आज ‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस-2026’ : विशेषज्ञों ने दी गंभीर चेतावनी
World No Tobacco Day 2026: हर वर्ष 31 मई को पूरी दुनिया मानव इतिहास के सबसे रोके जा सकने वाले स्वास्थ्य संकटों में से एक पर ध्यान केंद्रित करती है। तंबाकू सेवन आज भी विश्वभर में लाखों लोगों की जान ले रहा है। आंकड़ों के अनुसार, तंबाकू के कारण हर साल दुनिया में लगभग 80 लाख लोगों की मृत्यु होती है। वहीं भारत में यह संख्या करीब 13.5 लाख प्रतिवर्ष है, यानी प्रतिदिन 3,700 से अधिक और हर घंटे लगभग 154 लोगों की मौत तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण होती है।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2026 के अवसर पर वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रविंदर सिंह राव ने लोगों से तंबाकू के दुष्प्रभावों को समझने और इससे दूरी बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि तंबाकू गंभीर हृदय और फेफड़ों की बीमारियों का सबसे बड़ा रोके जा सकने वाला कारण है। धूम्रपान और तंबाकू सेवन न केवल फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि हृदयाघात, स्ट्रोक और शरीर के अन्य अंगों को भी स्थायी क्षति पहुंचाते हैं।
उन्होंने युवाओं और वयस्कों से तंबाकू मुक्त जीवनशैली अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि समय रहते तंबाकू छोड़ने से स्वास्थ्य और जीवन प्रत्याशा में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है। डॉ. राव ने जागरूकता अभियान, स्वास्थ्य शिक्षा और नियमित स्वास्थ्य जांच को तंबाकू की लत रोकने के लिए बेहद जरूरी बताया।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2026 की थीम
इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन ने विश्व तंबाकू निषेध दिवस की थीम “अनमास्किंग द अपील: काउंटरिंग निकोटीन एंड टोबैको एडिक्शन” यानी “आकर्षण के मुखौटे को हटाना: निकोटीन और तंबाकू की लत का मुकाबला” निर्धारित की है।
यह थीम उस वास्तविकता को उजागर करती है कि दशकों से तंबाकू नियंत्रण के प्रयासों के बावजूद तंबाकू और निकोटीन उद्योग ने नए रूप में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है। पारंपरिक सिगरेटों के बजाय अब ई-सिगरेट और फ्लेवरयुक्त निकोटीन उत्पादों को आधुनिक, सुरक्षित और आकर्षक बताकर विशेष रूप से युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है। बाजार में उपलब्ध सैकड़ों कैंडी और फलों के स्वाद वाले उत्पाद युवाओं को लत की ओर आकर्षित कर रहे हैं।
तंबाकू कैसे बनता है कैंसर और अन्य बीमारियों का कारण
विशेषज्ञों के अनुसार तंबाकू के दुष्प्रभाव शरीर में कई जैविक प्रक्रियाओं के माध्यम से विकसित होते हैं। तंबाकू के धुएं में 4,000 से अधिक रासायनिक तत्व पाए जाते हैं, जिनमें कम से कम 70 ऐसे रसायन हैं जो कैंसर उत्पन्न करने वाले (कार्सिनोजेन) माने जाते हैं। ये हानिकारक तत्व शरीर में प्रवेश कर कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचाते हैं, कोशिकाओं की मरम्मत प्रक्रिया को बाधित करते हैं और लगातार सूजन पैदा करते हैं। यही स्थितियां आगे चलकर कैंसर के विकास का कारण बनती हैं। अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी के अनुसार तंबाकू सेवन फेफड़ों, मुंह, नासोफैरिंक्स, स्वरयंत्र, अन्ननली, पेट, अग्न्याशय, यकृत, गुर्दे, मूत्राशय, गर्भाशय ग्रीवा तथा अस्थि मज्जा के कैंसर से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
कैंसर के अलावा भी कई गंभीर बीमारियों का कारण
– तंबाकू का प्रभाव केवल कैंसर तक सीमित नहीं है। इसके कारण अनेक गंभीर गैर-कैंसरकारी बीमारियां भी होती हैं।
