मुझे बचा लो…ये लोग मार डालेंगे… कुछ घंटों बाद मां और नवजात की मौत, रीवा की घटना से मचा हड़कंप

रीवा के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत के बाद इलाज में लापरवाही के आरोप लगे हैं। चार स्वास्थ्यकर्मी निलंबित किए गए हैं और अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई है। अब CCTV, मेडिकल रिकॉर्ड और ड्यूटी रोस्टर समेत कई साक्ष्यों के आधार पर मजिस्ट्रियल जांच चल रही है।
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रीवा के अस्पताल में आखिर उस रात हुआ क्या था?
मध्य प्रदेश के रीवा स्थित संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में 25 वर्षीय कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। 26 अगस्त को हुई इस घटना के बाद परिवार ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। मामले में 2 डॉक्टर और 2 नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित किया गया है. इसके अलावा अस्पताल अधीक्षक को भी पद से हटाया गया और बाद में मेडिकल कॉलेज के डीन के खिलाफ भी कार्रवाई हुई। अब मामले की मजिस्ट्रियल जांच चल रही है, जिसमें उपचार से लेकर अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था तक कई बिंदुओं की जांच की जा रही है।
मौत से पहले का वीडियो बना विवाद का केंद्र
रीवा जिले के हटवा गांव निवासी कल्पना मिश्रा, पत्नी अमित मिश्रा, को गांधी स्मारक चिकित्सालय के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में भर्ती कराया गया था। उसी दिन रात इलाज के दौरान कल्पना और उनके गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। परिवार के अनुसार कल्पना की यह पहली डिलीवरी थी। 26 अगस्त की रात करीब 8:30 बजे उनका सी-सेक्शन किया गया और बच्चे का जन्म हुआ। इसके बाद मां और नवजात दोनों की हालत बिगड़ गई और दोनों की मौत हो गई।
घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया। वीडियो में कल्पना अस्पताल में बेहद परेशान दिखाई दे रही हैं और अपने परिवार से उन्हें वहां से ले जाने की गुहार करती सुनाई देती हैं। वीडियो में वह इलाज जारी रहने पर अपनी जान को खतरा होने की बात कहती नजर आती हैं। इसी वीडियो को परिवार ने अस्पताल में कथित लापरवाही के आरोपों के समर्थन में महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया है।
परिवार ने की जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR की मांग
कल्पना के पिता रामशिरोमणि मिश्रा का आरोप है कि उन्होंने बेटी की हालत को लेकर डॉक्टरों और अस्पताल के कर्मचारियों से ध्यान देने की मांग की थी। परिवार ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR की मांग भी की है। वहीं अस्पताल प्रशासन ने परिवार के आरोपों के विपरीत यह कहा कि कल्पना की हालत अस्पताल पहुंचने के समय ही गंभीर थी और उपचार चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार किया गया।
अस्पताल के तत्कालीन अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा ने बताया था कि गर्भावस्था के दौरान आवश्यक संख्या में जांच नहीं हुई थीं और बाद में उनका ब्लड प्रेशर तथा हार्ट रेट बढ़ गया था। भर्ती के समय कल्पना का प्लेटलेट काउंट करीब 30 हजार प्रति माइक्रोलिटर था। उनका ब्लड प्रेशर बहुत अधिक और लिवर एंजाइम भी बढ़े हुए बताए गए। कुछ रिपोर्टों ने इन स्थितियों को गंभीर गर्भावस्था संबंधी जटिलता और HELLP syndrome से जोड़ा है।
जांच के लिए 5 सदस्यीय समिति गठित
घटना के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की। इसी क्रम में ड्यूटी पर मौजूद डॉ. सोनल अग्रवाल और डॉ. निधि पांडे सहित दो डॉक्टरों और दो नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित किया गया। मामला बढ़ने के बाद संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को पद से हटाया गया। इसके बाद मेडिकल कॉलेज के डीन को भी पद से हटाए जाने की रिपोर्ट सामने आई।
मजिस्ट्रियल जांच का आदेश
रीवा कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने जांच के लिए सिरमौर की एसडीएम दृष्टि जायसवाल को जिम्मेदारी दी है। जांच के लिए सात बिंदु निर्धारित किए गए हैं और एक महीने के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने 12 से 24 सितंबर के बीच निर्धारित दिनों में सुनवाई रखी है, जिसमें पीड़ित परिवार, प्रत्यक्षदर्शी और अन्य लोग अपने साक्ष्य तथा लिखित बयान प्रस्तुत कर सकते हैं। मजिस्ट्रियल जांच का उद्देश्य सिर्फ यह पता लगाना नहीं है कि मौत कैसे हुई, बल्कि यह भी देखना है कि अस्पताल में उपचार और प्रशासनिक व्यवस्था में कहीं कोई चूक हुई थी या नहीं।
