Siwan Violence AK-47 Firing: सीवान हिंसा में AK-47 की गूंज, भीड़ में फंसे कॉन्स्टेबल ने चलाईं 4 गोलियां

Supreme Court Hearing: सीवान हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने बड़ा खुलासा हुआ है। बिहार पुलिस ने बताया कि पथराव के दौरान भीड़ में फंसे एक कॉन्स्टेबल ने एके-47 से 4 हवाई फायर किए। कॉन्स्टेबल को निलंबित कर दिया गया है, जबकि गोली लगने से घायल तीन प्रदर्शनकारियों के मामले में बैलिस्टिक जांच जारी है।
विषयसूची
फायरिंग करने वाला कॉन्स्टेबल सस्पेंड, सुप्रीम कोर्ट में खुलासा
Siwan Violence AK-47 Firing: बिहार के सीवान में 25 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन और हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल बिहार सरकार के हलफनामे से कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। सरकार ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ में फंसे जिला खुफिया इकाई यानी डीआईयू के एक कॉन्स्टेबल ने अपनी एके-47 से हवा में चार राउंड फायर किए थे। पुलिस का कहना है कि इन गोलियों से कोई घायल नहीं हुआ। घटना के बाद कॉन्स्टेबल को निलंबित कर उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई। पुलिस के मुताबिक, 25 जुलाई 2026 को एआईएसए और आरवाईए से जुड़े प्रदर्शनकारी सीवान के गांधी मैदान में जुटे थे। इसके बाद प्रदर्शनकारी जेपी चौक की ओर मार्च करने लगे। दोपहर करीब 12:30 बजे स्थिति बिगड़ गई और पुलिस के अनुसार प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव शुरू हुआ। पुलिस का दावा है कि इसके बाद मैरवा रोड और गोपालगंज रोड की ओर से आए कुछ लोग भी पथराव में शामिल हो गए। हालात तेजी से बिगड़े और पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछार का इस्तेमाल करना पड़ा।
भीड़ में फंस गया था कॉन्स्टेबल
बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मौके पर मौजूद पुलिस बल कम पड़ने के कारण अलग-अलग जगहों से अतिरिक्त जवान बुलाए गए थे। इसी दौरान जेपी चौक के पास डीआईयू में तैनात एक कॉन्स्टेबल भीड़ में फंस गया। पुलिस के अनुसार, खुद को भीड़ से घिरा देखकर कॉन्स्टेबल ने अपनी एके-47 से हवा में चार गोलियां चलाईं। सरकार ने साफ कहा है कि इन गोलियों से किसी प्रदर्शनकारी के घायल होने की जानकारी नहीं है। हालांकि, एके-47 से फायरिंग को लेकर पुलिस ने कॉन्स्टेबल को निलंबित कर दिया और उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी। हलफनामे में पुलिस ने यह भी बताया कि एके-47 प्लाटून स्तर का हथियार है और इसका इस्तेमाल विशेष परिस्थितियों में किया जाना चाहिए। सामान्य कानून-व्यवस्था की स्थिति में ऐसे हथियार के इस्तेमाल से बचने के निर्देश पहले भी दिए गए हैं। बिहार पुलिस महानिदेशक की ओर से 1 अगस्त को इस संबंध में विस्तृत निर्देश भी जारी किए गए थे। यानी पुलिस ने खुद इस बात को गंभीर माना है कि प्रदर्शन को नियंत्रित करने के दौरान एके-47 का इस्तेमाल क्यों और किन परिस्थितियों में हुआ।
तीन प्रदर्शनकारी गोली लगने से घायल हुए
