ATF Price Hike: महंगाई ने भरी एक और उड़ान! जेट फ्यूल 5.46% महंगा

Jet Fuel Price : महंगाई का असर अब हवाई सफर पर भी पड़ सकता है। ATF के दाम 5.46% बढ़कर ₹121.28 प्रति लीटर हो गए हैं। अगस्त के बाद यह लगातार दूसरी बढ़ोतरी है, जिससे एयरलाइंस की लागत बढ़ने और हवाई किराए पर दबाव पड़ने की आशंका है।
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जानिए टिकट पर कितना पड़ेगा असर
ATF Price Hike: सितंबर की शुरुआत महंगाई के मोर्चे पर एक और झटका लेकर आई है। देश में कमर्शियल एलपीजी के दाम बढ़ने और कुछ शहरों में सीएनजी तथा पीएनजी महंगे होने के बीच अब विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमत में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने 1 सितंबर 2026 से घरेलू एयरलाइंस के लिए एटीएफ की कीमत 5.46% यानी 6.28 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दी है। इसके बाद दिल्ली में घरेलू उड़ानों के लिए एटीएफ की कीमत 115 रुपये से बढ़कर 121.28 रुपये प्रति लीटर हो गई है। यह लगातार दूसरा महीना है जब घरेलू विमान ईंधन के दाम बढ़े हैं। एटीएफ की इस बढ़ोतरी का असर सीधे विमानन कंपनियों की परिचालन लागत पर पड़ता है। ईंधन एयरलाइंस के सबसे बड़े खर्चों में शामिल है। ऐसे में यदि महंगे ईंधन का बोझ कंपनियां यात्रियों पर डालती हैं तो आने वाले दिनों में हवाई किराए पर भी दबाव देखने को मिल सकता है। हालांकि हर एयरलाइन और हर रूट पर किराए में बढ़ोतरी एक समान हो, यह जरूरी नहीं है।
अगस्त में भी 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ा था एटीएफ
ताजा बढ़ोतरी से पहले 1 अगस्त 2026 को एटीएफ के दाम 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए गए थे। उस समय घरेलू एयरलाइंस के लिए दिल्ली में एटीएफ की कीमत करीब 110 रुपये से बढ़कर 115 रुपये प्रति लीटर हो गई थी। यानी अगस्त और सितंबर की लगातार दो बढ़ोतरी को जोड़ें तो घरेलू विमान ईंधन करीब 11.28 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है। यह बढ़ोतरी इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे कुछ ही महीने पहले एयरलाइंस को ईंधन की कीमतों में राहत मिली थी।
जुलाई में मिली थी 5 रुपये की राहत
1 जुलाई 2026 को घरेलू एयरलाइंस के लिए एटीएफ की कीमत में करीब 5 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी। इसके बाद दिल्ली में प्रभावी कीमत लगभग 110 रुपये प्रति लीटर रह गई थी। यानी जुलाई में मिली राहत ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी और अगस्त से एक बार फिर विमान ईंधन महंगा होने लगा। इससे 2026 में एटीएफ कीमतों के उतार-चढ़ाव का अंदाजा लगाया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और जेट फ्यूल बाजार में बदलाव के साथ घरेलू कीमतों में भी लगातार परिवर्तन देखने को मिला है।
अप्रैल में आया था सबसे बड़ा झटका
इस साल एटीएफ की कीमतों में सबसे असाधारण घटनाक्रम 1 अप्रैल 2026 को देखने को मिला था। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में जेट फ्यूल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया था। सामान्य मासिक मूल्य संशोधन के तहत घरेलू एयरलाइंस के लिए एटीएफ की कीमत में 100% से अधिक की संभावित बढ़ोतरी बन रही थी। ऐसे समय केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप करते हुए घरेलू एयरलाइंस के लिए एटीएफ की कीमत में तत्काल बढ़ोतरी को 25% तक सीमित कर दिया। इसका अर्थ यह नहीं था कि वैश्विक बाजार में कीमत केवल 25%बढ़ी थी, बल्कि सरकार ने घरेलू विमानन क्षेत्र और यात्रियों पर अचानक पड़ने वाले भारी बोझ को सीमित करने के लिए घरेलू एयरलाइंस पर लागू बढ़ोतरी को 25%तक कैप किया था। सरकार के इस कदम से घरेलू विमानन कंपनियों को वैश्विक ईंधन संकट का पूरा तत्काल झटका नहीं झेलना पड़ा। बाद में बाजार की स्थिति सुधरने पर कीमतों में बदलाव भी किए गए।
एटीएफ की कीमतों में 6 महीने का उतार-चढ़ाव
