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Commercial Vehicle Age Limit: ईवी, सीएनजी और हाइड्रोजन वाहनों को मिल सकती है 5 साल ज्यादा उम्र

Commercial Vehicle Age Limit: ईवी, सीएनजी और हाइड्रोजन वाहनों को मिल सकती है 5 साल ज्यादा उम्र
Commercial Vehicle Age Limit: ईवी, सीएनजी और हाइड्रोजन वाहनों को मिल सकती है 5 साल ज्यादा उम्र ( Image - AI )

Commercial Vehicle Rules : केंद्र सरकार ने ईवी, सीएनजी और हाइड्रोजन से चलने वाले कमर्शियल वाहनों को 5 साल अतिरिक्त चलाने का प्रस्ताव रखा है। राष्ट्रीय परमिट और वाहन पंजीकरण की प्रक्रिया को भी आसान बनाने की तैयारी है। हालांकि, ये बदलाव अभी प्रस्तावित हैं और अंतिम नियम जारी होना बाकी है।

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Priyanka C. Mishra
Priyanka C. Mishra
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कमर्शियल वाहन मालिकों के लिए बड़ी राहत की तैयारी

Commercial Vehicle Age Limit: केंद्र सरकार कमर्शियल वाहन क्षेत्र में कई बड़े बदलाव करने की तैयारी कर रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसका सबसे बड़ा फायदा इलेक्ट्रिक यानी ईवी, हाइड्रोजन और प्राकृतिक गैस यानी सीएनजी से चलने वाले कमर्शियल वाहनों को मिल सकता है। प्रस्ताव के मुताबिक इन वाहनों को मौजूदा व्यवस्था की तुलना में 5 साल तक अतिरिक्त समय सड़क पर व्यावसायिक रूप से चलाने की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि, सबसे जरूरी बात यह है कि यह अभी प्रस्ताव है, अंतिम नियम नहीं। मंत्रालय ने इस मसौदे पर संबंधित लोगों और कंपनियों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। सुझावों पर विचार करने के बाद ही सरकार अंतिम नियम जारी करेगी।

परिवहन कंपनियों पर आर्थिक दबाव होगा कम

सरकार के प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य वैकल्पिक ईंधन से चलने वाले वाहनों को बढ़ावा देना है। अगर प्रस्तावित बदलाव लागू होता है तो पात्र कमर्शियल ईवी, हाइड्रोजन और सीएनजी वाहनों को सामान्य व्यवस्था से ज्यादा समय तक सड़क पर व्यावसायिक इस्तेमाल का मौका मिल सकता है। इसका सीधा फायदा बस, ट्रक, मालवाहक वाहन और दूसरे कमर्शियल वाहनों का बड़ा बेड़ा चलाने वाली कंपनियों को हो सकता है। किसी वाहन को कुछ साल ज्यादा चलाने की अनुमति मिलने से कंपनियों को तुरंत नया वाहन खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे नई गाड़ियों की खरीद पर होने वाला बड़ा खर्च कुछ समय के लिए टल सकता है और परिवहन कंपनियों पर आर्थिक दबाव कम हो सकता है।

नियमों का पालन करना जरूरी

कमर्शियल वाहन किसी भी परिवहन कंपनी के लिए सबसे बड़ी पूंजीगत लागत में शामिल होते हैं। एक नया ट्रक या बस खरीदने में बड़ी रकम लगती है। इसके अलावा बीमा, रखरखाव, चालक और दूसरे खर्च भी जुड़े होते हैं। अगर वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों को ज्यादा समय तक चलाने की अनुमति मिलती है तो वाहन मालिक पुराने बेड़े से ज्यादा समय तक कमाई कर सकेंगे। हालांकि, सिर्फ वाहन की उम्र बढ़ने से वह अपने आप सड़क पर चलने के योग्य नहीं हो जाएगा। वाहन की फिटनेस, सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण, बीमा और परमिट से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी रहेगा।

