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ममता दें या न दें इस्तीफा, कल खुद खत्म हो जाएगी सरकार; जानिए पूरा गणित

ममता दें या न दें इस्तीफा, कल खुद खत्म हो जाएगी सरकार; जानिए पूरा गणित
ममता दें या न दें इस्तीफा, कल खुद खत्म हो जाएगी सरकार; जानिए पूरा गणित

पश्चिम बंगाल चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने के बयान से सियासी बहस तेज हो गई है। हालांकि विधानसभा का कार्यकाल खत्म होते ही सरकार स्वतः भंग हो जाएगी। संविधान के मुताबिक नई सरकार के गठन का रास्ता साफ है, चाहे मौजूदा मुख्यमंत्री इस्तीफा दें या नहीं।

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Mamta Banerjee: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति का पूरा समीकरण बदल दिया है। 15 साल से सत्ता में रही ममता बनर्जी की पार्टी को हार का सामना करना पड़ा, वहीं भाजपा ने पहली बार सत्ता का रास्ता साफ किया। लेकिन नतीजों के बाद जब ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से साफ़ इंकार कर दिया तो अब हार-जीत से ज्यादा चर्चा इस्तीफे और संविधान से जुड़े नियमों की हो रही है।

ममता बनर्जी का आरोप 

नतीजे आने के बाद से ममता बनर्जी आक्रामक नजर आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मतगणना के दौरान गड़बड़ी हुई और भवानीपुर में उनके साथ मारपीट तक की गई। मंगलवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने साफ कहा “मैं हारी नहीं हूं, मुझे हराया गया है।” सबसे बड़ा बयान यह रहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। इस एक बयान ने पूरे राज्य में राजनीतिक और संवैधानिक बहस को जन्म दे दिया है।

ममता इस्तीफा न दें तो क्या होगा ?

दरअसल, 7 मई 2026 को पश्चिम बंगाल की 17वीं विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में संवैधानिक रूप से सरकार का कार्यकाल अपने आप खत्म हो जाएगा। मतलब साफ है चाहे ममता इस्तीफा दें या न दें, विधानसभा भंग होते ही उनका मुख्यमंत्री पद भी समाप्त हो जाएगा।

TMC का जवाब

तृणमूल कांग्रेस के नेता और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने ममता का बचाव करते हुए कहा कि पिछले तीन महीनों से आचार संहिता लागू थी, इसलिए ममता व्यावहारिक रूप से मुख्यमंत्री के तौर पर काम ही नहीं कर रही थीं।

उनके मुताबिक, “जब सरकार प्रशासनिक तौर पर मुख्य सचिव चला रहा था, तो इस्तीफे का सवाल ही कहां उठता है?”

संविधान क्या कहता है?

संविधान के जानकारों की राय इस पूरे विवाद को और दिलचस्प बना देती है। अनुच्छेद 164 के मुताबिक, मुख्यमंत्री और मंत्री राज्यपाल की इच्छा तक पद पर बने रहते हैं। यानी अगर स्थिति बिगड़ती है, तो राज्यपाल हस्तक्षेप कर सकते हैं।

अनुच्छेद 172 के तहत विधानसभा का कार्यकाल 5 साल का होता है और इसके खत्म होते ही नई सरकार का गठन जरूरी हो जाता है। ऐसे में पुरानी सरकार का बने रहना संभव नहीं है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोई मुख्यमंत्री इस्तीफा देने से मना करे, तो भी राज्यपाल उन्हें बर्खास्त कर सकते हैं और नई सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

राज्यपाल की भूमिका अहम

इस पूरे घटनाक्रम में राज्यपाल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। अगर ममता बनर्जी अपने पद पर बनी रहने की कोशिश करती हैं, तो राज्यपाल के पास उन्हें हटाने और बहुमत वाली पार्टी को सरकार बनाने का न्योता देने का अधिकार है।

कुछ विशेषज्ञों ने यहां तक कहा कि अगर हालात ज्यादा बिगड़ते हैं, तो अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन की सिफारिश भी की जा सकती है।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।