नाहुर-ऐरोली के बीच बनेगा 1.6 किमी लंबा डबल-डेकर केबल ब्रिज

नाहुर-ऐरोली के बीच जीएमएलआर के अंतिम चरण में 1,354.52 करोड़ रुपये की लागत से डबल-डेकर केबल-स्टेड फ्लाईओवर बनाया जा रहा है। करीब 1.6 किमी लंबे इस संपर्क मार्ग से पश्चिमी और पूर्वी मुंबई के साथ ठाणे व नवी मुंबई की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। परियोजना को अक्टूबर 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
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1,354.52 करोड़ की परियोजना, अक्टूबर 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य
मुंबई के पश्चिमी और पूर्वी उपनगरों के बीच यातायात को सुगम बनाने की दिशा में गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड यानी जीएमएलआर परियोजना के अंतिम चरण ने रफ्तार पकड़ ली है। इसके तहत नाहुर और ऐरोली के बीच मौजूदा फ्लाईओवर के ऊपर एक नया डबल-डेकर केबल-स्टेड फ्लाईओवर बनाया जा रहा है। करीब 1.6 किलोमीटर लंबे संपर्क मार्ग वाली इस परियोजना की लागत 1,354.52 करोड़ रुपये बताई गई है।
बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी ने परियोजना को अक्टूबर 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य जीएमएलआर की प्रस्तावित सुरंग से निकलने वाले यातायात को सीधे ऐरोली की दिशा में ले जाना है। इससे वाहनों को मौजूदा सड़क नेटवर्क के भीड़भाड़ वाले हिस्सों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। परियोजना पूरी होने के बाद पश्चिमी उपनगरों से ऐरोली, ठाणे और नवी मुंबई की ओर जाने वाले यातायात के लिए अतिरिक्त और अधिक क्षमता वाला मार्ग उपलब्ध होगा।
मौजूदा फ्लाईओवर के ऊपर बनेगा दूसरा मार्ग
प्रस्तावित ढांचे की सबसे बड़ी खासियत इसका डबल-डेकर स्वरूप है। नया मार्ग मौजूदा नाहुर-ऐरोली फ्लाईओवर के ऊपर दूसरे स्तर पर विकसित किया जाएगा। इसे केबल-स्टेड तकनीक से तैयार किया जाएगा। उपलब्ध परियोजना विवरण के अनुसार मुख्य केबल-स्टेड फ्लाईओवर की लंबाई करीब 1.33 किलोमीटर है। वहीं पूरे सड़क संपर्क और संबंधित हिस्सों को मिलाकर लंबाई लगभग 1.6 किलोमीटर बताई गई है। यही वजह है कि परियोजना की लंबाई को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में 1.33 और 1.6 किलोमीटर के आंकड़े सामने आए हैं। 1.6 किलोमीटर का आंकड़ा पूरे संपर्क मार्ग से जुड़ा है, जबकि 1.33 किलोमीटर मुख्य केबल-स्टेड हिस्से की लंबाई है।
दोनों दिशाओं में 5-5 लेन
नए मार्ग को उच्च यातायात क्षमता को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। परियोजना में दोनों दिशाओं में पांच-पांच लेन का प्रावधान बताया गया है। इससे पश्चिमी उपनगरों से आने और पूर्वी मुंबई की ओर जाने वाले वाहनों को अतिरिक्त मार्ग मिलेगा। परियोजना के तहत केवल मुख्य फ्लाईओवर का निर्माण ही नहीं किया जाएगा, बल्कि आसपास के प्रमुख यातायात मार्गों को इससे जोड़ने के लिए संपर्क ढांचे भी विकसित किए जाएंगे। इसमें चार क्लोवरलीफ आर्म्स प्रस्तावित हैं। इनके जरिए ठाणे और वाशी की दिशा से आने वाले यातायात को भी जीएमएलआर नेटवर्क से जोड़ने की योजना है।
