
Teen Relationships: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर सहमति वाले किशोर प्रेम संबंध को पॉक्सो अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने कानून के संभावित दुरुपयोग, किशोरों के भविष्य और संतुलित कानूनी दृष्टिकोण की जरूरत पर गंभीर चिंता जताई।

Teen Relationships: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर सहमति वाले किशोर प्रेम संबंध को पॉक्सो अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने कानून के संभावित दुरुपयोग, किशोरों के भविष्य और संतुलित कानूनी दृष्टिकोण की जरूरत पर गंभीर चिंता जताई।

Bharat Bhushan Tiwari Encounter Case : भोजपुर के भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर ने बिहार की राजनीति और पुलिस व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है, जबकि न्यायिक जांच और वायरल वीडियो नए सवाल खड़े कर रहे हैं।

Bharat Bhushan Tiwari Encounter Case : भोजपुर के भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर ने बिहार की राजनीति और पुलिस व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है, जबकि न्यायिक जांच और वायरल वीडियो नए सवाल खड़े कर रहे हैं।

MaternityLeave : अदालत ने अपीलकर्ता को 30–31 मई को होने वाले एशियाई खेल 2026 के चयन ट्रायल्स में भाग लेने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने साफ कहा कि डब्ल्यूएफआई की नीति और सर्कुलर भेदभावपूर्ण हैं, क्योंकि वे मातृत्व अवकाश के बाद वापसी करने वाली दिग्गज खिलाड़ियों को मौका देने का अधिकार ही नहीं देते। हाई कोर्ट ने डब्ल्यूएफआई की टिप्पणी को दुर्भावनापूर्ण और पक्षपातपूर्ण करार दिया।

MaternityLeave : अदालत ने अपीलकर्ता को 30–31 मई को होने वाले एशियाई खेल 2026 के चयन ट्रायल्स में भाग लेने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने साफ कहा कि डब्ल्यूएफआई की नीति और सर्कुलर भेदभावपूर्ण हैं, क्योंकि वे मातृत्व अवकाश के बाद वापसी करने वाली दिग्गज खिलाड़ियों को मौका देने का अधिकार ही नहीं देते। हाई कोर्ट ने डब्ल्यूएफआई की टिप्पणी को दुर्भावनापूर्ण और पक्षपातपूर्ण करार दिया।

Supreme Court: देश की अदालतों में लंबे समय से लंबित मामलों और फैसलों में हो रही देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। इसी को देखते हुए शीर्ष अदालत ने देश के सभी हाईकोर्ट्स के लिए नए और जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नियमों का मकसद लोगों को समय पर न्याय दिलाना और अदालतों की प्रक्रिया को तेज बनाना है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर किसी मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा जाता है, तो उसे ज्यादा से ज्यादा तीन महीने के भीतर सुनाना जरूरी होगा। कोर्ट का मानना है

Supreme Court: देश की अदालतों में लंबे समय से लंबित मामलों और फैसलों में हो रही देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। इसी को देखते हुए शीर्ष अदालत ने देश के सभी हाईकोर्ट्स के लिए नए और जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नियमों का मकसद लोगों को समय पर न्याय दिलाना और अदालतों की प्रक्रिया को तेज बनाना है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर किसी मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा जाता है, तो उसे ज्यादा से ज्यादा तीन महीने के भीतर सुनाना जरूरी होगा। कोर्ट का मानना है

Supreme Court on SIR: बिहार की राजनीति और चुनावी माहौल के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा शुरू की गई मतदाता सूची की “विशेष गहन पुनरीक्षण” यानी SIR प्रक्रिया को सही और कानूनी बताया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब बिहार में वोटर लिस्ट की जांच और अपडेट का काम जारी रहेगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ कहा कि सिर्फ इसलिए इस प्रक्रिया को अवैध नहीं कहा जा सकता क्योंकि यह सामान्य वोटर लिस्ट अपडेट प्रक्रिया से अलग है। अदालत ने माना कि चुनाव

Supreme Court on SIR: बिहार की राजनीति और चुनावी माहौल के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा शुरू की गई मतदाता सूची की “विशेष गहन पुनरीक्षण” यानी SIR प्रक्रिया को सही और कानूनी बताया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब बिहार में वोटर लिस्ट की जांच और अपडेट का काम जारी रहेगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ कहा कि सिर्फ इसलिए इस प्रक्रिया को अवैध नहीं कहा जा सकता क्योंकि यह सामान्य वोटर लिस्ट अपडेट प्रक्रिया से अलग है। अदालत ने माना कि चुनाव

Supreme Court on Stray Dogs: देशभर में लंबे समय से चर्चा का विषय बने आवारा कुत्तों के मामले पर आज मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया। अदालत ने डॉग लवर्स और पशु अधिकार संगठनों को बड़ा झटका देते हुए उनकी सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने अपने नवंबर 2025 के उस आदेश में किसी भी तरह की ढील देने से साफ इनकार कर दिया, जिसमें अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसी सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बेहद सख्त टिप्पणी