CCTV और ड्यूटी रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में
परिवार की ओर से पेश अधिवक्ता ने जांच समिति के सामने कई दस्तावेज और साक्ष्य रखे। परिवार ने ऑपरेशन थिएटर के बाहर लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग, डॉक्टरों का ड्यूटी रोस्टर, सहायक स्टाफ की उपस्थिति से जुड़े रजिस्टर और अधीक्षक कार्यालय से संबंधित CCTV फुटेज की जांच की मांग की है। परिवार का कहना है कि इन रिकॉर्डों से यह स्पष्ट हो सकता है कि कल्पना की हालत बिगड़ने के दौरान कौन-कौन कर्मचारी ड्यूटी पर था और उस समय अस्पताल में क्या घटनाक्रम हुआ। यही रिकॉर्ड जांच में सबसे महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं, क्योंकि इससे आरोपों को समय और दस्तावेजों के साथ मिलाया जा सकेगा।
CBI जांच की भी मांग
कल्पना के पिता और अन्य परिजन प्रशासनिक कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। परिवार की मांग है कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए और मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए। परिवार ने कुछ रिपोर्टों में CBI जांच की मांग भी रखी है। एक रिपोर्ट में पोस्टमार्टम से जुड़े कुछ निष्कर्षों का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार नवजात के पोस्टमार्टम में सिर में गंभीर चोट और रक्तस्राव का उल्लेख है, जबकि कल्पना के पोस्टमार्टम में फेफड़ों और मस्तिष्क में सूजन सहित अन्य निष्कर्ष बताए गए हैं।
जीतू पटवारी की एंट्री से मामला और गरमाया
कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत का मामला सामने आने के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी सरकार और अस्पताल प्रशासन पर सवाल उठाए। जीतू पटवारी रीवा पहुंचे। पटवारी ने मृतक कल्पना के पिता के आंदोलन का समर्थन किया और सरकार पर मामले को लेकर संवेदनहीनता का आरोप लगाया। पटवारी के रीवा पहुंचने के बाद यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था और अस्पताल प्रशासन के सवालों से आगे बढ़कर राजनीतिक मुद्दा भी बन गया।
आमरण अनशन कर रहे पिता को मेडिकल अरेस्ट
कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे रामशिरोमणि मिश्रा की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें मेडिकल अरेस्ट कर अस्पताल ले जाया गया। वह करीब 15 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे थे। लगातार अनशन के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आने के बाद प्रशासन ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया।
रामशिरोमणि मिश्रा अपनी बेटी की मौत के मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR और कार्रवाई की मांग को लेकर रीवा के सिरमौर चौराहे पर अनशन कर रहे थे। इससे पहले भी उनकी हालत बिगड़ने की खबरें सामने आई थीं। 10 सितंबर को सामने आई रिपोर्ट में बताया गया था कि अनशन के नौवें दिन वह ठीक से बैठ भी नहीं पा रहे थे और बातचीत करने में भी परेशानी हो रही थी।
सच आखिर कहां से सामने आएगा?
कल्पना मिश्रा की मौत के मामले में इस समय दो महत्वपूर्ण तथ्य समानांतर रूप से सामने हैं। परिवार का आरोप है कि अस्पताल में उनकी बेटी को पर्याप्त और समय पर उपचार नहीं मिला। मौत से पहले का वीडियो इस आरोप को गंभीर बनाता है और यह सवाल जरूर खड़ा करता है कि उस समय उनकी स्थिति क्या थी और अस्पताल के कर्मचारियों ने उनकी शिकायत पर क्या कार्रवाई की। ऐसे में मामले की सबसे अहम कड़ी भर्ती से लेकर मौत तक की पूरी टाइमलाइन है।
यह स्पष्ट होना जरूरी है कि अस्पताल पहुंचने के बाद कौन-सी जांच कब हुई, डॉक्टरों ने कब निर्णय लिया, सी-सेक्शन कब शुरू हुआ, ऑपरेशन के बाद मां और नवजात की निगरानी कैसे की गई और उनकी हालत बिगड़ने पर क्या कदम उठाए गए। CCTV फुटेज और ड्यूटी रोस्टर से यह पता लगाया जा सकता है कि उस समय कौन-कौन अस्पताल में मौजूद था। वहीं मेडिकल रिकॉर्ड यह बताएगा कि मरीज की हालत के अनुसार क्या उपचार किया गया।
अब जांच के सामने सबसे बड़े सवाल
- क्या कल्पना की गंभीर हालत को समय रहते सही तरीके से संभाला गया?
- सी-सेक्शन और उसके बाद की निगरानी में निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन हुआ या नहीं?
- मरीज की शिकायत और बेचैनी के समय डॉक्टरों ने क्या कदम उठाए?
- ड्यूटी पर कौन था और किस समय कौन-सा उपचार दिया गया?
- नवजात की मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या था?
- क्या किसी स्तर पर ऐसी देरी या चूक हुई, जिसे मौत से सीधे जोड़ा जा सकता है?

