दौड़ते-दौड़ते थम गई जिंदगी, दिल्ली पुलिस भर्ती में 23 साल के सौरभ की मौत

दिल्ली पुलिस भर्ती की फिजिकल परीक्षा में 23 वर्षीय सौरभ कुमार की दौड़ के दौरान अचानक मौत हो गई। ऐसी घटनाओं के संभावित कारण, पुराने मामले और सुरक्षा उपायों पर नजर।
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आखिर क्यों जानलेवा बन रही फिजिकल परीक्षा?
दिल्ली पुलिस में भर्ती की शारीरिक परीक्षा के दौरान 23 वर्षीय अभ्यर्थी सौरभ कुमार की अचानक मौत ने एक बार फिर पुलिस और सुरक्षा बलों की भर्ती में होने वाली कठिन शारीरिक परीक्षाओं के दौरान अभ्यर्थियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना सोमवार को दिल्ली पुलिस अकादमी, वजीराबाद में हुई। सौरभ कुमार दिल्ली पुलिस की फिजिकल एंड्योरेंस एंड मेजरमेंट टेस्ट यानी पीईएमटी में शामिल होने पहुंचे थे।
दौड़ के दौरान सौरभ अचानक ट्रैक पर गिर पड़े और बेहोश हो गए। मौके पर मौजूद लोगों और कर्मचारियों ने उन्हें प्राथमिक उपचार देने की कोशिश की। इसके बाद उन्हें पुलिस की पीसीआर वैन से अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस के मुताबिक, मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
दौड़ के दौरान अचानक क्यों बिगड़ सकती है तबीयत?
- दौड़ते हुए किसी युवा व्यक्ति का अचानक गिर जाना कई चिकित्सकीय कारणों से जुड़ा हो सकता है। सौरभ के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने से पहले किसी एक वजह को मौत का कारण मानना उचित नहीं होगा।
- तेज और लंबे समय तक दौड़ने से शरीर पर अचानक काफी दबाव पड़ता है। कुछ लोगों में पहले से मौजूद लेकिन पहचान में न आई हृदय संबंधी बीमारी अत्यधिक शारीरिक परिश्रम के दौरान गंभीर समस्या पैदा कर सकती है। दुर्लभ मामलों में हृदय की धड़कन में गंभीर गड़बड़ी के कारण अचानक हृदय गति रुक सकती है।
- इसके अलावा शरीर में पानी की कमी, अत्यधिक गर्मी, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, अत्यधिक थकान, रक्तचाप में अचानक गिरावट और शरीर का तापमान बहुत बढ़ना भी व्यायाम के दौरान या उसके बाद व्यक्ति के गिरने की वजह बन सकते हैं।
- गर्म मौसम में तेज शारीरिक गतिविधि का असर और बढ़ सकता है। शरीर को अपना तापमान सामान्य बनाए रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। पर्याप्त पानी, आराम और गर्म वातावरण के अनुकूल होने का समय न मिलने पर जोखिम बढ़ सकता है।
- यही कारण है कि केवल उम्र या सामान्य रूप से स्वस्थ दिखाई देना इस बात की गारंटी नहीं है कि कोई व्यक्ति अत्यधिक शारीरिक परिश्रम के दौरान चिकित्सकीय आपात स्थिति का सामना नहीं करेगा।
पहले भी सामने आए ऐसे मामले
पुणे: मार्च 2026 में 23 वर्षीय पुरुषोत्तम भीमराव बुर्कुल पुलिस भर्ती की 1600 मीटर दौड़ के दौरान गिर पड़े। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
सूरत: फरवरी 2026 में 27 वर्षीय रविंद्र बरैया पुलिस कांस्टेबल भर्ती की शारीरिक परीक्षा के अंतिम चरण में गिर पड़े। अस्पताल ले जाने के बाद उनकी मौत हो गई।
भरूच: गुजरात के भरूच जिले में 25 वर्षीय रविराजसिंह जडेजा पांच किलोमीटर की भर्ती दौड़ पूरी करने के कुछ समय बाद अस्वस्थ हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
राजकोट: 27 वर्षीय नितिन चौहान की पांच किलोमीटर दौड़ पूरी करने के बाद तबीयत बिगड़ गई। उन्हें सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी की शिकायत हुई और बाद में उनकी मौत हो गई।
ठाणे: 2024 में महाराष्ट्र के ठाणे में राज्य रिजर्व पुलिस बल की भर्ती के दौरान 25 वर्षीय अक्षय बिराडे दौड़ के दौरान गिर पड़े थे। बाद में उनकी मौत हो गई।
भर्ती परीक्षा में क्या बदलाव जरूरी?
