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अक्षय तृतीया पर क्या खरीदें और क्या नहीं? जानिए शुभ-अशुभ वस्तुओं की पूरी लिस्ट

अक्षय तृतीया पर क्या खरीदें और क्या नहीं? जानिए शुभ-अशुभ वस्तुओं की पूरी लिस्ट
अक्षय तृतीया पर क्या खरीदें और क्या नहीं? जानिए शुभ-अशुभ वस्तुओं की पूरी लिस्ट

अक्षय तृतीया 2026 पर क्या खरीदना शुभ है और किन चीजों से बचना चाहिए, इसे लेकर लोगों में खास उत्सुकता रहती है। इस दिन सोना-चांदी समेत कई वस्तुएं समृद्धि का प्रतीक मानी जाती हैं, वहीं कुछ चीजों को खरीदने से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए सही जानकारी जरूरी है।

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Dipali Kumari
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Akshaya Tritiya: हर साल कुछ ऐसे दिन आते हैं, जिन्हें भारतीय संस्कृति में बेहद खास और शुभ माना जाता है। अक्षय तृतीया भी उन्हीं पावन पर्वों में से एक है, जब लोग नई शुरुआत करने, खरीदारी करने और पुण्य कमाने का मौका नहीं छोड़ते। इस साल 19 अप्रैल 2026 को यह पर्व मनाया जाएगा और खास बात यह है कि इस दिन बिना किसी विशेष मुहूर्त के भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं। मान्यता है कि इस दिन किया गया हर शुभ काम अक्षय यानी कभी खत्म न होने वाला फल देता है।

अक्षय तृतीया पर खरीदें ये चीजें

अक्षय तृतीया को मां लक्ष्मी की कृपा का दिन माना जाता है। यही वजह है कि इस दिन सोना-चांदी खरीदने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन अगर आप महंगी खरीदारी नहीं करना चाहते, तो भी कई ऐसी चीजें हैं जिन्हें घर लाना बेहद शुभ माना जाता है।

जैसे सेंधा नमक, जिसे कर्ज से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है। रुई या कपास शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा का संकेत देती है। मिट्टी के बर्तन, जौ और पीली सरसों घर में सुख-समृद्धि लाने वाले माने जाते हैं। तुलसी का पौधा तो वैसे भी घर की सकारात्मकता को बढ़ाता है, वहीं कौड़ी और बर्तन धन लाभ से जुड़े माने जाते हैं।

अक्षय तृतीया पर भूलकर भी न खरीदें ये चीजें

हालांकि, इस दिन कुछ चीजों से दूरी बनाकर रखना ही बेहतर होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लोहे की वस्तुएं, कांटेदार पौधे, धारदार सामान, बासी मिठाई, काले रंग की चीजें, टूटी-फूटी या पुरानी वस्तुएं और एल्युमिनियम व स्टील के बर्तन खरीदना शुभ नहीं माना जाता। इनसे नकारात्मक ऊर्जा आने की आशंका रहती है।

अक्षय तृतीया पर दान-पुण्य का महत्त्व

अक्षय तृतीया पर दान-पुण्य का भी खास महत्व होता है। इस दिन जरूरतमंदों को दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। आप अपनी क्षमता के अनुसार खरबूजा, ककड़ी, मिश्री, सत्तू, पंखा, चटाई, जूते-चप्पल, चावल, नमक, घी, घड़ा, कुल्हड़, बेलपत्र और मौसमी फल आदि का दान कर सकते हैं। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक रूप से भी एक अच्छा कदम है।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।