Supreme Court on Stray Dogs: देशभर में लंबे समय से चर्चा का विषय बने आवारा कुत्तों के मामले पर आज मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया। अदालत ने डॉग लवर्स और पशु अधिकार संगठनों को बड़ा झटका देते हुए उनकी सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने अपने नवंबर 2025 के उस आदेश में किसी भी तरह की ढील देने से साफ इनकार कर दिया, जिसमें अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसी सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बेहद सख्त टिप्पणी

Pawan Khera: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उन्हें असम में दर्ज एक मामले में अग्रिम जमानत देते हुए साफ कहा कि किसी भी नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को हल्के में नहीं लिया जा सकता। जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। असम के सीएम की पत्नी से जुड़ा है मामला यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा को लेकर दिए गए कथित बयान से जुड़ा है। पवन खेड़ा पर आरोप है

Pawan Khera: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उन्हें असम में दर्ज एक मामले में अग्रिम जमानत देते हुए साफ कहा कि किसी भी नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को हल्के में नहीं लिया जा सकता। जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। असम के सीएम की पत्नी से जुड़ा है मामला यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा को लेकर दिए गए कथित बयान से जुड़ा है। पवन खेड़ा पर आरोप है

Supreme Court on Malda Incident: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों के साथ हुई बदसलूकी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जानकारी के अनुसार, ड्यूटी पर पहुंचे 7 न्यायिक अधिकारियों, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल थीं. उन सभी को स्थानीय स्तर पर विरोध और अव्यवस्था के बीच घंटों तक रोके रखा गया। इस दौरान उन्हें न तो पर्याप्त सुरक्षा मिली और न ही भोजन-पानी की व्यवस्था हो सकी। अधिकारियों को राने-धमकाने का आरोप बताया गया है कि अधिकारियों को उनके काम के दौरान ही घेर लिया गया और डराने-धमकाने की स्थिति बन गई, जिससे

Supreme Court on Malda Incident: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों के साथ हुई बदसलूकी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जानकारी के अनुसार, ड्यूटी पर पहुंचे 7 न्यायिक अधिकारियों, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल थीं. उन सभी को स्थानीय स्तर पर विरोध और अव्यवस्था के बीच घंटों तक रोके रखा गया। इस दौरान उन्हें न तो पर्याप्त सुरक्षा मिली और न ही भोजन-पानी की व्यवस्था हो सकी। अधिकारियों को राने-धमकाने का आरोप बताया गया है कि अधिकारियों को उनके काम के दौरान ही घेर लिया गया और डराने-धमकाने की स्थिति बन गई, जिससे

Harish Rana Funeral: एक लंबा इंतजार, अनगिनत उम्मीदें और आखिरकार एक शांत विदाई. 13 साल तक कोमा में जिंदगी से जूझते रहे हरीश राणा को आज बुधवार की सुबह अंतिम विदाई दे दी गई। दिल्ली के ग्रीन पार्क में सुबह उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां हरीश को अंतिम विदाई देते हुए परिवार और करीबियों की आंखें नम हो गयी। सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला- इच्छामृत्यु मालूम हो 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए हरीश राणा को इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी.13 वर्षों तक इलाज और उम्मीद के बाद जब कोई सुधार नहीं हुआ, तो

Harish Rana Funeral: एक लंबा इंतजार, अनगिनत उम्मीदें और आखिरकार एक शांत विदाई. 13 साल तक कोमा में जिंदगी से जूझते रहे हरीश राणा को आज बुधवार की सुबह अंतिम विदाई दे दी गई। दिल्ली के ग्रीन पार्क में सुबह उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां हरीश को अंतिम विदाई देते हुए परिवार और करीबियों की आंखें नम हो गयी। सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला- इच्छामृत्यु मालूम हो 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए हरीश राणा को इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी.13 वर्षों तक इलाज और उम्मीद के बाद जब कोई सुधार नहीं हुआ, तो

Elvish Yadav: मशहूर यूट्यूबर एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज सांपों के जहर से जुड़े केस को खत्म कर दिया है, जिससे उन्हें लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद से राहत मिल गई है। क्या है पूरा मामला ? मालूम हो यह मामला साल 2023 का है, जब नोएडा पुलिस ने एल्विश यादव समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि पार्टियों में सांपों के जहर का इस्तेमाल किया जाता था और इसके लिए अवैध तरीके से सांपों की तस्करी की जाती थी। इस मामले ने