अगर अप्रैल से सितंबर तक का घटनाक्रम देखें तो विमान ईंधन की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव रहा है। अप्रैल में वैश्विक संकट के कारण सरकार को घरेलू एटीएफ बढ़ोतरी पर 25%की सीमा लगानी पड़ी। इसके बाद मई और जून में घरेलू एयरलाइंस के लिए कीमतों में अपेक्षाकृत स्थिरता रही। जुलाई में करीब 5 रुपये प्रति लीटर की कटौती से एयरलाइंस को राहत मिली। लेकिन यह राहत ज्यादा समय नहीं चली। अगस्त में एटीएफ 5 रुपये महंगा हुआ और सितंबर में इसमें 6.28 रुपये प्रति लीटर यानी 5.46% की और वृद्धि कर दी गई। इस तरह जुलाई की कटौती के बाद दो महीनों में घरेलू एटीएफ की कीमत करीब 11.28 रुपये बढ़ चुकी है।
घरेलू सिलेंडर की कीमत स्थिर
1 सितंबर से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में भी बढ़ोतरी की गई है। विभिन्न शहरों में 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत करीब 9.50 रुपये से 11.50 रुपये तक बढ़ी है। इसका सीधा असर होटल, रेस्तरां, ढाबे और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की लागत पर पड़ सकता है। हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 1 सितंबर को नहीं बढ़ाई गई है। इसलिए सितंबर की एलपीजी बढ़ोतरी को घरेलू रसोई गैस की कीमत में वृद्धि बताना सही नहीं होगा। मौजूदा बढ़ोतरी मुख्य रूप से कमर्शियल एलपीजी से संबंधित है।
सीएनजी और पीएनजी के दाम भी कुछ शहरों में बढ़े
ATF Price Hike: सितंबर की शुरुआत में सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में भी शहरवार बदलाव हुआ है। उदाहरण के लिए मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने सीएनजी के दाम 2 रुपये प्रति किलोग्राम और पीएनजी के दाम 1 रुपये प्रति SCM बढ़ाए हैं। दिल्ली में भी सीएनजी की कीमत में बढ़ोतरी की रिपोर्ट सामने आई है। इसलिए यह कहना ज्यादा सही होगा कि सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में देशभर में एक समान बढ़ोतरी नहीं हुई है, बल्कि अलग-अलग गैस वितरण कंपनियों और शहरों में दरें बदली हैं। प्राकृतिक गैस की लागत, आपूर्ति खर्च और स्थानीय परिस्थितियां इन कीमतों को प्रभावित करती हैं।
हवाई यात्रियों पर कितना पड़ेगा असर?
- एटीएफ के महंगे होने से एयरलाइंस की लागत बढ़ती है। कंपनियों के पास इसका असर खुद वहन करने, दूसरी लागतों में कटौती करने या किसी हद तक इसे टिकट कीमतों में शामिल करने जैसे विकल्प होते हैं। इसलिए एटीएफ में 5.46% की बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि हवाई टिकट भी 5.46% महंगे हो जाएंगे।
- हालांकि यदि ईंधन की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो एयरलाइंस के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है। जून में क्रिसिल ने भी कहा था कि अप्रैल से लागू घरेलू एटीएफ बढ़ोतरी की 25%सीमा ने एयरलाइंस को वैश्विक ईंधन कीमतों के तत्काल झटके से कुछ राहत दी थी।
- अब एटीएफ की कीमतों का अगला रुख अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और जेट फ्यूल बाजार की दिशा पर काफी हद तक निर्भर करेगा। यदि वैश्विक ऊर्जा बाजार में तनाव और कीमतें ऊंची रहती हैं तो विमान ईंधन पर आगे भी दबाव बन सकता है।
- वहीं अंतरराष्ट्रीय कीमतों में नरमी आने पर घरेलू एयरलाइंस को राहत मिलने की संभावना रहेगी। कुल मिलाकर सितंबर 2026 की शुरुआत में ईंधन और गैस की कीमतों में कई स्तरों पर बदलाव देखने को मिला है।
- एटीएफ 5.46% बढ़कर 121.28 रुपये प्रति लीटर हो गया है, अगस्त में भी इसमें 5 रुपये की वृद्धि हुई थी, जबकि जुलाई में 5 रुपये की कटौती की गई थी। इससे पहले अप्रैल में वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान सरकार ने घरेलू एयरलाइंस के लिए एटीएफ बढ़ोतरी को 25%तक सीमित किया था।
- दूसरी ओर, कमर्शियल एलपीजी महंगा हुआ है, लेकिन घरेलू 14.2 किलो एलपीजी सिलेंडर की कीमत फिलहाल स्थिर है। सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी भी मुख्य रूप से शहर और कंपनी के अनुसार अलग-अलग है।

