जंतर-मंतर पर सौरभ भारद्वाज हिरासत में, दिल्ली में धारा 163 लागू

जंतर-मंतर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। प्रदर्शन को देखते हुए नई दिल्ली जिले में धारा 163 लागू है और 11 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश-निकास बंद किए गए हैं। प्रदर्शन का मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ा है।
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11 मेट्रो स्टेशन बंद, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में पहुंचे थे आप नेता
दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उनके साथ आम आदमी पार्टी के कई कार्यकर्ताओं और अन्य प्रदर्शनकारियों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। प्रदर्शन को देखते हुए नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू है और जंतर-मंतर के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस के अनुसार यह आदेश सार्वजनिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए लागू किया गया है।
धारा 163 लागू होने के कारण बिना अनुमति भीड़ जुटाने, सार्वजनिक भाषण, नारेबाजी, जुलूस, प्रदर्शन और धरने पर रोक है। पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त बल तैनात किया है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग भी की है। रिपोर्टों के अनुसार प्रदर्शन में 3000 से अधिक लोगों के शामिल होने की संभावना जताई गई थी। आम आदमी पार्टी के साथ छात्र और युवा संगठनों के कार्यकर्ताओं के भी पहुंचने की बात सामने आई।
प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं थी
सौरभ भारद्वाज शुक्रवार को समर्थकों के साथ जंतर-मंतर पहुंचे। यहां मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन होना था। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कार्रवाई शुरू की और भारद्वाज सहित कई लोगों को हिरासत में ले लिया। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी थी। पुलिस के अनुसार जंतर-मंतर पर बिना अनुमति धरना, प्रदर्शन, जुलूस, भाषण और नारेबाजी पर रोक है। इसी व्यवस्था के तहत पुलिस ने प्रदर्शन स्थल और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई है।
प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी के अलावा छात्र संगठनों और अन्य राजनीतिक एवं सामाजिक समूहों के शामिल होने की बात सामने आई है। प्रदर्शनकारियों की ओर से मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर विरोध
प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण है। प्रदर्शनकारी निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में नामों से जुड़े बदलावों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन इसी मुद्दे से जुड़ा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और इस प्रक्रिया को लेकर स्पष्टीकरण की जरूरत है।
निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर अलग पक्ष रखा गया है। आयोग का कहना है कि प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची में मौजूद अपात्र, दोहरे और अन्य गलत नामों को हटाना तथा सूची को अधिक शुद्ध बनाना है। इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों और निर्वाचन आयोग के बीच मतभेद जारी हैं।
11 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास बंद
प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो की आवाजाही पर भी असर पड़ा है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत 11 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद किए गए हैं। इनमें जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक, सेवा तीर्थ, मंडी हाउस, लोक कल्याण मार्ग, आईएनए, चावड़ी बाजार, रामकृष्ण आश्रम मार्ग और नई दिल्ली शामिल हैं। कुछ स्टेशनों पर यात्रियों को मेट्रो बदलने की सुविधा उपलब्ध है। जंतर-मंतर, संसद मार्ग, अशोक रोड और आसपास के मार्गों पर भी यातायात नियंत्रित किया जा रहा है। दिल्ली यातायात पुलिस ने लोगों से इन मार्गों पर जाने से बचने और वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की अपील की है।
आप नेताओं ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
- सौरभ भारद्वाज ने प्रदर्शन से पहले लोगों से जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की थी। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन में शामिल होने की बात कही थी। पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने से पहले उन्होंने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर समर्थकों से विरोध में शामिल होने को कहा।
- भारद्वाज ने निर्वाचन आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए। आम आदमी पार्टी के अन्य नेताओं ने भी प्रदर्शन को लेकर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि वह मतदाता सूची के पुनरीक्षण और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों को जनता के सामने रखना चाहती है।
- पूरा विवाद मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़ा है। विपक्षी दल और कुछ सामाजिक संगठन इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि मतदाताओं के नाम हटाने या संशोधित करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और पर्याप्त जांच जरूरी है।
- दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग इस प्रक्रिया को मतदाता सूची को शुद्ध करने की कवायद के रूप में देखता है। आयोग से जुड़े पक्षों के अनुसार इसका उद्देश्य अपात्र और दोहरे नामों को हटाना तथा मतदाता सूची को अद्यतन करना है। इसी मुद्दे पर राजनीतिक विवाद बढ़ता गया और अब दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंच गया है।