Elvish Yadav: मशहूर यूट्यूबर एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज सांपों के जहर से जुड़े केस को खत्म कर दिया है, जिससे उन्हें लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद से राहत मिल गई है। क्या है पूरा मामला ? मालूम हो यह मामला साल 2023 का है, जब नोएडा पुलिस ने एल्विश यादव समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि पार्टियों में सांपों के जहर का इस्तेमाल किया जाता था और इसके लिए अवैध तरीके से सांपों की तस्करी की जाती थी। इस मामले ने

Period Leave: कामकाजी महिलाओं और छात्राओं को मासिक धर्म के दौरान छुट्टी देने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सुनवाई से इंकार कर दिया है। अदालत का कहना है कि इस मुद्दे पर सीधे कानून बनाने से पहले इसके सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है। मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अगर कोई कंपनी या संस्था अपनी इच्छा से महिलाओं को पीरियड्स के दौरान छुट्टी दे रही है तो यह अच्छी पहल है। लेकिन इसे कानून के रूप में अनिवार्य कर देने से कुछ दूसरी समस्याएं

Period Leave: कामकाजी महिलाओं और छात्राओं को मासिक धर्म के दौरान छुट्टी देने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सुनवाई से इंकार कर दिया है। अदालत का कहना है कि इस मुद्दे पर सीधे कानून बनाने से पहले इसके सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है। मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अगर कोई कंपनी या संस्था अपनी इच्छा से महिलाओं को पीरियड्स के दौरान छुट्टी दे रही है तो यह अच्छी पहल है। लेकिन इसे कानून के रूप में अनिवार्य कर देने से कुछ दूसरी समस्याएं

Harish Rana: गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज एम्पायर सोसाइटी में रहने वाले हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मृत्यु की मंजूरी मिलने के बाद पूरे परिवार का माहौल बेहद भावुक हो गया है। हरीश के माता-पिता अपने बेटे को बार-बार नम आंखों से निहार रहे हैं। पड़ोसियों का कहना है कि भले ही हरीश पिछले 13 साल से कोमा में थे, लेकिन परिवार के पास तो थे। लेकिन अब यह साथ भी शायद कुछ ही दिनों का रह गया है। बेटे पर प्यार लूटा रहे माता-पिता हरीश के पिता अशोक राणा ने फिलहाल मीडिया से दूरी बना रखी

Harish Rana: गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज एम्पायर सोसाइटी में रहने वाले हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मृत्यु की मंजूरी मिलने के बाद पूरे परिवार का माहौल बेहद भावुक हो गया है। हरीश के माता-पिता अपने बेटे को बार-बार नम आंखों से निहार रहे हैं। पड़ोसियों का कहना है कि भले ही हरीश पिछले 13 साल से कोमा में थे, लेकिन परिवार के पास तो थे। लेकिन अब यह साथ भी शायद कुछ ही दिनों का रह गया है। बेटे पर प्यार लूटा रहे माता-पिता हरीश के पिता अशोक राणा ने फिलहाल मीडिया से दूरी बना रखी

Harish Rana: सुप्रीम कोर्ट ने आज बुधवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 32 साल के हरीश राणा को इच्छा मृत्यु की इजाजत दे दी। भारत में सर्वोच्च अदालत ने पहली बार इस तरह का फैसला दिया है। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने यह ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए दिल्ली के एम्स (AIIMS) को निर्देश दिया है कि हरीश राणा को तुरंत भर्ती किया जाए और लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने की प्रक्रिया के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएं। 13 सालों से कोमा जैसी स्थिति में हैं हरीश आपको बता दें कि हरीश राणा पिछले

Harish Rana: सुप्रीम कोर्ट ने आज बुधवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 32 साल के हरीश राणा को इच्छा मृत्यु की इजाजत दे दी। भारत में सर्वोच्च अदालत ने पहली बार इस तरह का फैसला दिया है। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने यह ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए दिल्ली के एम्स (AIIMS) को निर्देश दिया है कि हरीश राणा को तुरंत भर्ती किया जाए और लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने की प्रक्रिया के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएं। 13 सालों से कोमा जैसी स्थिति में हैं हरीश आपको बता दें कि हरीश राणा पिछले

Harish Rana Case: सुप्रीम कोर्ट ने आज बुधवार को एक बेहद संवेदनशील मामले में अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने 31 वर्षीय हरीश राणा के परिवार को उनके लाइफ-सस्टेनिंग ट्रीटमेंट को वापस लेने की अनुमति दे दी है। सरल शब्दों में कहे तो हरीश राणा की इच्छामृत्यु को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी है. यह फैसला सुनाते समय कोर्ट की पीठ भी भावुक नजर आई। दरअसल, हरीश राणा के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अनुरोध किया था कि उन्हें हरीश का इलाज जारी रखने वाले उपकरण हटाने की अनुमति दी जाए। परिवार का कहना था कि हरीश