राष्ट्रीय परमिट की प्रक्रिया होगी आसान

सरकार ने कमर्शियल वाहनों के लिए राष्ट्रीय परमिट की प्रक्रिया को भी ज्यादा आसान और डिजिटल बनाने का प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित व्यवस्था में वाहन मालिक 1 साल से लेकर 5 साल तक की अवधि का विकल्प चुन सकेंगे। राष्ट्रीय परमिट इलेक्ट्रॉनिक तरीके से जारी करने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है। प्रस्तावित शुल्क 16,500 रुपये सालाना रखा गया है। इस बदलाव से देश के अलग-अलग राज्यों में सामान या यात्रियों को लेकर चलने वाले ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों को बार-बार कागजी प्रक्रिया पूरी करने की परेशानी कम हो सकती है। राष्ट्रीय परमिट से जुड़े रिकॉर्ड में वाहन का बीमा, प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र, फिटनेस और लंबित चालान जैसी जानकारी भी दिखाई देने का प्रस्ताव है। इससे वाहन मालिक को अपनी गाड़ी से जुड़ी जरूरी जानकारी एक ही जगह मिल सकती है।

वाहन पंजीकरण में वैहन की भूमिका बढ़ेगी

सरकार वाहन पंजीकरण की प्रक्रिया को भी डिजिटल और आसान बनाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए वैहन व्यवस्था से उपलब्ध जानकारी का ज्यादा इस्तेमाल करने का प्रस्ताव है। वाहन का नंबर दर्ज करने पर वैहन में पहले से मौजूद संबंधित जानकारी अपने आप सामने आ सकती है। इससे वाहन मालिक और डीलर को वही जानकारी बार-बार अलग-अलग जगह भरने की जरूरत कम होगी। डीलर व्यापार प्रमाणपत्र से जुड़ी प्रक्रिया में जीएसटी, पैन, उद्यम और कंपनी पहचान संख्या जैसी जानकारी भी वैहन से अपने आप लेने का प्रस्ताव है। वाहन पंजीकरण के दौरान आधार से जुड़े मोबाइल नंबर के इस्तेमाल की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

लोन वाले वाहनों के लिए भी बदलाव

अगर किसी वाहन पर बैंक या वित्तीय कंपनी का कर्ज है और वाहन पर उसका अधिकार दर्ज है, तो पंजीकरण से जुड़ी जानकारी में समझौता संख्या या ऋण खाता संख्या दर्ज करने का प्रस्ताव है। इससे वाहन के पंजीकरण रिकॉर्ड में कर्ज से जुड़ी जानकारी ज्यादा स्पष्ट और व्यवस्थित तरीके से दर्ज हो सकेगी।

बिना बॉडी वाले चेसिस को मिलेगी अस्थायी राहत

वाहन उद्योग में कई बार वाहन का चेसिस तैयार हो जाता है, लेकिन उस पर बॉडी बनाने और वाहन को पूरी तरह तैयार करने में समय लगता है। ऐसे बिना बॉडी वाले चेसिस के लिए सरकार ने 6 महीने तक अस्थायी पंजीकरण देने का प्रस्ताव रखा है। जरूरत पड़ने पर इसकी अवधि को 30-30 दिन के लिए आगे बढ़ाने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इसका फायदा वाहन निर्माताओं, बॉडी बनाने वाली कंपनियों और वाहन संचालकों को हो सकता है।

दूसरे राज्य में वाहन ले जाने में भी आसानी

अगर किसी पूरी तरह तैयार वाहन का दूसरे राज्य में पंजीकरण कराना है या किसी वाहन को विशेष जरूरत के मुताबिक बदलकर इस्तेमाल करना है, तो उसके लिए भी अस्थायी पंजीकरण की सुविधा प्रस्तावित है। ऐसे मामलों में 45 दिन तक अस्थायी पंजीकरण दिया जा सकता है। इससे वाहन को एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाने और वहां जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी करने में सुविधा मिल सकती है।

ऑटो पार्ट्स कंपनियों के लिए भी बड़ा प्रस्ताव

Commercial Vehicle Age Limit: सरकार ने ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों को भी मोटर वाहन नियमों के एक प्रावधान में शामिल करने का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य वाहन उद्योग में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना है। इससे कंपनियां नई तकनीक, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों के लिए नए हिस्से विकसित करने पर ज्यादा काम कर सकती हैं। इसका फायदा लंबे समय में पूरे ऑटोमोबाइल उद्योग को मिल सकता है।

