Mumbai Ahmedabad Bullet Train: 2027 में दौड़ सकती है देश की पहली बुलेट ट्रेन

Mumbai Ahmedabad Bullet Train: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में निर्माण कार्य तेज हो गया है। महाराष्ट्र में पुल, सुरंग और एलिवेटेड ट्रैक तैयार किए जा रहे हैं। 2027 में पहले चरण के संचालन का लक्ष्य है।
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ठाणे, विरार और बोइसर समेत 3 एलिवेटेड स्टेशन बनेंगे
Mumbai Ahmedabad Bullet Train: देश की पहली मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल यानी बुलेट ट्रेन परियोजना अब निर्माण के उस दौर में पहुंच गई है, जहां कई बड़े इंजीनियरिंग काम एक साथ आगे बढ़ रहे हैं। करीब 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में महाराष्ट्र, गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली का हिस्सा शामिल है। परियोजना पूरी होने के बाद मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय करीब 1 घंटे 58 मिनट रह जाएगा। ट्रेन की अधिकतम परिचालन गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।
महाराष्ट्र का हिस्सा इस परियोजना के सबसे चुनौतीपूर्ण सेक्शनों में शामिल है। यहां घनी आबादी, पहाड़ी इलाकों, नदियों, हाईवे, मौजूदा रेलवे लाइनों और समुद्री क्षेत्र के नीचे से होकर हाई-स्पीड रेल लाइन गुजर रही है। यही वजह है कि इस हिस्से में वायाडक्ट, पुल और सुरंगों का निर्माण परियोजना की सबसे अहम कड़ियों में माना जा रहा है।
तेजी से बन रहा एलिवेटेड कॉरिडोर
महाराष्ट्र सेक्शन में ठाणे, विरार और बोइसर समेत तीन एलिवेटेड स्टेशन बनाए जा रहे हैं। ठाणे का स्टेशन जमीन से करीब 12 मीटर की ऊंचाई पर प्रस्तावित है। एलिवेटेड ट्रैक का बड़ा हिस्सा वायाडक्ट और पुलों के जरिए तैयार किया जा रहा है। परियोजना की प्रगति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2026 में अब तक वायाडक्ट और पियर निर्माण के काम में काफी तेजी आई है। NHSRCL की जून 2026 की जानकारी के मुताबिक पूरे 508 किलोमीटर कॉरिडोर में 321 किलोमीटर वायाडक्ट और 398 किलोमीटर पियर का काम पूरा हो चुका था। इसके अलावा 17 नदी पुल भी पूरे हो चुके थे। महाराष्ट्र में प्रमुख नदियों को पार करने के लिए भी बड़े पुल बनाए जा रहे हैं। इनमें वैतरणा नदी पर लगभग 2.32 किलोमीटर का पुल, जबकि जगनी और उल्हास नदी पर भी बड़े पुल शामिल हैं। परियोजना के अलग-अलग हिस्सों में हाईवे, नहर और रेलवे लाइन को पार करने के लिए स्टील ब्रिज और अन्य क्रॉसिंग तैयार किए जा रहे हैं। नदी पुलों के निर्माण में इंजीनियरिंग के साथ पर्यावरण और सुरक्षा का भी ध्यान रखा जा रहा है। उदाहरण के तौर पर साबरमती नदी पर बन रहे पुल में पियर की स्थिति इस तरह तय की गई है कि नदी के जलप्रवाह में कम से कम बाधा आए।
7 पहाड़ी सुरंगें
बुलेट ट्रेन का महाराष्ट्र वाला हिस्सा पहाड़ी क्षेत्रों से भी गुजरता है। पालघर जिले में सात माउंटेन टनल बनाई जा रही हैं। 2026 में इन सुरंगों के निर्माण में महत्वपूर्ण उपलब्धियां मिली हैं। जनवरी, फरवरी और जून 2026 में क्रमशः MT-5, MT-6 और MT-7 में ब्रेकथ्रू हासिल किया गया। MT-7 सुरंग की लंबाई 417 मीटर और चौड़ाई 14.4 मीटर है। वहीं MT-6 की लंबाई 454 मीटर है। NHSRCL के अनुसार वापी और बोइसर के बीच तीन पहाड़ी सुरंगों की खुदाई पूरी हो चुकी है। सुरंग निर्माण में सुरक्षा के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग, जियोटेक्निकल इंस्ट्रूमेंट, वेंटिलेशन और फायर सेफ्टी सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य खुदाई के दौरान पहाड़ की स्थिरता, कंपन और आसपास की संरचनाओं पर पड़ने वाले प्रभाव की लगातार निगरानी करना है।
