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‘वंदे मातरम’ को मिला राष्ट्रगान जैसा दर्जा, मोदी कैबिनेट ने प्रस्ताव को दी मंजूरी

‘वंदे मातरम’ को मिला राष्ट्रगान जैसा दर्जा, मोदी कैबिनेट ने प्रस्ताव को दी मंजूरी
‘वंदे मातरम’ को मिला राष्ट्रगान जैसा दर्जा, मोदी कैबिनेट ने प्रस्ताव को दी मंजूरी (Pic Credit- X @JaggiKumar11)

केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान के समान दर्जा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कानून में संशोधन के बाद इसके अपमान पर सख्त सजा होगी।

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Dipali Kumari
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Vande Matram: पश्चिम बंगाल में बड़ी जीत के बाद केंद्र सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में एक अहम और ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।

कैबिनेट का बड़ा फैसला

सरकार ने राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। इस बदलाव के लागू होने के बाद वंदे मातरम पर वही नियम और कानूनी प्रावधान लागू होंगे, जो अभी जन गण मन पर लागू हैं।

कैबिनेट बैठक में मौजूद मंत्रियों ने इस फैसले को देश के गौरव से जुड़ा कदम बताया और प्रधानमंत्री को बंगाल में मिली जीत के लिए बधाई भी दी।

अपमान पर हो सकती है जेल 

वर्तमान कानून के तहत राष्ट्रीय ध्वज, संविधान या राष्ट्रगान का अपमान करने पर जेल या जुर्माने की सजा का प्रावधान है। अब प्रस्तावित संशोधन के बाद ‘वंदे मातरम’ को भी इसी कानूनी दायरे में शामिल किया जाएगा। यानी अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर ‘वंदे मातरम’ के गायन में बाधा डालता है या इसका अपमान करता है, तो उसे भी तीन साल तक की सजा या जुर्माना हो सकता है। दोबारा अपराध करने पर सजा और सख्त हो सकती है।

150वीं वर्षगांठ 

सरकार के इस फैसले के पीछे एक अहम वजह यह भी बताई जा रही है कि देश इस समय ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है।

यह गीत बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित है और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी अहम भूमिका रही है। ऐसे में इसे समान दर्जा देने की मांग लंबे समय से उठती रही है।

संसद में पहले भी उठी थी मांग

पिछले साल दिसंबर में संसद में ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर विशेष चर्चा के दौरान भी इसे राष्ट्रगान के बराबर दर्जा देने की मांग उठी थी।
अब कैबिनेट के इस फैसले के बाद यह मांग ठोस रूप लेती नजर आ रही है।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।