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बजट 2026 में मध्यम वर्ग और आम आदमी को वित्त मंत्री सीतारमण से क्या चाहिए – जानिए पूरी विशलिस्ट

Budget 2026 Income Tax: मध्यम वर्ग और आम आदमी की वित्त मंत्री से उम्मीदें
Budget 2026 Income Tax: मध्यम वर्ग और आम आदमी की वित्त मंत्री से उम्मीदें (File Photo)
केंद्रीय बजट 2026 से पहले टैक्सपेयर्स की प्रमुख मांगें - एक समान आईटीआर फॉर्म, टीडीएस व्यवस्था में सुधार, नए टैक्स कानून के लिए मास्टर सर्कुलर, इलेक्ट्रिक वाहनों पर विशेष टैक्स छूट और प्रदूषण नियंत्रण में सीएसआर खर्च को कर कटौती योग्य बनाना। मध्यम वर्ग को वित्त मंत्री सीतारमण से टैक्स राहत की उम्मीद।
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केंद्रीय बजट 2026 अब बहुत करीब आ गया है और यह साल का वह समय है जब भारत के करोड़ों टैक्सपेयर्स अपनी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ बड़ी उम्मीद भरी नजरों से देखते हैं। हर साल की तरह इस बार भी मध्यम वर्ग, नौकरीपेशा लोग और आम टैक्सदाताओं की विशलिस्ट काफी लंबी है। लेकिन इस बार कुछ खास मांगें हैं जो टैक्स व्यवस्था को सरल और जनहितैषी बनाने के लिए बेहद जरूरी हैं। आइए जानते हैं कि इस बार टैक्सपेयर्स वित्त मंत्री से क्या चाहते हैं।

एक देश – एक इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म की मांग

मौजूदा व्यवस्था में क्या है परेशानी

अभी भारत में सात अलग-अलग आईटीआर फॉर्म हैं जो अलग-अलग तरह के टैक्सपेयर्स के लिए लागू होते हैं। इतने सारे फॉर्म होने से आम करदाता अक्सर उलझन में पड़ जाते हैं। उन्हें यह समझने में मुश्किल होती है कि उनके लिए कौन सा फॉर्म सही है। हर साल आमदनी के स्रोत बदलने पर फॉर्म भी बदल जाता है, जिससे गलतियों की संभावना बढ़ जाती है। यह व्यवस्था जटिल है और इसे सरल बनाने की जरूरत है।

एक फॉर्म से क्या होगा फायदा

टैक्सपेयर्स चाहते हैं कि सरकार एक समान आईटीआर फॉर्म लाए। इससे टैक्स भरना बहुत आसान हो जाएगा। पहले भी सरकार ने इस विकल्प पर विचार किया था, लेकिन अब जब नया इनकम टैक्स एक्ट लागू होने जा रहा है, यह सही समय है इसे फिर से सोचने का। एक ही फॉर्म में टैक्सपेयर अपनी श्रेणी और आमदनी के स्रोत चुन सकते हैं। फिर उनके लिए सिर्फ जरूरी हिस्से ही दिखाई देंगे। इससे रिटर्न भरने का अनुभव बेहतर होगा और समय की भी बचत होगी।

 

टीडीएस व्यवस्था में बड़े सुधार की जरूरत

वर्तमान टीडीएस प्रणाली में बहुत सारी जटिलताएं हैं। टीडीएस का पालन करने में टैक्सपेयर्स और कंपनियों का काफी समय लगता है। टैक्सपेयर्स चाहते हैं कि इस फ्रेमवर्क में बड़े बदलाव किए जाएं। जिन सेक्शन से कम राजस्व मिलता है, उन्हें हटाया जाए या मिलाया जाए। अभी टीडीएस की कई दरें हैं, इन्हें घटाकर सिर्फ दो-तीन किया जाना चाहिए।

टीडीएस सर्टिफिकेट की जरूरत खत्म हो

एक और अहम मांग यह है कि टीडीएस सर्टिफिकेट जारी करने की जरूरत ही खत्म कर दी जाए। यह जानकारी तो फॉर्म 26एएस और एआईएस में पहले से उपलब्ध है। टीडीएस लेजर तंत्र लाया जाए ताकि आय और टीडीएस को मिलाने में होने वाले विवाद खत्म हों। इन सभी उपायों से टैक्सपेयर्स पर अनुपालन का बोझ कम होगा और कानूनी झगड़े भी घटेंगे।