Harish Rana Case: सुप्रीम कोर्ट ने आज बुधवार को एक बेहद संवेदनशील मामले में अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने 31 वर्षीय हरीश राणा के परिवार को उनके लाइफ-सस्टेनिंग ट्रीटमेंट को वापस लेने की अनुमति दे दी है। सरल शब्दों में कहे तो हरीश राणा की इच्छामृत्यु को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी है. यह फैसला सुनाते समय कोर्ट की पीठ भी भावुक नजर आई। दरअसल, हरीश राणा के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अनुरोध किया था कि उन्हें हरीश का इलाज जारी रखने वाले उपकरण हटाने की अनुमति दी जाए। परिवार का कहना था कि हरीश

Covid Vaccine Case: कोविड-19 महामारी के दौरान देशभर में बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया गया था. इस दौरान देशभर में करोड़ों लोगों ने कोरोना वायरस से बचाव के लिए वैक्सीन लिया था। समय के साथ अब कुछ मामलों में वैक्सीन के कथित दुष्प्रभावों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसी से जुड़ी एक अहम याचिका पर आज मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें वैक्सीन के दुष्परिणामों के कारण हुई कथित मौतों के मामलों में मुआवजे की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए टीकाकरण के

Covid Vaccine Case: कोविड-19 महामारी के दौरान देशभर में बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया गया था. इस दौरान देशभर में करोड़ों लोगों ने कोरोना वायरस से बचाव के लिए वैक्सीन लिया था। समय के साथ अब कुछ मामलों में वैक्सीन के कथित दुष्प्रभावों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसी से जुड़ी एक अहम याचिका पर आज मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें वैक्सीन के दुष्परिणामों के कारण हुई कथित मौतों के मामलों में मुआवजे की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए टीकाकरण के

Supreme Court on Freebies: गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की एक अहम टिप्पणी ने देश में चल रही मुफ्त योजनाओं की बहस को फिर से तेज कर दिया। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि कई राज्य पहले से ही भारी कर्ज और घाटे में हैं, इसके बावजूद वे मुफ्त योजनाएं बांट रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर इसका खर्च कौन उठाएगा? अदालत का कहना है कि यह बोझ आखिरकार टैक्स देने वाले लोगों पर ही आता है। यह टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि सरकारों

Supreme Court on Freebies: गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की एक अहम टिप्पणी ने देश में चल रही मुफ्त योजनाओं की बहस को फिर से तेज कर दिया। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि कई राज्य पहले से ही भारी कर्ज और घाटे में हैं, इसके बावजूद वे मुफ्त योजनाएं बांट रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर इसका खर्च कौन उठाएगा? अदालत का कहना है कि यह बोझ आखिरकार टैक्स देने वाले लोगों पर ही आता है। यह टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि सरकारों

Ghooskhor Pandit Film: मनोरंजन जगत में अक्सर फिल्में अपने विषय या कहानी को लेकर चर्चा में आती हैं, लेकिन इस बार विवाद का केंद्र फिल्म का शीर्षक बन गया है। अभिनेता मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने फिल्म निर्माता नीरज पांडे से सवाल किया है कि ऐसा शीर्षक क्यों चुना गया, जो समाज के एक हिस्से को बदनाम करता प्रतीत होता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक बदले हुए शीर्षक की जानकारी नहीं दी जाती, तब तक फिल्म की रिलीज की अनुमति नहीं

Ghooskhor Pandit Film: मनोरंजन जगत में अक्सर फिल्में अपने विषय या कहानी को लेकर चर्चा में आती हैं, लेकिन इस बार विवाद का केंद्र फिल्म का शीर्षक बन गया है। अभिनेता मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने फिल्म निर्माता नीरज पांडे से सवाल किया है कि ऐसा शीर्षक क्यों चुना गया, जो समाज के एक हिस्से को बदनाम करता प्रतीत होता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक बदले हुए शीर्षक की जानकारी नहीं दी जाती, तब तक फिल्म की रिलीज की अनुमति नहीं

Supreme Court Missing Children Case: देश में बच्चों के लापता होने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हर रोज अखबारों और न्यूज चैनलों पर ऐसी खबरें देखने को मिलती हैं जहां माता-पिता अपने बच्चों को ढूंढते हुए परेशान नजर आते हैं। इस गंभीर मुद्दे को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने केंद्र सरकार को साफ निर्देश दिए हैं कि वह पता लगाए कि क्या इन घटनाओं के पीछे कोई बड़ा राष्ट्रव्यापी नेटवर्क काम कर रहा है या फिर यह अलग-अलग घटनाएं हैं। सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख जस्टिस बीवी नागरत्ना

Supreme Court Missing Children Case: देश में बच्चों के लापता होने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हर रोज अखबारों और न्यूज चैनलों पर ऐसी खबरें देखने को मिलती हैं जहां माता-पिता अपने बच्चों को ढूंढते हुए परेशान नजर आते हैं। इस गंभीर मुद्दे को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने केंद्र सरकार को साफ निर्देश दिए हैं कि वह पता लगाए कि क्या इन घटनाओं के पीछे कोई बड़ा राष्ट्रव्यापी नेटवर्क काम कर रहा है या फिर यह अलग-अलग घटनाएं हैं। सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख जस्टिस बीवी नागरत्ना

देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक वकील ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के सामने अपने साथ अदालत परिसर में हुई मारपीट की शिकायत की है। इस गंभीर मामले को लेकर सीजेआई ने सख्त रुख अपनाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास शिकायत दर्ज कराने का आदेश दिया है। यह घटना न्याय व्यवस्था में बढ़ती अराजकता और अदालतों में सुरक्षा की कमी को दर्शाती है। कोर्ट में वकील के साथ हुई मारपीट यह घटना 7 फरवरी को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में घटी। वकील ने सुप्रीम कोर्ट में बताया

देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक वकील ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के सामने अपने साथ अदालत परिसर में हुई मारपीट की शिकायत की है। इस गंभीर मामले को लेकर सीजेआई ने सख्त रुख अपनाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास शिकायत दर्ज कराने का आदेश दिया है। यह घटना न्याय व्यवस्था में बढ़ती अराजकता और अदालतों में सुरक्षा की कमी को दर्शाती है। कोर्ट में वकील के साथ हुई मारपीट यह घटना 7 फरवरी को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में घटी। वकील ने सुप्रीम कोर्ट में बताया

देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक अहम मामले की सुनवाई टल गई। मेटा प्लेटफॉर्म्स और व्हाट्सएप ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग यानी कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया के उस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसमें उन पर प्राइवेसी पॉलिसी के मामले में 213.14 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया गया था। इस मामले की सुनवाई अब 23 फरवरी को होगी। यह मामला सिर्फ एक कानूनी विवाद नहीं है, बल्कि यह डिजिटल दुनिया में लोगों की निजता और बड़ी तकनीकी कंपनियों की जिम्मेदारी से जुड़ा एक गंभीर सवाल है। करोड़ों भारतीय व्हाट्सएप का इस्तेमाल करते हैं

देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक अहम मामले की सुनवाई टल गई। मेटा प्लेटफॉर्म्स और व्हाट्सएप ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग यानी कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया के उस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसमें उन पर प्राइवेसी पॉलिसी के मामले में 213.14 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया गया था। इस मामले की सुनवाई अब 23 फरवरी को होगी। यह मामला सिर्फ एक कानूनी विवाद नहीं है, बल्कि यह डिजिटल दुनिया में लोगों की निजता और बड़ी तकनीकी कंपनियों की जिम्मेदारी से जुड़ा एक गंभीर सवाल है। करोड़ों भारतीय व्हाट्सएप का इस्तेमाल करते हैं

Mamata Banerjee in Supreme Court Over SIR: राजधानी नई दिल्ली में आज सुप्रीम कोर्ट एक बार फिर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करने जा रहा है। यह मामला राज्य में चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे विशेष गहन संशोधन यानी SIR से जुड़ा है। पिछले हफ्ते मुख्यमंत्री खुद अदालत में पेश हुई थीं और चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी शिकायतें रखी थीं। आज चुनाव आयोग अपना जवाब पेश करेगा और इस पर सुप्रीम कोर्ट अहम फैसला ले सकता है। पिछली सुनवाई में क्या हुआ था पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट में एक ऐतिहासिक घटना देखने को

Mamata Banerjee in Supreme Court Over SIR: राजधानी नई दिल्ली में आज सुप्रीम कोर्ट एक बार फिर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करने जा रहा है। यह मामला राज्य में चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे विशेष गहन संशोधन यानी SIR से जुड़ा है। पिछले हफ्ते मुख्यमंत्री खुद अदालत में पेश हुई थीं और चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी शिकायतें रखी थीं। आज चुनाव आयोग अपना जवाब पेश करेगा और इस पर सुप्रीम कोर्ट अहम फैसला ले सकता है। पिछली सुनवाई में क्या हुआ था पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट में एक ऐतिहासिक घटना देखने को

DA Arrears Protest: पश्चिम बंगाल में एक बार फिर महंगाई भत्ते यानी DA को लेकर सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्पष्ट आदेश दिए जाने के बावजूद राज्य सरकार द्वारा 25 प्रतिशत बकाया डीए का भुगतान न किए जाने से कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। इसी नाराजगी ने संघर्षशील संयुक्त मंच को एक बार फिर सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया। संघर्षशील संयुक्त मंच के आह्वान पर हजारों कर्मचारी कोलकाता की सड़कों पर उतरे। यह सुबोध मल्लिक स्क्वायर से शुरू होकर धर्मतला के रानी रसमणि एवेन्यू तक पहुंचा। हाथों में

