‘सीट’ पाने की जंग शुरू, त्योहार पर घर जाने वालों की बढ़ी टेंशन

जब दिवाली-छठ की भीड़ हर साल तय होती है, तो रेलवे की तैयारी आखिरी वक्त पर क्यों दिखती है? 60 दिन पहले बुकिंग के बावजूद यात्री कंफर्म सीट के लिए क्यों तरस रहे हैं?
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दिवाली-छठ से पहले ही बिहार-यूपी रूट की सीटें फुल, कई ट्रेनों में नो रूम
दिवाली और छठ पर घर जाने की तैयारी कर रहे रेल यात्रियों के लिए इस बार भी टिकट का संकट त्योहार से काफी पहले शुरू हो गया है। दिल्ली, मुंबई और गुजरात जैसे बड़े शहरों से बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड जाने वाली कई ट्रेनों में कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल हो गया है। कई ट्रेनों में लंबी वेटिंग चल रही है तो कुछ में वेटिंग भी बंद हो चुकी है। यानी नो रूम की स्थिति है। त्योहारी सीजन की तस्वीर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आईआरसीटीसी ने 7 सितंबर को एक दिन में रिकॉर्ड 20.06 लाख टिकट बुक किए। अगले दिन भी करीब 19.51 लाख टिकट बुक हुए। ऑनलाइन बुकिंग अब रेलवे की कुल टिकट बिक्री का बड़ा हिस्सा बन चुकी है। ऐसे में सुबह बुकिंग खुलते ही वेबसाइट और ऐप पर पड़ने वाला दबाव साफ दिखाई दे रहा है।
सुबह 8 बजे शुरू होती है टिकट की असली जंग
60 दिन पहले टिकट बुक करने की व्यवस्था के तहत जैसे ही सुबह 8 बजे रिजर्वेशन खुलता है, हजारों-लाखों यात्री एक साथ IRCTC की वेबसाइट और ऐप पर पहुंच जाते हैं। यात्रियों की शिकायत है कि बुकिंग शुरू होते ही वेबसाइट धीमी पड़ जाती है और कई बार स्क्रीन पर ज्यादा लोड होने का संदेश दिखाई देता है। कुछ यात्रियों को सीट उपलब्ध भी दिखाई देती है, लेकिन आगे बढ़कर भुगतान और बुकिंग पूरी करने तक सीट वेटिंग में चली जाती है। कई बार चार-पांच मिनट में ही उपलब्ध सीटें खत्म हो जाती हैं। सबसे ज्यादा परेशानी उन यात्रियों को हो रही है, जिन्होंने पहले से अपना प्रोफाइल, यात्रियों की जानकारी और भुगतान का तरीका तैयार कर रखा है। यानी प्रक्रिया पहले से पूरी होने के बावजूद असली चुनौती सीट मिलने की है।
दिवाली की टिकट किसी तरह मिली, अब वापसी की चिंता
दिवाली इस साल 8 नवंबर को है। 6, 7 और 8 नवंबर की यात्रा के लिए टिकट बुकिंग क्रमश: 7, 8 और 9 सितंबर से शुरू हुई। बुकिंग खुलते ही कई रूटों पर मांग इतनी बढ़ गई कि यात्रियों को कंफर्म टिकट के लिए मशक्कत करनी पड़ी। अब जिन लोगों ने किसी तरह घर जाने का टिकट हासिल कर लिया है, उनके सामने वापसी की चिंता खड़ी है। दिवाली के बाद 11 नवंबर की यात्रा के लिए बुकिंग 12 सितंबर से शुरू हो रही है। यानी घर पहुंचने की टिकट मिल भी गई तो लौटने के लिए फिर वही टिकट की जंग लड़नी होगी। इसके बाद छठ की भीड़ शुरू होगी। 13 से 16 नवंबर के बीच छठ पर्व को लेकर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश जाने वाले यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। यात्रा की तारीख के हिसाब से इन दिनों की टिकट बुकिंग 14 से 17 सितंबर के बीच खुलेगी।
स्पेशल ट्रेनें आईं, लेकिन मांग बहुत बड़ी