– क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी)
– तंबाकू सीओपीडी का प्रमुख कारण है। यह फेफड़ों की वायु थैलियों और श्वसन मार्गों को धीरे-धीरे और स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त कर देता है। भारत में सीओपीडी के मामलों की संख्या विश्व में सबसे अधिक है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में बीड़ी सेवन एक प्रमुख कारण माना जाता है।
हृदय रोग और हृदयाघात
तंबाकू धमनियों में वसा जमने की प्रक्रिया को तेज करता है, रक्तचाप और हृदय गति बढ़ाता है तथा रक्त के थक्के बनने की संभावना को बढ़ाता है। धूम्रपान करने वालों में हृदयाघात का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में लगभग दोगुना होता है।
स्ट्रोक
तंबाकू मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और इस्केमिक तथा हेमरेजिक दोनों प्रकार के स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा देता है। धूम्रपान छोड़ना स्ट्रोक की रोकथाम का सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।
परिधीय धमनी रोग
तंबाकू के कारण हाथ-पैरों में रक्त प्रवाह कम हो जाता है, जिससे दर्द, चलने-फिरने में कठिनाई और गंभीर मामलों में अंग काटने तक की नौबत आ सकती है।
प्रजनन स्वास्थ्य पर प्रभाव
महिलाओं में तंबाकू सेवन बांझपन, गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं, समय से पहले प्रसव और कम वजन वाले शिशुओं के जन्म का कारण बन सकता है। पुरुषों में यह शुक्राणुओं की गुणवत्ता को प्रभावित करता है और स्तंभन दोष का जोखिम बढ़ाता है।
मधुमेह
धूम्रपान करने वालों में टाइप-2 मधुमेह होने का खतरा अधिक होता है। पहले से मधुमेह से पीड़ित लोगों में भी रक्त शर्करा नियंत्रित करना कठिन हो जाता है। तंबाकू, मधुमेह और हृदय रोग का संयुक्त प्रभाव स्वास्थ्य के लिए और अधिक घातक साबित होता है।
तपेदिक (टीबी)
तंबाकू का धुआं फेफड़ों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है। इसके कारण टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है और उपचार का प्रभाव भी कम हो सकता है।
तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के चेतावनी संकेत
विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू से जुड़ी कई बीमारियां वर्षों बाद सामने आती हैं, इसलिए शुरुआती लक्षणों की पहचान बेहद महत्वपूर्ण है।
निम्नलिखित लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए:
– लगातार खांसी या सांस फूलना
– तीन सप्ताह से अधिक समय तक आवाज बैठना या भारी रहना
निगलने या बोलने में कठिनाई
– मुंह में सफेद या लाल चकत्ते, न भरने वाले घाव या मुंह कम खुलना
– सीने में दर्द या जकड़न
– लगातार थकान और शारीरिक क्षमता में कमी
– दांतों का खराब होना, मसूड़ों से खून आना या मसूड़ों का सिकुड़ना
– बार-बार श्वसन संक्रमण होना
तंबाकू छोड़ने के लिए सहायता और रणनीति जरूरी
World No Tobacco Day 2026: विशेषज्ञों का मानना है कि केवल तंबाकू छोड़ने का निर्णय लेना पर्याप्त नहीं होता। निकोटीन की लत शारीरिक निर्भरता के साथ-साथ व्यवहारिक और मानसिक आदतों से भी जुड़ी होती है। यही कारण है कि बिना सहायता के अधिकांश लोग कुछ ही दिनों में फिर से तंबाकू का सेवन शुरू कर देते हैं।
व्यवहारिक परामर्श, मनोवैज्ञानिक सहायता, परिवार का सहयोग और चिकित्सकीय उपचार जैसी संरचित सहायता पद्धतियां तंबाकू छोड़ने की सफलता दर को काफी बढ़ा सकती हैं।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस का संदेश स्पष्ट है-तंबाकू से दूरी ही स्वस्थ जीवन की सबसे बड़ी गारंटी है। जागरूकता, समय पर जांच और मजबूत इच्छाशक्ति के जरिए इस घातक लत पर विजय पाई जा सकती है।