DA Arrears Protest: पश्चिम बंगाल में एक बार फिर महंगाई भत्ते यानी DA को लेकर सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्पष्ट आदेश दिए जाने के बावजूद राज्य सरकार द्वारा 25 प्रतिशत बकाया डीए का भुगतान न किए जाने से कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। इसी नाराजगी ने संघर्षशील संयुक्त मंच को एक बार फिर सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया। संघर्षशील संयुक्त मंच के आह्वान पर हजारों कर्मचारी कोलकाता की सड़कों पर उतरे। यह सुबोध मल्लिक स्क्वायर से शुरू होकर धर्मतला के रानी रसमणि एवेन्यू तक पहुंचा। हाथों में

Bihar Election 2025: बिहार की राजनीति में हलचल मचाने वाली जनसुराज पार्टी को शुक्रवार को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब सुप्रीम कोर्ट ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को रद्द करने की मांग पर सुनवाई से साफ इनकार कर दिया। जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर की ओर से दायर याचिका पर अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चुनाव रद्द करने की मांग इस स्तर पर उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद न सिर्फ जनसुराज पार्टी की रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं, बल्कि यह फैसला आने वाले दिनों में बिहार की सियासत की दिशा

Bihar Election 2025: बिहार की राजनीति में हलचल मचाने वाली जनसुराज पार्टी को शुक्रवार को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब सुप्रीम कोर्ट ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को रद्द करने की मांग पर सुनवाई से साफ इनकार कर दिया। जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर की ओर से दायर याचिका पर अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चुनाव रद्द करने की मांग इस स्तर पर उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद न सिर्फ जनसुराज पार्टी की रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं, बल्कि यह फैसला आने वाले दिनों में बिहार की सियासत की दिशा

West Bengal DA Case Supreme Court: पश्चिम बंगाल के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। वर्षों से लंबित महंगाई भत्ते को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में आखिरकार अदालत ने कर्मचारियों के पक्ष में साफ और सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महंगाई भत्ता किसी सरकार की मर्जी पर निर्भर सुविधा नहीं, बल्कि कर्मचारियों का संवैधानिक और कानूनी अधिकार है। न्यायमूर्ति संजय करोल की अध्यक्षता वाली पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया है कि वह बकाया महंगाई भत्ते का 25

West Bengal DA Case Supreme Court: पश्चिम बंगाल के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। वर्षों से लंबित महंगाई भत्ते को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में आखिरकार अदालत ने कर्मचारियों के पक्ष में साफ और सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महंगाई भत्ता किसी सरकार की मर्जी पर निर्भर सुविधा नहीं, बल्कि कर्मचारियों का संवैधानिक और कानूनी अधिकार है। न्यायमूर्ति संजय करोल की अध्यक्षता वाली पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया है कि वह बकाया महंगाई भत्ते का 25

सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी की आवाज Mamata Banerjee In The Supreme Court Summarised: बुधवार का दिन भारतीय राजनीति के लिए खास बन गया जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद सुप्रीम कोर्ट में खड़ी हुईं और चुनाव आयोग की विशेष मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। आम नागरिक की तरह काले कोट और सफेद साड़ी में वह अदालत के पिछले हिस्से में बैठीं, करीब दो घंटे तक इंतजार किया और फिर जब उन्हें बोलने का मौका मिला तो उन्होंने अपनी बात खुलकर रखी। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोगों के साथ बहुत बड़ा अन्याय हो रहा है

सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी की आवाज Mamata Banerjee In The Supreme Court Summarised: बुधवार का दिन भारतीय राजनीति के लिए खास बन गया जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद सुप्रीम कोर्ट में खड़ी हुईं और चुनाव आयोग की विशेष मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। आम नागरिक की तरह काले कोट और सफेद साड़ी में वह अदालत के पिछले हिस्से में बैठीं, करीब दो घंटे तक इंतजार किया और फिर जब उन्हें बोलने का मौका मिला तो उन्होंने अपनी बात खुलकर रखी। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोगों के साथ बहुत बड़ा अन्याय हो रहा है

ममता बनर्जी का ऐतिहासिक कदम: खुद वकील बनकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं बुधवार का दिन भारतीय न्यायिक इतिहास में एक खास दिन के रूप में दर्ज हो गया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक अनोखा कदम उठाते हुए खुद वकील के रूप में सुप्रीम कोर्ट में पेश होकर अपने राज्य की तरफ से दलीलें पेश कीं। यह पहली बार था जब कोई सिटिंग मुख्यमंत्री वकील बनकर देश की सबसे बड़ी अदालत में पैरवी करने पहुंची। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को बंगाल के खिलाफ एक बड़ी साजिश बताया। उनका

ममता बनर्जी का ऐतिहासिक कदम: खुद वकील बनकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं बुधवार का दिन भारतीय न्यायिक इतिहास में एक खास दिन के रूप में दर्ज हो गया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक अनोखा कदम उठाते हुए खुद वकील के रूप में सुप्रीम कोर्ट में पेश होकर अपने राज्य की तरफ से दलीलें पेश कीं। यह पहली बार था जब कोई सिटिंग मुख्यमंत्री वकील बनकर देश की सबसे बड़ी अदालत में पैरवी करने पहुंची। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को बंगाल के खिलाफ एक बड़ी साजिश बताया। उनका

