल अंतिम सीमा (इंटर्नशिप सहित): 10 वर्ष के भीतर अनिवार्य
- जारी दस्तावेज का नाम: स्नातक चिकित्सा शिक्षा (संशोधन) विनियम, 2026 (मसौदा)
- केवल समय सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव है (9 से 10 वर्ष)
- परीक्षा नियम पहले की तरह ही लागू रहेंगे
- यह अभी केवल मसौदा है, अंतिम नियम नहीं