- स्वास्थ्य जांच को बनाया जाए ज्यादा प्रभावी : सिर्फ सामान्य चिकित्सकीय जांच के बजाय अभ्यर्थियों के व्यक्तिगत और पारिवारिक स्वास्थ्य इतिहास पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। परिवार में कम उम्र में अचानक मौत, पहले कभी दौड़ते समय बेहोशी, सीने में दर्द, असामान्य धड़कन या अत्यधिक सांस फूलने जैसी जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है। जरूरत पड़ने पर चिकित्सक की सलाह से अतिरिक्त हृदय जांच भी कराई जा सकती है।
- मौसम के हिसाब से तय हो परीक्षा का समय : गर्मी और अधिक नमी वाले मौसम में अत्यधिक शारीरिक गतिविधि शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है। ऐसे में तापमान और मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर परीक्षा का समय तय किया जाना चाहिए। अत्यधिक गर्मी की स्थिति में परीक्षा का समय बदलना या दूसरे सुरक्षा उपाय लागू करना जोखिम कम कर सकता है।
- ट्रैक पर तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो : परीक्षा स्थल पर प्रशिक्षित चिकित्साकर्मी, एंबुलेंस, ऑक्सीजन, प्राथमिक उपचार की सुविधा और एईडी यानी ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर उपलब्ध होना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को अचानक हृदय गति रुकने जैसी आपात स्थिति होती है तो शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे समय में सीपीआर यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन और एईडी का समय पर इस्तेमाल जीवन बचाने में महत्वपूर्ण हो सकता है।
- अभ्यर्थियों को शरीर के संकेत समझाए जाएं : परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि सीने में दर्द, असामान्य सांस फूलना, चक्कर, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम, बेहोशी जैसा महसूस होना या दिल की धड़कन असामान्य लगने पर दौड़ जारी नहीं रखनी है। भर्ती पाने की इच्छा में शरीर के गंभीर संकेतों को नजरअंदाज करना जोखिम बढ़ा सकता है। अभ्यर्थियों को यह भरोसा भी होना चाहिए कि स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर दौड़ रोकना उनके खिलाफ नहीं माना जाएगा।
- फिनिश लाइन के बाद भी हो निगरानी : सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ दौड़ तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। कुछ मामलों में परेशानी दौड़ खत्म होने के बाद भी सामने आ सकती है। इसलिए फिनिश लाइन के आसपास मेडिकल टीम और निगरानी की व्यवस्था होनी चाहिए। जिन अभ्यर्थियों में दौड़ के बाद कमजोरी, चक्कर, सीने में दर्द या सांस लेने में असामान्यता दिखाई दे, उन्हें तत्काल चिकित्सकीय सहायता मिलनी चाहिए।
फिटनेस टेस्ट जरूरी, लेकिन सुरक्षा उससे भी जरूरी
पुलिस की नौकरी के लिए शारीरिक क्षमता जरूरी है और दौड़ जैसी परीक्षाएं इसी क्षमता को परखने का माध्यम हैं। लेकिन परीक्षा जितनी कठिन हो, उससे जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था भी उतनी ही मजबूत होनी चाहिए। सौरभ कुमार की मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। इसलिए फिलहाल किसी बीमारी, गर्मी या पानी की कमी को उनकी मौत की वजह बताना जल्दबाजी होगी।
लेकिन देश के अलग-अलग हिस्सों में सामने आए ऐसे मामलों से यह सवाल जरूर उठता है कि क्या भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं को और मजबूत करने की जरूरत है। बेहतर स्वास्थ्य जांच, मौसम के अनुरूप परीक्षा, पर्याप्त आराम और पानी, प्रशिक्षित चिकित्सा दल तथा तत्काल आपात सहायता जैसी व्यवस्थाएं किसी भी गंभीर स्थिति में महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।
आखिर भर्ती की दौड़ अभ्यर्थी की शारीरिक क्षमता की परीक्षा होनी चाहिए, उसकी जिंदगी की नहीं।