Mamata Banerjee Supreme Court: भारत की राजनीति में कुछ पल ऐसे होते हैं, जो केवल कानूनी लड़ाई नहीं रहते, बल्कि लोकतंत्र के बड़े सवाल बन जाते हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचना भी कुछ ऐसा ही क्षण है। यह सिर्फ एक रिट याचिका नहीं, बल्कि मतदाता अधिकार, संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक भरोसे से जुड़ा मामला बन चुका है। ममता बनर्जी ने भारत निर्वाचन आयोग के खिलाफ सीधे सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। खास बात यह रही कि वह सिर्फ याचिकाकर्ता नहीं रहीं, बल्कि सुनवाई के दौरान

Mamata Banerjee Supreme Court: भारत की राजनीति में कुछ पल ऐसे होते हैं, जो केवल कानूनी लड़ाई नहीं रहते, बल्कि लोकतंत्र के बड़े सवाल बन जाते हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचना भी कुछ ऐसा ही क्षण है। यह सिर्फ एक रिट याचिका नहीं, बल्कि मतदाता अधिकार, संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक भरोसे से जुड़ा मामला बन चुका है। ममता बनर्जी ने भारत निर्वाचन आयोग के खिलाफ सीधे सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। खास बात यह रही कि वह सिर्फ याचिकाकर्ता नहीं रहीं, बल्कि सुनवाई के दौरान

Mamta Banerjee: देश की सर्वोच्च अदालत में आज एक असाधारण दृश्य देखने को मिला, जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में वकील बनकर पहुंचीं. यह पहली बार हो रहा है जब कोई मौजूदा मुख्यमंत्री शीर्ष अदालत में खुद कानूनी दलीलें देने आई हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में वकील की हैसियत से वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर अपनी आपत्तियां रखने पहुंचीं हैं। सुप्रीम कोर्ट में इस समय पश्चिम बंगाल में चल रहे एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर सुनवाई चल रही है। ममता बनर्जी इस प्रक्रिया को असंवैधानिक और अपारदर्शी बताते

Mamta Banerjee: देश की सर्वोच्च अदालत में आज एक असाधारण दृश्य देखने को मिला, जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में वकील बनकर पहुंचीं. यह पहली बार हो रहा है जब कोई मौजूदा मुख्यमंत्री शीर्ष अदालत में खुद कानूनी दलीलें देने आई हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में वकील की हैसियत से वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर अपनी आपत्तियां रखने पहुंचीं हैं। सुप्रीम कोर्ट में इस समय पश्चिम बंगाल में चल रहे एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर सुनवाई चल रही है। ममता बनर्जी इस प्रक्रिया को असंवैधानिक और अपारदर्शी बताते

Supreme Court Meta WhatsApp Case: भारत में डिजिटल निजता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि तकनीक के नाम पर आम नागरिकों के अधिकारों से समझौता नहीं किया जा सकता। मेटा और व्हाट्सऐप के खिलाफ चल रहे डेटा शेयरिंग मामले में सर्वोच्च अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई भी कंपनी देश के कानूनों को नजरअंदाज कर यहां कारोबार नहीं कर सकती। अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर भारत के नियम मंजूर नहीं हैं, तो ऐसी कंपनियों के लिए देश छोड़ने का विकल्प खुला है। यह मामला तब चर्चा

Supreme Court Meta WhatsApp Case: भारत में डिजिटल निजता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि तकनीक के नाम पर आम नागरिकों के अधिकारों से समझौता नहीं किया जा सकता। मेटा और व्हाट्सऐप के खिलाफ चल रहे डेटा शेयरिंग मामले में सर्वोच्च अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई भी कंपनी देश के कानूनों को नजरअंदाज कर यहां कारोबार नहीं कर सकती। अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर भारत के नियम मंजूर नहीं हैं, तो ऐसी कंपनियों के लिए देश छोड़ने का विकल्प खुला है। यह मामला तब चर्चा

देश की सर्वोच्च अदालत ने शुक्रवार 30 जनवरी को एक ऐसा फैसला सुनाया है जो लाखों स्कूली छात्राओं के जीवन में बदलाव लाने वाला है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया है कि वे सरकारी और निजी दोनों तरह के स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियों को नि:शुल्क सैनिटरी पैड उपलब्ध कराएं। इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने मासिक धर्म स्वास्थ्य को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा माना है। जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा

