Cyber Security India: नए साइबर अपराधों पर बनाएं मजबूत नियम, सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को निर्देश

Cyber Awareness : डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। अदालत ने केंद्र से इसे अलग अपराध बनाने और सख्त कानून तैयार करने पर विचार करने को कहा है।
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डिजिटल अरेस्ट पर सख्त कानून की तैयारी
Cyber Security India: फोन और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी के तरीके भी तेजी से बदल रहे हैं। अब ठग सिर्फ फर्जी मैसेज या लिंक भेजकर लोगों को निशाना नहीं बना रहे, बल्कि सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को डराने का नया तरीका अपना रहे हैं। इसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहा जा रहा है। बढ़ते डिजिटल अरेस्ट मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि इस तरह के अपराध को कानून में साफ तौर पर परिभाषित किया जाए।
अदालत ने सुझाव दिया कि डिजिटल अरेस्ट को अलग अपराध की श्रेणी में शामिल करने और दोषियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान बनाने पर विचार किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन शामिल थे, डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही थी। अदालत ने कहा कि साइबर अपराधी हर दिन नए तरीके अपना रहे हैं, इसलिए कानूनों को भी समय के साथ बदलना जरूरी है।
डर पैदा करके पैसे ऐंठे जाते हैं
डिजिटल अरेस्ट असल में ठगी का ऐसा तरीका है, जिसमें अपराधी लोगों के मन में डर पैदा करके उनसे पैसे ऐंठते हैं। ठग खुद को पुलिस अधिकारी, सीबीआई, ईडी, कोर्ट या किसी सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर फोन या वीडियो कॉल करते हैं।
वे कहते हैं कि आपका नाम किसी अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग या जांच से जुड़ा है और आपको गिरफ्तार किया जा सकता है। इसके बाद पीड़ित व्यक्ति को घंटों तक वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर किया जाता है। ठग उसे परिवार या किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क नहीं करने देते और जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाते हैं। जब तक पीड़ित को सच्चाई समझ आती है, तब तक लाखों रुपये का नुकसान हो चुका होता है।
बढ़ते मामले चिंता की वजह
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से नवंबर 2024 के बीच देश में डिजिटल अरेस्ट से जुड़े 92,323 मामले दर्ज किए गए, जिनमें लोगों ने करीब 2,140 करोड़ रुपये से ज्यादा गंवाए। साइबर अपराध के कुल मामलों में भी लगातार वृद्धि देखी जा रही है।
NCRB के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में साइबर अपराधों के दर्ज मामलों में करीब 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है, क्योंकि कई लोग शर्म या डर के कारण शिकायत दर्ज नहीं कराते।
बुजुर्ग और आम लोग बन रहे ज्यादा निशाना
डिजिटल अरेस्ट में अपराधी अक्सर बुजुर्गों और ऐसे लोगों को निशाना बनाते हैं, जिन्हें सरकारी जांच प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं होती। हाल के वर्षों में कई बड़े मामले सामने आए हैं। मुंबई में एक 73 वर्षीय व्यक्ति को ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया और करीब 8 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। ऐसे मामलों में अपराधी लोगों के डर का फायदा उठाते हैं। वे जानते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को अचानक कहा जाए कि उसके खिलाफ केस दर्ज है या गिरफ्तारी हो सकती है, तो वह घबरा सकता है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती जांच में पर्याप्त सबूत मिलते हैं तो आरोपितों की संपत्ति फ्रीज करने का कानूनी प्रावधान भी होना चाहिए। अदालत का कहना है कि इससे अपराधियों पर जल्दी कार्रवाई की जा सकेगी और ठगी की रकम को वापस पाने में मदद मिल सकती है।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार डिजिटल अरेस्ट, डीपफेक और अन्य ऑनलाइन अपराधों से निपटने के लिए नए कानून पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून में ऐसे नए अपराधों के लिए विशेष प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। वहीं, अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने बताया कि साइबर अपराधों से जुड़ी कमियों की समीक्षा के लिए एक अंतर-विभागीय समिति काम कर रही है। यह समिति जल्द अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप सकती है।
CBI कर रही बड़े डिजिटल फ्रॉड की जांच
Cyber Security India: सरकार ने अदालत को बताया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) फिलहाल 10 करोड़ रुपये या उससे अधिक की ठगी वाले करीब 20 बड़े डिजिटल फ्रॉड मामलों की जांच कर रही है। इसके अलावा अन्य साइबर अपराधों की जांच राज्य पुलिस द्वारा की जा रही है। सरकार साइबर ठगी रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के साथ मिलकर ऐसी व्यवस्था बनाने पर भी विचार कर रही है, जिससे संदिग्ध बैंक खातों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
लोगों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
- डिजिटल अरेस्ट से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि डर में आकर कोई फैसला न लें।
- कोई भी पुलिस अधिकारी या सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे नहीं मांगती।
- किसी अनजान व्यक्ति को बैंक जानकारी, OTP या निजी जानकारी न दें।
- अगर कोई संदिग्ध कॉल आए तो तुरंत परिवार के लोगों से बात करें।
- साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत करें।
आज देश में करोड़ों लोग डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट और इंटरनेट सुविधाओं ने जीवन आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराध का खतरा भी बढ़ा है। डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों में तकनीक का इस्तेमाल डर पैदा करने के लिए किया जा रहा है। इसलिए कानून में स्पष्ट नियम और सख्त कार्रवाई का प्रावधान होना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से साफ है कि अब डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए पुरानी व्यवस्था काफी नहीं है। बदलते समय के साथ कानून को भी मजबूत बनाना होगा, ताकि आम लोगों को ऑनलाइन ठगी से सुरक्षित रखा जा सके।

