Ganga Boat Accident: राघोपुर में गंगा की तेज धार में पलटी मजदूरों से भरी नाव, लापता मजदूरों की तलाश जारी

Bihar Flood : नवगछिया के राघोपुर में गंगा की तेज धारा में मजदूरों से भरी नाव पलट गई। कई मजदूर नदी में बह गए। SDRF और गोताखोरों की टीम लापता लोगों की तलाश में जुटी है। हादसे ने बाढ़ के दौरान नाव संचालन में सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
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12 मजदूर तैरकर सुरक्षित बाहर निकले
Ganga Boat Accident: बिहार के भागलपुर जिले के नवगछिया पुलिस जिला क्षेत्र में गंगा नदी की तेज धार के बीच बुधवार को मजदूरों से भरी नाव पलटने से हड़कंप मच गया। हादसा खरीक प्रखंड के राघोपुर इलाके में हुआ, जहां मजदूर नदी पार कर काम के सिलसिले में जा रहे थे। नाव बीच गंगा में पहुंची तो तेज बहाव के कारण अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। नाव के पलटते ही उसमें सवार मजदूर नदी में जा गिरे और मौके पर अफरातफरी मच गई। कई मजदूर तेज धारा में बहने लगे।
प्रारंभिक स्थानीय जानकारी के मुताबिक नाव पर करीब 18 मजदूर सवार थे, जिनमें से 12 मजदूर किसी तरह तैरकर सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे, जबकि छह मजदूरों के लापता होने की बात सामने आई। हालांकि, हादसे के बाद सामने आई अलग-अलग रिपोर्टों में नाव पर सवार लोगों की संख्या और लापता लोगों की संख्या में अंतर है। कुछ बाद की रिपोर्टों में 20 से 22 लोगों के सवार होने और एक-दो लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई है। ऐसे में अंतिम आधिकारिक आंकड़ा प्रशासन की पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगा।
हादसे की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ और गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंची और लापता मजदूरों की तलाश शुरू कर दी गई। तेज बहाव और बाढ़ की स्थिति के कारण रेस्क्यू टीम के सामने भी चुनौती बनी हुई है। स्थानीय ग्रामीण भी बचाव अभियान में सहयोग कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से नदी में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
तटबंध मरम्मत के काम से जुड़ा था मामला
रिपोर्टों के अनुसार राघोपुर इलाके में गंगा के बढ़ते जलस्तर और कटाव के कारण तटबंध की मरम्मत और बाढ़ से बचाव का काम चल रहा था। कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि मजदूर कटावरोधी कार्य के लिए जियो बैग और अन्य सामग्री पहुंचाने के काम में लगे थे। इसी दौरान नाव हादसे का शिकार हो गई। यह इलाका पहले से ही गंगा के बढ़ते जलस्तर और कटाव की समस्या से जूझ रहा है। हाल के दिनों में राघोपुर क्षेत्र में तटबंध को नुकसान पहुंचने और कटाव बढ़ने की खबरें सामने आई थीं। अगस्त 2025 में भी नवगछिया क्षेत्र में गंगा के किनारे तटबंध का करीब 50 से 70 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त होने की रिपोर्ट आई थी। इससे इलाके की संवेदनशीलता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
पहले भी हो चुके हैं नाव हादसे
नवगछिया और भागलपुर के गंगा क्षेत्र में नाव हादसे कोई नई बात नहीं हैं। नवंबर 2020 में नवगछिया के तिनटंगा करारी इलाके में गंगा में नाव पलटने की घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए थे। उसी दौर में भागलपुर में मजदूरों से भरी एक नाव के डूबने की भी खबर सामने आई थी, जिसमें कई लोगों की मौत हुई थी। इन घटनाओं से साफ है कि बाढ़ के मौसम में गंगा की तेज धारा में नाव से मजदूरों और ग्रामीणों का आवागमन कितना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर तब, जब नाव में क्षमता से अधिक लोग या सामान लादा जाए, यात्रियों के पास लाइफ जैकेट न हों और नाविक के पास तेज बहाव में नाव नियंत्रित करने के पर्याप्त इंतजाम न हों।
आखिर ऐसे हादसे क्यों होते हैं?
