Stock Market: दुनियाभर में बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ईरान और अमेरिका के बीच फिर से बढ़ते तनाव और पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसका असर आज मंगलवार को भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट के रूप में देखने को मिला।
करीब 11 लाख करोड़ रुपये डूबे
सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन शेयर बाजार में भारी बिकवाली हुई। BSE Sensex करीब 1500 अंक टूटकर 74,559 पर बंद हुआ, जबकि NIFTY 50 436 अंक गिरकर 23,380 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में आई इस तेज गिरावट से निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। सिर्फ एक दिन में निवेशकों के करीब 11 लाख करोड़ रुपये डूब गए।
आईटी सेक्टर में भारी नुकसान
सबसे ज्यादा दबाव आईटी सेक्टर पर देखने को मिला। आईटी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई और पूरा सेक्टर 3.5 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टेक महिंद्रा और एचसीएलटेक जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर लाल निशान में बंद हुए। इसके अलावा रियल एस्टेट और ज्वेलरी सेक्टर में भी बिकवाली जारी रही।
क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट ?
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह ईरान-अमेरिका तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत बढ़कर 106 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। भारत जैसे देश के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है और इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयान से बढ़ी चिंता
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयान ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ युद्धविराम की स्थिति बेहद नाजुक है। इससे निवेशकों में डर का माहौल बन गया।
पीएम मोदी का बयान भी बना वजह
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का असर भी बाजार पर देखने को मिला। पश्चिम एशिया संकट के बीच ईंधन बचाने को लेकर पीएम मोदी ने लोगों से एक साल तक सोने की खरीद कम करने और जहां संभव हो वहां घर से काम करने की अपील की थी। इसके बाद ज्वेलरी और रियल एस्टेट शेयरों में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई।
भारतीय रुपये भी गिरा
सिर्फ शेयर बाजार ही नहीं, भारतीय रुपये पर भी दबाव बढ़ा। डॉलर के मुकाबले रुपया 95.63 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया का तनाव आगे और बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।