अभी फैसला नहीं हुआ है

  • यहां सबसे महत्वपूर्ण बात फिर समझना जरूरी है। सरकार ने इन बदलावों को अभी लागू नहीं किया है। ये प्रस्तावित नियम हैं और इन पर संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे गए हैं।
  • मंत्रालय के मसौदा नियमों में लोगों और प्रभावित पक्षों को अपनी आपत्तियां और सुझाव देने का अवसर दिया गया है। इसके बाद सरकार इन सुझावों पर विचार करेगी और अंतिम नियम जारी कर सकती है।
  • कमर्शियल ईवी, सीएनजी और हाइड्रोजन वाहनों को 5 साल अतिरिक्त चलाने का प्रस्ताव ट्रांसपोर्ट क्षेत्र के लिए बड़ी राहत बन सकता है। इससे वाहन मालिकों और कंपनियों को नए वाहन खरीदने का खर्च कुछ समय के लिए टालने का मौका मिल सकता है।
  • साथ ही राष्ट्रीय परमिट और वैहन से जुड़ी डिजिटल व्यवस्था से कागजी काम भी कम हो सकता है। लेकिन अभी इसे सरकार का अंतिम फैसला नहीं, बल्कि प्रस्तावित बदलाव ही माना जाना चाहिए। अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह साफ होगा कि कौन से वाहन इस सुविधा के दायरे में आएंगे और नई व्यवस्था वास्तव में कब से लागू होगी।

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प्रियंका सी. मिश्रा वरिष्ठ हिंदी कंटेंट राइटर और पत्रकार हैं, जिन्हें समाचार लेखन, डिजिटल कंटेंट निर्माण, स्क्रिप्टिंग, रिपोर्टिंग और विश्लेषण के क्षेत्र में व्यापक अनुभव प्राप्त है। वे सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक विषयों के साथ-साथ बॉलीवुड, ज्योतिष, स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल जैसे विविध विषयों पर तथ्यपरक और शोध आधारित लेखन करती हैं। जटिल मुद्दों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करना उनकी विशेषता है, जिससे उनकी सामग्री व्यापक पाठक वर्ग के लिए सहज और विश्वसनीय बनती है। अनुभव : हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट इंडस्ट्री में कार्य करते हुए उन्होंने समाचार लेखन, फीचर स्टोरी, विश्लेषणात्मक लेख और यूट्यूब स्क्रिप्टिंग में मजबूत पहचान बनाई है। विभिन्न समसामयिक और जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता उन्हें एक बहुमुखी कंटेंट विशेषज्ञ के रूप में स्थापित करती है। वर्तमान फोकस : वे समाचार, सोशल ट्रेंड्स, एंटरटेनमेंट, ज्योतिष, स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर डिजिटल ऑडियंस के लिए जानकारीपूर्ण और भरोसेमंद कंटेंट तैयार करती हैं। उनकी प्राथमिकता तथ्यों की सटीकता, निष्पक्ष प्रस्तुति और पाठकों के लिए उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराना है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • समाचार लेखन और विश्लेषण : राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक विषयों पर स्पष्ट और संतुलित रिपोर्टिंग एवं विश्लेषण। • बॉलीवुड और एंटरटेनमेंट : फिल्म, सेलिब्रिटी और मनोरंजन जगत से जुड़े ट्रेंड्स और अपडेट्स पर लेखन। • ज्योतिष और लाइफस्टाइल : ज्योतिष, स्वास्थ्य, रिलेशनशिप और दैनिक जीवन से जुड़े विषयों पर सरल एवं उपयोगी कंटेंट निर्माण। • यूट्यूब स्क्रिप्टिंग और डिजिटल कंटेंट : डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक, ऑडियंस-केंद्रित और रिसर्च आधारित स्क्रिप्ट तैयार करने में विशेषज्ञता। • हिंदी कंटेंट निर्माण : सरल, प्रभावी और SEO-फ्रेंडली हिंदी कंटेंट तैयार करने का अनुभव। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, निष्पक्ष दृष्टिकोण और संवेदनशील लेखन शैली के कारण प्रियंका सी. मिश्रा ने पाठकों के बीच एक विश्वसनीय हिंदी कंटेंट राइटर और डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल के रूप में अपनी पहचान बनाई है। समाचार और डिजिटल मीडिया के प्रति उनकी प्रतिबद्धता तथा विविध विषयों पर निरंतर लेखन अनुभव उनकी विशेषज्ञता और विश्वसनीयता को मजबूत बनाता है।