जब दिवाली-छठ की भीड़ हर साल तय होती है, तो रेलवे की तैयारी आखिरी वक्त पर क्यों दिखती है? 60 दिन पहले बुकिंग के बावजूद यात्री कंफर्म सीट के लिए क्यों तरस रहे हैं?