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Criminal Cases Against Politicians: सांसदों की ‘क्रिमिनल कुंडली’ सुप्रीम कोर्ट में पेश!

Criminal Cases Against Politicians: सांसदों की ‘क्रिमिनल कुंडली’ सुप्रीम कोर्ट में पेश!
Criminal Cases Against Politicians: सांसदों की ‘क्रिमिनल कुंडली’ सुप्रीम कोर्ट में पेश! ( Image - AI )
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Priyanka C. Mishra
Priyanka C. Mishra
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326 पर आपराधिक केस, 4,192 मुकदमे लंबित

Criminal Cases Against Politicians: देश की राजनीति में आपराधिक मामलों को लेकर एक बार फिर बड़ी चर्चा शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट में सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की जल्द सुनवाई को लेकर सुनवाई चल रही है। इसी दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता और कोर्ट के एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) विजय हंसारिया की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार देश के 776 मौजूदा सांसदों में से 326 यानी करीब 45 प्रतिशत सांसदों ने अपने चुनावी हलफनामों में आपराधिक मामले घोषित किए हैं। इनमें लोकसभा के 251 और राज्यसभा के 75 सांसद शामिल हैं। लोकसभा के 170 सांसदों और राज्यसभा के 40 सांसदों पर ऐसे गंभीर आपराधिक मामले भी घोषित हैं, जिनमें पांच साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो सकता है। हालांकि, यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है-किसी नेता पर मामला दर्ज होना यह साबित नहीं करता कि वह अपराध का दोषी है। दोष तय करने का अधिकार अदालत का है।

उत्तर प्रदेश में लंबित मामलों की संख्या सबसे ज्यादा

रिपोर्ट में बताया गया है कि मौजूदा और पूर्व सांसदों तथा विधायकों के खिलाफ देश की अदालतों में कुल 4,192 आपराधिक मामले लंबित हैं। इन मामलों के लंबे समय तक चलते रहने को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों को जिम्मेदारी दी जाए और मामलों की रोजाना सुनवाई की जाए। उत्तर प्रदेश में ऐसे लंबित मामलों की संख्या सबसे ज्यादा बताई गई है।

14 मुख्यमंत्रियों ने घोषित किए आपराधिक मामले

रिपोर्ट में 31 मौजूदा मुख्यमंत्रियों के चुनावी हलफनामों के विश्लेषण के आधार पर बताया गया है कि 14 मुख्यमंत्रियों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। सबसे ज्यादा मामले तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के 89 हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के 29, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के 19-19 मामले हैं। केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के 18 मामले घोषित हैं। इसके अलावा झारखंड के हेमंत सोरेन के 5, महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस और हिमाचल प्रदेश के सुखविंदर सिंह सुक्खू के 4-4, तमिलनाडु के सी. जोसेफ विजय और बिहार के सम्राट चौधरी के 2-2 मामले हैं। पंजाब, ओडिशा, राजस्थान और सिक्किम के मुख्यमंत्रियों ने एक-एक मामला घोषित किया है।

Criminal Cases Against Politicians
Criminal Cases Against Politicians ( Image – FB/@Vijay Hansaria )

विजय हंसारिया ने दिया सुझाव

Criminal Cases Against Politicians: विजय हंसारिया ने सुझाव दिया है कि सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों के लिए विशेष अदालतों को प्रभावी तरीके से काम करना चाहिए। इन मामलों की नियमित या रोजाना सुनवाई हो और हाई कोर्ट इनकी प्रगति पर नजर रखें। रिपोर्ट का उद्देश्य किसी नेता को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि जनप्रतिनिधियों से जुड़े आपराधिक मामलों का फैसला वर्षों तक न लटके। सुप्रीम कोर्ट पहले भी सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की जल्द सुनवाई के लिए दिशा-निर्देश दे चुका है। 2025 में कोर्ट के सामने यह बात भी रखी गई थी कि पुराने मामले लंबित हैं और नए मामले लगातार जुड़ रहे हैं।

असली सवाल क्या है?