हलफनामे में फायरिंग की एक दूसरी घटना का भी जिक्र है। पुलिस के मुताबिक, जेपी चौक से करीब डेढ़ से दो किलोमीटर दूर हाथी चौक पर एक सहायक उपनिरीक्षक यानी एएसआई ने भीड़ को पीछे हटाने के लिए अपनी 9 एमएम पिस्तौल से दो राउंड फायर किए। घटनास्थल से .315 बोर के दो और 7.65 एमएम का एक खाली कारतूस मिलने की बात भी पुलिस ने कही है। पुलिस के अनुसार, हिंसा के दौरान तीन प्रदर्शनकारियों को गोली लगने से मामूली चोटें आई थीं। उन्हें पहले सीवान सदर अस्पताल ले जाया गया। बाद में बेहतर इलाज के लिए पटना के मेदांता अस्पताल भेजा गया और इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पुलिस का दावा है कि इन तीनों को लगी चोटें एके-47 की गोलियों से नहीं हुईं। पुलिस के अनुसार, घायल प्रदर्शनकारी उस जगह भी मौजूद नहीं थे जहां कॉन्स्टेबल ने एके-47 से हवा में गोली चलाई थी। लेकिन यह अभी जांच का विषय है। पुलिस ने फायरिंग से जुड़े सवालों का जवाब तलाशने के लिए बैलिस्टिक जांच शुरू कराई है।
बैलिस्टिक जांच से खुलेगा फायरिंग का राज
अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि प्रदर्शनकारियों को लगी गोलियां किस हथियार से चलीं। इसके लिए इस्तेमाल हुए हथियार, गोली चलने की दूरी और फायरिंग के कोण समेत कई पहलुओं की जांच की जा रही है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि तीन प्रदर्शनकारियों को गोली किस हथियार से लगी थी। यानी एके-47 से चार हवाई गोलियां चलने की बात पुलिस ने स्वीकार की है, लेकिन घायल प्रदर्शनकारियों को लगी गोलियों का स्रोत अभी जांच के दायरे में है।
82 लोगों पर केस, 17 गिरफ्तार
बिहार पुलिस ने अपने हलफनामे में बताया कि सीवान की हिंसा में पुलिस अधीक्षक समेत 20 पुलिसकर्मी घायल हुए। इनमें दो एसडीपीओ, दो इंस्पेक्टर, दो सब-इंस्पेक्टर और 13 कॉन्स्टेबल शामिल थे। पुलिस के मुताबिक, हिंसा में पुलिस की दो गाड़ियों और कई ट्रैफिक ट्रॉलियों को भी नुकसान पहुंचा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया और आंसू गैस तथा वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने बताया कि सीवान हिंसा के संबंध में छह एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें कुल 82 लोगों को आरोपी बनाया गया, जबकि 17 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। मामले की जांच अभी जारी है।
सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने क्या कहा?
Siwan Violence AK-47 Firing: बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुलिस पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक या असंगत बल प्रयोग के आरोपों से इनकार किया है। सरकार का कहना है कि अलग-अलग जगहों पर हिंसक स्थिति बनने के बाद पुलिस ने परिस्थितियों के अनुसार कार्रवाई की। लेकिन सीवान में एके-47 से फायरिंग की घटना ने सवाल जरूर खड़े किए हैं। खास बात यह है कि जिस कॉन्स्टेबल ने एके-47 चलाई, उसी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई है। 18 अगस्त की रिपोर्टों में यह मामला इसलिए प्रमुखता से सामने आया क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाबी हलफनामे ने पहली बार फायरिंग की पूरी जानकारी सार्वजनिक की।
सीवान में 25 जुलाई को हुई हिंसा के दौरान एक पुलिस कॉन्स्टेबल ने भीड़ में फंसने के बाद एके-47 से हवा में चार गोलियां चलाई थीं-यह बात बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताई है। पुलिस का दावा है कि इन गोलियों से कोई घायल नहीं हुआ। फिर भी कॉन्स्टेबल को निलंबित कर दिया गया है। दूसरी ओर, तीन प्रदर्शनकारियों के गोली लगने से घायल होने का मामला अभी पूरी तरह साफ नहीं है और इसकी बैलिस्टिक जांच चल रही है। इसलिए फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है-एके-47 से चली चार गोलियां किस परिस्थिति में चलीं और घायल प्रदर्शनकारियों को लगी गोलियां आखिर किस हथियार से निकलीं? इसका अंतिम जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिलेगा।