रेलवे ने इस बार त्योहारी भीड़ को देखते हुए स्पेशल ट्रेनों की घोषणा शुरू कर दी है। दिल्ली से बिहार और उत्तर प्रदेश के लिए कई अतिरिक्त सेवाएं सामने आ चुकी हैं। इनमें आनंद विहार से पाटलिपुत्र और लौकहा बाजार, ऋषिकेश से मुजफ्फरपुर तथा चंडीगढ़ से पटना जैसे रूट शामिल हैं। रेलवे की तरफ से आगे भी मांग के हिसाब से और सेवाएं जोड़े जाने की उम्मीद है। दिल्ली से बिहार जाने वालों के लिए यह राहत जरूर है, लेकिन यात्रियों की संख्या इतनी ज्यादा है कि सिर्फ कुछ स्पेशल ट्रेनों से दबाव पूरी तरह खत्म होना आसान नहीं होगा। मुंबई से भी त्योहारी भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त ट्रेनें घोषित की गई हैं। पश्चिम रेलवे ने दादर और हजरत निजामुद्दीन के बीच फेस्टिवल स्पेशल की घोषणा की है, जो अक्टूबर से नवंबर के बीच चलेगी। भागलपुर जैसे बिहार के शहरों के लिए भी दिवाली और छठ को देखते हुए कई स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की जा रही है। दिल्ली, मुंबई, पुणे, सूरत और दूसरे शहरों से बिहार के लिए अतिरिक्त कनेक्टिविटी बढ़ाई जा रही है।
तत्काल में भी चंद मिनट का मौका
नियमित और स्पेशल ट्रेनों में टिकट नहीं मिलने पर यात्रियों के पास तत्काल का विकल्प बचता है। एसी श्रेणी के लिए तत्काल बुकिंग सुबह 10 बजे और स्लीपर व नॉन-एसी श्रेणी के लिए सुबह 11 बजे शुरू होती है। लेकिन त्योहारी सीजन में मांग इतनी ज्यादा होती है कि तत्काल की सीमित सीटें भी कुछ ही मिनटों में खत्म हो सकती हैं। इसलिए यात्रियों के लिए तत्काल भी कोई पक्का विकल्प नहीं है।
रेलवे ने बुकिंग सिस्टम भी मजबूत किया
IRCTC के मुताबिक त्योहारी सीजन में टिकट बुकिंग का दबाव सबसे ज्यादा सुबह के शुरुआती समय में रहता है। इसी को देखते हुए टिकट बुकिंग सिस्टम की क्षमता बढ़ाई गई है। 7 सितंबर को 20.06 लाख टिकटों की रिकॉर्ड बुकिंग इसका एक बड़ा उदाहरण है। रेलवे फर्जी बुकिंग, बॉट और टिकटों की दलाली रोकने के लिए आधार सत्यापन और दूसरे तकनीकी उपायों का भी इस्तेमाल कर रहा है। पहले बड़ी संख्या में संदिग्ध यूजर आईडी बंद की जा चुकी हैं।
यात्री ये 5 बातें याद रखें:
- टिकट खुलने की तारीख अपने मोबाइल में पहले से नोट कर लें।
- सिर्फ एक ट्रेन पर निर्भर न रहें, आसपास के स्टेशनों और वैकल्पिक ट्रेनों को भी देखें।
- वापसी का टिकट भी बुकिंग खुलते ही कराने की कोशिश करें।
- स्पेशल ट्रेनों की घोषणा के लिए रेलवे और IRCTC की अपडेट देखते रहें।
- तत्काल को आखिरी विकल्प मानें, पक्का विकल्प नहीं।
असली संकट वेबसाइट नहीं, सीटों और यात्रियों के बीच का फासला
- त्योहारी सीजन में टिकट की मारामारी को सिर्फ IRCTC की वेबसाइट की समस्या मानना सही तस्वीर नहीं होगी। वेबसाइट पर दबाव जरूर है, लेकिन मूल समस्या एक ही समय में लाखों यात्रियों का एक ही दिशा में जाना है।
- दिवाली और छठ के आसपास दिल्ली, मुंबई, गुजरात, पंजाब और दूसरे औद्योगिक इलाकों से बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर भारी संख्या में लोग जाते हैं। सामान्य दिनों में जितनी सीटों की जरूरत होती है, त्योहार के दौरान मांग उससे कई गुना बढ़ जाती है।
- नतीजा यह होता है कि 60 दिन पहले बुकिंग खुलने के कुछ ही मिनट में कई ट्रेनों की सीटें भर जाती हैं। रेलवे ने स्पेशल ट्रेनें चलाकर राहत देने की कोशिश शुरू कर दी है। लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि स्पेशल ट्रेनों की संख्या मांग के अनुपात में कितनी बढ़ती है और उनकी घोषणा कितनी जल्दी होती है।
- यात्रियों के लिए भी सबसे बड़ी सीख यही है कि इस बार आखिरी समय तक इंतजार करना भारी पड़ सकता है। घर जाने की योजना है तो टिकट की तारीख याद रखें, विकल्प खुले रखें और स्पेशल ट्रेन की जानकारी पर नजर बनाए रखें।