  • लोकतंत्र में जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनती है। इसलिए जरूरी है कि किसी नेता के खिलाफ मामला हो तो उसका निष्पक्ष और समय पर फैसला हो। न तो केवल मामला दर्ज होने के आधार पर किसी नेता को अपराधी कहा जा सकता है और न ही गंभीर मामलों को वर्षों तक लंबित रखना उचित है।
  • देश में सैकड़ों सांसदों और हजारों मौजूदा-पूर्व सांसदों व विधायकों से जुड़े आपराधिक मामले अदालतों में लंबित हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट में अब सवाल यह है कि इन मामलों की सुनवाई कैसे तेज की जाए, ताकि आरोप सही हैं या गलत-इसका फैसला समय पर अदालत से हो सके।

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प्रियंका सी. मिश्रा वरिष्ठ हिंदी कंटेंट राइटर और पत्रकार हैं, जिन्हें समाचार लेखन, डिजिटल कंटेंट निर्माण, स्क्रिप्टिंग, रिपोर्टिंग और विश्लेषण के क्षेत्र में व्यापक अनुभव प्राप्त है। वे सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक विषयों के साथ-साथ बॉलीवुड, ज्योतिष, स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल जैसे विविध विषयों पर तथ्यपरक और शोध आधारित लेखन करती हैं। जटिल मुद्दों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करना उनकी विशेषता है, जिससे उनकी सामग्री व्यापक पाठक वर्ग के लिए सहज और विश्वसनीय बनती है। अनुभव : हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट इंडस्ट्री में कार्य करते हुए उन्होंने समाचार लेखन, फीचर स्टोरी, विश्लेषणात्मक लेख और यूट्यूब स्क्रिप्टिंग में मजबूत पहचान बनाई है। विभिन्न समसामयिक और जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता उन्हें एक बहुमुखी कंटेंट विशेषज्ञ के रूप में स्थापित करती है। वर्तमान फोकस : वे समाचार, सोशल ट्रेंड्स, एंटरटेनमेंट, ज्योतिष, स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर डिजिटल ऑडियंस के लिए जानकारीपूर्ण और भरोसेमंद कंटेंट तैयार करती हैं। उनकी प्राथमिकता तथ्यों की सटीकता, निष्पक्ष प्रस्तुति और पाठकों के लिए उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराना है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • समाचार लेखन और विश्लेषण : राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक विषयों पर स्पष्ट और संतुलित रिपोर्टिंग एवं विश्लेषण। • बॉलीवुड और एंटरटेनमेंट : फिल्म, सेलिब्रिटी और मनोरंजन जगत से जुड़े ट्रेंड्स और अपडेट्स पर लेखन। • ज्योतिष और लाइफस्टाइल : ज्योतिष, स्वास्थ्य, रिलेशनशिप और दैनिक जीवन से जुड़े विषयों पर सरल एवं उपयोगी कंटेंट निर्माण। • यूट्यूब स्क्रिप्टिंग और डिजिटल कंटेंट : डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक, ऑडियंस-केंद्रित और रिसर्च आधारित स्क्रिप्ट तैयार करने में विशेषज्ञता। • हिंदी कंटेंट निर्माण : सरल, प्रभावी और SEO-फ्रेंडली हिंदी कंटेंट तैयार करने का अनुभव। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, निष्पक्ष दृष्टिकोण और संवेदनशील लेखन शैली के कारण प्रियंका सी. मिश्रा ने पाठकों के बीच एक विश्वसनीय हिंदी कंटेंट राइटर और डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल के रूप में अपनी पहचान बनाई है। समाचार और डिजिटल मीडिया के प्रति उनकी प्रतिबद्धता तथा विविध विषयों पर निरंतर लेखन अनुभव उनकी विशेषज्ञता और विश्वसनीयता को मजबूत बनाता है।