ठाणे क्रीक के नीचे बनेगी देश की पहली अंडरसी रेल टनल
परियोजना का सबसे रोमांचक और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हिस्सा मुंबई में ठाणे क्रीक के नीचे बनने वाली करीब 7 किलोमीटर लंबी अंडरसी टनल है। यह भारत के किसी रेल कॉरिडोर की पहली अंडरसी टनल होगी। कुल 21 किलोमीटर लंबे मुंबई अंडरग्राउंड सेक्शन में से 16 किलोमीटर का निर्माण टनल बोरिंग मशीन यानी TBM से किया जा रहा है। पहली TBM ने जुलाई 2026 में विक्रोली से BKC की दिशा में काम शुरू किया, जबकि दूसरी TBM ने सावली से विक्रोली की ओर खुदाई शुरू की। इस टनल को पूरी तरह वॉटरप्रूफ संरचना के तौर पर डिजाइन किया गया है। पानी के रिसाव को रोकने के लिए डबल-लेयर EPDM गैस्केट और हाइड्रोफिलिक सील का इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही टनल और आसपास के इलाके की सुरक्षा के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए गए हैं।
2027 में पहली बुलेट ट्रेन?
परियोजना को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसकी टाइमलाइन का है। रेलवे की ओर से पहले चरण में गुजरात के सूरत से बिलिमोरा के बीच ट्रेन संचालन शुरू करने का लक्ष्य बताया गया है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से दूसरे हिस्सों को जोड़ा जाना है। पूरी मुंबई-अहमदाबाद लाइन को बाद के चरण में चालू करने का लक्ष्य है। हालांकि, अलग-अलग समय पर परियोजना की समयसीमा को लेकर अलग-अलग बयान सामने आए हैं। इसलिए 15 अगस्त 2027 को पहली बुलेट ट्रेन चलने की संभावना को लक्ष्य/संभावित समयसीमा के तौर पर ही देखना उचित होगा, न कि निश्चित उद्घाटन तारीख के रूप में।
320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बदलेगा सफर
Mumbai Ahmedabad Bullet Train: मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल के शुरू होने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। ट्रेन की अधिकतम गति 320 किमी प्रति घंटा होगी और पूरी यात्रा करीब 1 घंटे 58 मिनट में पूरी होने की योजना है। मौजूदा सड़क और हवाई यात्रा की तुलना में हाई-स्पीड रेल तेज और समयबद्ध इंटर-सिटी कनेक्टिविटी का विकल्प उपलब्ध कराएगी। इस परियोजना का असर केवल यात्रियों की यात्रा तक सीमित नहीं रहने वाला है। NHSRCL के अनुसार कॉरिडोर के आसपास औद्योगिक गतिविधियों, रोजगार, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना अब केवल एक हाई-स्पीड ट्रेन चलाने की योजना नहीं रह गई है, बल्कि यह भारत के लिए नई रेल इंजीनियरिंग तकनीकों का बड़ा परीक्षण भी बन चुकी है। महाराष्ट्र में पहाड़ी सुरंगों से लेकर नदी पुलों और ठाणे क्रीक के नीचे अंडरसी टनल तक, परियोजना के कई हिस्से देश में पहली बार किए जा रहे हैं। 2026 में वायाडक्ट, पियर, पुल और टनल निर्माण में हुई प्रगति से परियोजना को गति मिली है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि निर्माण की यह रफ्तार आगे भी बनी रहती है या नहीं और देश की पहली बुलेट ट्रेन निर्धारित लक्ष्य के मुताबिक 2027 में अपने पहले यात्री सफर पर निकल पाती है या नहीं।