नदी हादसों के पीछे केवल तेज बहाव को जिम्मेदार मानना पर्याप्त नहीं है। कई बार ओवरलोडिंग, नाव की खराब स्थिति, क्षमता से ज्यादा यात्रियों या सामान को बैठाना, लाइफ जैकेट की कमी, खराब मौसम, तेज धारा और सुरक्षा नियमों की अनदेखी जैसे कारण दुर्घटना का खतरा बढ़ाते हैं। बाढ़ के दौरान नदी का स्वरूप सामान्य दिनों से पूरी तरह बदल जाता है। पानी का वेग बढ़ जाता है, नए कटाव और भंवर बन सकते हैं और पुराने सुरक्षित रास्ते भी खतरनाक हो जाते हैं। इसलिए काम के लिए मजदूरों को नदी पार कराने से पहले जलस्तर, बहाव और मौसम की स्थिति का आकलन बेहद जरूरी है।
हादसों को रोकने के लिए क्या करना चाहिए?
- सबसे पहला नियम यह होना चाहिए कि नाव पर सवार हर व्यक्ति को अनिवार्य रूप से लाइफ जैकेट पहनाई जाए। केवल नाव में लाइफ जैकेट रख देना पर्याप्त नहीं है; नाव रवाना होने से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सभी मजदूर उसे ठीक तरीके से पहन चुके हैं।
- दूसरा, नाव की निर्धारित क्षमता से अधिक लोगों या सामान को नहीं बैठाया जाना चाहिए। नदी में काम करने वाली नावों की नियमित फिटनेस और सुरक्षा जांच होनी चाहिए। नाविक प्रशिक्षित और सक्षम होना चाहिए तथा तेज बहाव और बाढ़ के दौरान नाव चलाने की उसकी क्षमता की जांच होनी चाहिए।
- तीसरा, बाढ़ और अत्यधिक तेज बहाव के समय प्रशासन को संवेदनशील स्थानों पर नावों के परिचालन को अस्थायी रूप से रोकने या नियंत्रित करने की व्यवस्था करनी चाहिए। यदि किसी जरूरी सरकारी या फ्लड-फाइटिंग कार्य के लिए नाव चलाना मजबूरी हो, तो उसके साथ बचाव दल, मोटरबोट, लाइफ जैकेट और अन्य सुरक्षा उपकरण पहले से मौजूद होने चाहिए।
- चौथा, ठेकेदारों और सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। मजदूरों को नदी में भेजने से पहले उनकी सुरक्षा ब्रीफिंग और आपातकालीन प्रशिक्षण होना चाहिए। नाव में मौजूद लोगों की नामवार सूची भी घाट से रवाना होने से पहले दर्ज की जानी चाहिए, ताकि हादसे के बाद यह पता लगाने में समय न लगे कि कितने लोग नाव पर थे।
हादसे से सबक लेने की जरूरत
Ganga Boat Accident: राघोपुर की घटना एक बार फिर बताती है कि बाढ़ और कटाव से निपटने के लिए किए जा रहे काम में भी मजदूरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। तटबंध बचाने की कोशिश में अगर मजदूरों की जान खतरे में पड़ जाए तो व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठते हैं। इस हादसे की पूरी जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि नाव में वास्तव में कितने लोग सवार थे, नाव की क्षमता कितनी थी, क्या सभी मजदूरों के पास लाइफ जैकेट थी, नाव की फिटनेस की जांच हुई थी और तेज बहाव के बावजूद उसे चलाने की अनुमति किस स्तर पर दी गई। गंगा की धारा को नियंत्रित करना संभव नहीं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करके ऐसे हादसों की संभावना जरूर कम की जा सकती है। हर नाव यात्रा से पहले एक छोटा-सा सुरक्षा निरीक्षण, हर मजदूर के लिए लाइफ जैकेट, क्षमता के मुताबिक ही सवारी और बाढ़ के दौरान सख्त निगरानी-ये छोटे कदम कई जिंदगियां बचा सकते हैं। राघोपुर हादसे में भी अब सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता मजदूरों को सुरक्षित तलाशना और उनके परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराना है।