सुरंग से सीधे ऐरोली तक कनेक्टिविटी
जीएमएलआर परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मुलुंड की दिशा में बन रही सुरंग है। सुरंग से निकलने वाला यातायात मौजूदा व्यवस्था में विभिन्न जंक्शनों से होकर आगे बढ़ता है। नाहुर-ऐरोली का नया ऊंचा मार्ग इस यातायात को अधिक सीधे रास्ते से ऐरोली की ओर ले जाने के लिए तैयार किया जा रहा है। इससे नाहुर, ऐरोली और आसपास के मार्गों पर यातायात का दबाव कम करने की उम्मीद है। खासकर उन वाहनों को लाभ मिल सकता है जो पश्चिमी उपनगरों से नवी मुंबई या ठाणे की ओर जाते हैं।
परियोजना पर निर्माण कार्य आगे बढ़ा
इस चरण की परियोजना अब केवल प्रस्ताव तक सीमित नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इसका ठेका अक्षया इंफ्रा प्रोजेक्ट्स-हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी के संयुक्त उपक्रम को दिया गया है और निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। परियोजना की तकनीकी गुणवत्ता और डिजाइन की स्वतंत्र समीक्षा के लिए विशेषज्ञ संस्थाओं को भी जोड़ा गया है। आईआईटी-बॉम्बे द्वारा डिजाइन की समीक्षा किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं वीजेटीआई को तकनीकी और गुणवत्ता ऑडिट से जोड़ने की प्रक्रिया भी चल रही है। वीजेटीआई के ऑडिट के लिए करीब 6.09 करोड़ रुपये के भुगतान का प्रस्ताव सामने आया है।
4 क्लोवरलीफ से जुड़ेगा बड़ा यातायात नेटवर्क
जीएमएलआर के इस अंतिम चरण में क्लोवरलीफ संपर्क मार्गों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। इनका उद्देश्य अलग-अलग दिशाओं से आने वाले वाहनों को बिना बड़े चौराहों पर रुके मुख्य मार्ग से जोड़ना है। परियोजना पूरी होने के बाद गोरेगांव से आने वाला यातायात सुरंग के जरिए मुलुंड की दिशा में पहुंचेगा और वहां से नए ऊंचे मार्ग के जरिए ऐरोली की ओर जा सकेगा। इसी नेटवर्क के जरिए ठाणे और वाशी की तरफ से आने वाले यातायात को भी जोड़ने की योजना है।
यात्रा समय घटाने का लक्ष्य
बीएमसी अधिकारियों ने जीएमएलआर परियोजना के जरिए गोरेगांव और ऐरोली के बीच यात्रा समय को काफी कम करने का लक्ष्य रखा है। कुछ रिपोर्टों में इसे 20 मिनट से कम करने का लक्ष्य बताया गया है। हालांकि यह परियोजना का लक्ष्य है, निश्चित यात्रा समय नहीं। वास्तविक समय यातायात की मात्रा, मार्ग के उपयोग, प्रवेश और निकास बिंदुओं तथा भविष्य में मुंबई के सड़क नेटवर्क पर बढ़ने वाले दबाव पर निर्भर करेगा।
नया परिवहन गलियारा
- काम पूरा होने के बाद जीएमएलआर का यह अंतिम चरण पश्चिमी उपनगरों को पूर्वी मुंबई, ऐरोली और आगे नवी मुंबई से जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग के रूप में काम कर सकेगा।
- डबल-डेकर केबल-स्टेड फ्लाईओवर, सुरंग और क्लोवरलीफ संपर्क मार्गों का यह पूरा ढांचा मुंबई के सड़क नेटवर्क में एक नया परिवहन गलियारा तैयार करेगा।
- हालांकि परियोजना का वास्तविक प्रभाव निर्माण पूरा होने और यातायात के लिए खोले जाने के बाद ही सामने आएगा।
- फिलहाल बीएमसी का ध्यान निर्माण कार्य को तय समयसीमा के भीतर पूरा करने और इसके तकनीकी मानकों को सुनिश्चित करने पर है।