नए टैक्स कानून के लिए मास्टर सर्कुलर जारी हो

1 अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्स एक्ट लागू होने वाला है। पिछले छह दशकों में पुराने कानून के तहत हजारों सर्कुलर और नोटिफिकेशन जारी हुए हैं। टैक्सपेयर्स चाहते हैं कि सरकार एक मास्टर सर्कुलर जारी करे जिसमें सभी लागू सर्कुलर की सूची हो। इसमें नए एक्ट की धाराओं का संदर्भ दिया जाए। जो सेक्शन हटा दिए गए हैं, उनसे जुड़े सर्कुलर को निकाल दिया जाए।

इस मास्टर सर्कुलर को हर साल अपडेट किया जाना चाहिए। इससे टैक्सपेयर्स को सही सर्कुलर ढूंढने में आसानी होगी। यह सरकार के इरादे के भी अनुकूल होगा कि टैक्स कानून को सरल और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाया जाए।

प्रदूषण से लड़ने के लिए टैक्स को हथियार बनाएं

भारत के कई शहर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में नियमित रूप से आते हैं। हाल में कई देशों ने भारत के लिए यात्रा सलाह भी जारी की है, जिसमें प्रदूषण की चिंता जताई गई है। इस बड़ी समस्या से निपटने के लिए कई स्तरों पर प्रयास करने होंगे।

इलेक्ट्रिक वाहनों पर विशेष टैक्स छूट दी जाए

टैक्सपेयर्स चाहते हैं कि सरकार डायरेक्ट टैक्स कानून का इस्तेमाल करते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर विशेष टैक्स छूट दे। यह छूट नई व्यक्तिगत कर व्यवस्था में शामिल की जाए। हालांकि सरकार की नीति कम छूट के साथ कम टैक्स की रही है, लेकिन वायु प्रदूषण से उत्पन्न स्वास्थ्य आपातकाल को देखते हुए इस मामले में अपवाद बनाया जा सकता है।

सीएसआर खर्च को प्रदूषण नियंत्रण में लगाएं

कंपनियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए कि वे अपने सीएसआर खर्च का कुछ हिस्सा प्रदूषण नियंत्रण में शोध के लिए लगाएं। साथ ही जिन शहरों में वे काम करती हैं, वहां सरकार द्वारा स्वीकृत प्रदूषण नियंत्रण योजनाओं में योगदान दें। इस खर्च को टैक्स में कटौती योग्य माना जाए। हालांकि अकेले ये उपाय समस्या का पूरा समाधान नहीं हैं, लेकिन सरकारी प्रयासों में ये मददगार साबित हो सकते हैं।

मध्यम वर्ग को राहत की उम्मीद

मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोग हमेशा से टैक्स स्लैब में बदलाव की मांग करते रहे हैं। उनकी उम्मीद है कि इस बार बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाई जाए। साथ ही टैक्स स्लैब में भी संशोधन हो ताकि उनकी जेब में ज्यादा पैसे बचें। महंगाई के दौर में यह राहत बेहद जरूरी है।

सरलीकरण की दिशा में कदम

टैक्सपेयर्स को उम्मीद है कि सरकार टैक्स व्यवस्था को सरल बनाने की अपनी प्रतिबद्धता पर खरी उतरेगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म को और बेहतर बनाया जाए। ऑनलाइन सेवाओं में सुधार हो और ई-फाइलिंग की प्रक्रिया आसान हो। टैक्स विवादों को निपटाने के लिए सरल तंत्र बनाया जाए।

टैक्स दरों में कमी की मांग

व्यापारी वर्ग और छोटे उद्यमियों को भी राहत की जरूरत है। उनकी मांग है कि कॉर्पोरेट टैक्स दरों में और कटौती हो। स्टार्टअप्स के लिए विशेष प्रावधान बनाए जाएं। इससे रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

पारदर्शिता बढ़ाने की जरूरत

टैक्स प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जानी चाहिए। नोटिस और आदेशों की भाषा सरल हो ताकि आम आदमी समझ सके। टैक्स अधिकारियों के साथ संवाद की व्यवस्था बेहतर हो। फेसलेस असेसमेंट की प्रक्रिया में और सुधार किए जाएं।

टैक्सपेयर्स की ये उम्मीदें सरकार की मंशा के अनुरूप हैं जो भारत में टैक्स व्यवस्था को सरल और सुव्यवस्थित करना चाहती है। कुछ मांगें जनता की जरूरतों को दर्शाती हैं, खासकर स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर। करदाताओं को उम्मीद है कि आने वाले बजट में सरकार इन मांगों पर अनुकूल विचार करेगी। देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और आम आदमी को राहत देने के लिए ये कदम बेहद जरूरी हैं। वित्त मंत्री के सामने चुनौती है कि वे राजस्व संग्रह और जनता की अपेक्षाओं के बीच संतुलन कैसे बनाएं।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।