दिल्ली में ‘भजन क्लबिंग’ में पहुंचे पीएम मोदी, युवाओं के साथ बजाया मंजीरा और गाया भजन

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पारंपरिक भक्ति संगीत को मिला नया अंदाज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार शाम दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय पार्क में आयोजित एक अनोखे ‘भजन क्लबिंग’ कार्यक्रम में शामिल हुए। यहां पारंपरिक भजनों को आधुनिक संगीत और कंसर्ट जैसे माहौल में पेश किया गया। बड़ी संख्या में युवा कार्यक्रम में मौजूद थे। प्रधानमंत्री ने सामने बैठकर भजन सुने, तालियां बजाईं और एक मंजीरे जैसे वाद्य यंत्र के साथ ताल भी मिलाई। बाद में उन्होंने इस आयोजन को शानदार बताया।
यह कार्यक्रम भारतीय जनसंघ के प्रमुख नेताओं में रहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के मौके पर आयोजित किया गया था। दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को हुआ था। कार्यक्रम का आयोजन भाजपा मुख्यालय के सामने स्थित दीनदयाल उपाध्याय पार्क में हुआ। प्रधानमंत्री इससे पहले दिन में दीनदयाल उपाध्याय को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि भी दे चुके थे।
युवाओं के बीच बैठे पीएम मोदी
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री आगे की पंक्ति में बैठे नजर आए। मंच पर कलाकार भगवान राम और हनुमान से जुड़े भजन प्रस्तुत कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने भी उनके साथ ताल मिलाई। सामने मौजूद युवाओं ने भजनों के साथ गाया और तालियां बजाईं। कार्यक्रम से सामने आए वीडियो में प्रधानमंत्री को ‘श्री राम जय राम जय राम’ और अन्य भजनों की प्रस्तुतियों के दौरान कलाकारों का साथ देते देखा गया। कार्यक्रम में सीता-राम और राधा-कृष्ण से जुड़े भजन भी प्रस्तुत किए गए।
कार्यक्रम खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर इसका वीडियो साझा करते हुए लिखा, “दिल्ली में भजन क्लबिंग। शानदार!” वीडियो में उन्हें युवाओं के बीच बैठकर प्रस्तुति का आनंद लेते और तालियां बजाते देखा जा सकता है।
भजन प्रस्तुतियों का एक नया स्वरूप ‘भजन क्लबिंग’
‘भजन क्लबिंग’ पारंपरिक भजन प्रस्तुतियों का एक नया स्वरूप है। इसमें भजनों को सामान्य धार्मिक आयोजन की बजाय कंसर्ट जैसे माहौल में पेश किया जाता है। मंच पर तेज रोशनी, ध्वनि व्यवस्था और आधुनिक संगीत संयोजन का इस्तेमाल होता है, जबकि गीतों के बोल पारंपरिक भक्ति संगीत से जुड़े रहते हैं। इस तरह के आयोजनों में खास तौर पर युवा बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। लोग भजनों के साथ गाते हैं, तालियां बजाते हैं और कई जगहों पर संगीत की धुन पर झूमते भी हैं।
आयोजकों की कोशिश पारंपरिक भक्ति संगीत को आज के युवा श्रोताओं तक नए अंदाज में पहुंचाने की है। इस प्रारूप की एक खास बात यह है कि इसे सामान्य क्लब संस्कृति से अलग रखा जाता है। यहां शराब या नशे के बजाय भक्ति संगीत और सामूहिक भागीदारी को केंद्र में रखा जाता है। यही वजह है कि इसके आयोजक इसे आध्यात्मिकता और आधुनिक संगीत प्रस्तुति के बीच एक नया मेल बताते हैं।
‘मन की बात’ में किया था उल्लेख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले भी ‘भजन क्लबिंग’ का जिक्र कर चुके हैं। जनवरी 2026 में अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में उन्होंने इस चलन का उल्लेख करते हुए कहा था कि युवा भक्ति, संस्कृति और आधुनिकता को एक साथ जोड़ रहे हैं। उन्होंने ऐसे आयोजनों की तुलना वैश्विक स्तर के बड़े संगीत कार्यक्रमों से की थी और कहा था कि इनमें भजनों की पारंपरिक भावना को बनाए रखते हुए प्रस्तुति का नया तरीका अपनाया जा रहा है।
सितंबर में दिल्ली के कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी ने इस उभरते सांस्कृतिक प्रारूप को एक बार फिर चर्चा में ला दिया। कार्यक्रम में युवाओं की बड़ी भागीदारी रही और मंच पर भजनों की प्रस्तुति आधुनिक संगीत संयोजन के साथ की गई।
खड़गे ने सवाल उठाया
कार्यक्रम के वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने युवाओं के बीच भक्ति संगीत के इस नए प्रारूप की सराहना की, जबकि कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री की कार्यक्रम में मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं और इसे लेकर कांग्रेस तथा भाजपा नेताओं के बीच बयानबाजी हुई। कांग्रेस नेता प्रियंक खड़गे ने प्रधानमंत्री की मौजूदगी पर सवाल उठाया, जबकि भाजपा नेता सीआर केसवन ने कांग्रेस की प्रतिक्रिया की आलोचना की। दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाएं राजनीतिक दृष्टिकोण से थीं।
भक्ति संगीत को नया मंच देने की कोशिश
- ‘भजन क्लबिंग’ का चलन इस बात का संकेत है कि पारंपरिक धार्मिक संगीत की प्रस्तुति के तरीके में बदलाव हो रहा है। मंदिरों और धार्मिक आयोजनों से निकलकर भजन अब ऐसे मंचों पर भी प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जहां संगीत की आधुनिक तकनीक और युवा संस्कृति का प्रभाव दिखाई देता है।
- दिल्ली के इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की मौजूदगी ने इस प्रवृत्ति को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा जरूर दिलाई है। हालांकि, ‘भजन क्लबिंग’ का मूल आधार पारंपरिक ही है-भक्ति संगीत, सामूहिक गायन और धार्मिक भावनाओं को केंद्र में रखना। फर्क सिर्फ इतना है कि इसे आज के संगीत कार्यक्रमों जैसी प्रस्तुति के साथ युवाओं तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
- दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री का युवाओं के बीच बैठकर भजनों में शामिल होना इसी बदलते प्रारूप की तस्वीर पेश करता है। अब यह देखना होगा कि आने वाले समय में ‘भजन क्लबिंग’ देश के दूसरे शहरों में भी इसी तरह लोकप्रिय होता है या नहीं।