देश की सर्वोच्च अदालत ने शुक्रवार 30 जनवरी को एक ऐसा फैसला सुनाया है जो लाखों स्कूली छात्राओं के जीवन में बदलाव लाने वाला है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया है कि वे सरकारी और निजी दोनों तरह के स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियों को नि:शुल्क सैनिटरी पैड उपलब्ध कराएं। इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने मासिक धर्म स्वास्थ्य को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा माना है। जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने उच्च शिक्षा से जुड़े एक अहम मुद्दे पर बड़ा फैसला लिया है। अदालत ने यूजीसी के वर्ष 2026 के समानता नियमों को फिलहाल रोक दिया है। यह फैसला देश भर के विश्वविद्यालयों और छात्रों के लिए बहुत मायने रखता है। अदालत ने कहा कि ये नए नियम बहुत ज्यादा व्यापक हैं और इन्हें बिना गहराई से जांचे लागू नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने साफ किया कि जब तक इस मामले पर पूरी सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक वर्ष 2012 में बने पुराने यूजीसी समानता नियम ही लागू रहेंगे। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश सूर्य

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने उच्च शिक्षा से जुड़े एक अहम मुद्दे पर बड़ा फैसला लिया है। अदालत ने यूजीसी के वर्ष 2026 के समानता नियमों को फिलहाल रोक दिया है। यह फैसला देश भर के विश्वविद्यालयों और छात्रों के लिए बहुत मायने रखता है। अदालत ने कहा कि ये नए नियम बहुत ज्यादा व्यापक हैं और इन्हें बिना गहराई से जांचे लागू नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने साफ किया कि जब तक इस मामले पर पूरी सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक वर्ष 2012 में बने पुराने यूजीसी समानता नियम ही लागू रहेंगे। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश सूर्य

UGC New Rules: देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा और बर्निंग मुद्दा गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां शीर्ष अदालत ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा अधिसूचित नए विनियमों पर अहम फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित “उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने” से जुड़े यूजीसी विनियमों पर रोक लगा दी है। कोर्ट के इस आदेश को उच्च शिक्षा से जुड़े लाखों छात्रों और शिक्षकों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब इन नियमों को लेकर देशभर में बहस तेज हो चुकी

UGC New Rules: देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा और बर्निंग मुद्दा गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां शीर्ष अदालत ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा अधिसूचित नए विनियमों पर अहम फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित “उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने” से जुड़े यूजीसी विनियमों पर रोक लगा दी है। कोर्ट के इस आदेश को उच्च शिक्षा से जुड़े लाखों छात्रों और शिक्षकों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब इन नियमों को लेकर देशभर में बहस तेज हो चुकी

UGC: देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में आज उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाली नियमावली 2026 को लेकर अहम सुनवाई हो रही है। इन नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ विचार कर रही है। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले की वैधता और संवैधानिक पहलुओं की गहन जांच कर रही है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2026 में लागू की गई यह नियमावली सामान्य श्रेणी के छात्रों के साथ भेदभाव करती है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि समानता

UGC: देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में आज उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाली नियमावली 2026 को लेकर अहम सुनवाई हो रही है। इन नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ विचार कर रही है। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले की वैधता और संवैधानिक पहलुओं की गहन जांच कर रही है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2026 में लागू की गई यह नियमावली सामान्य श्रेणी के छात्रों के साथ भेदभाव करती है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि समानता

Mahakal Temple VIP Darshan: उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग देश के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। हर दिन लाखों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए लंबी कतारों में खड़े रहते हैं। इसी बीच एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि महाकाल मंदिर में आम श्रद्धालुओं और वीआईपी लोगों के बीच भेदभाव किया जाता है। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की थी कि मंदिर में वीआईपी दर्शन की व्यवस्था पर पूरी तरह रोक लगाई जाए और सभी श्रद्धालुओं को एक समान दर्शन का अवसर दिया जाए। इस याचिका पर सुनवाई करते

Mahakal Temple VIP Darshan: उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग देश के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। हर दिन लाखों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए लंबी कतारों में खड़े रहते हैं। इसी बीच एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि महाकाल मंदिर में आम श्रद्धालुओं और वीआईपी लोगों के बीच भेदभाव किया जाता है। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की थी कि मंदिर में वीआईपी दर्शन की व्यवस्था पर पूरी तरह रोक लगाई जाए और सभी श्रद्धालुओं को एक समान दर्शन का अवसर दिया जाए। इस याचिका पर सुनवाई करते

NEET PG 2025 Cutoff: नीट पीजी 2025 को लेकर एक ऐसा फैसला सामने आया है, जिसने देश की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने राउंड-2 काउंसलिंग के बाद सभी श्रेणियों के लिए क्वालिफाइंग परसेंटाइल में भारी कटौती कर दी है। इस निर्णय ने न सिर्फ मेडिकल स्टूडेंट्स बल्कि डॉक्टर समुदाय और शिक्षा विशेषज्ञों को भी असमंजस में डाल दिया है। शुरुआत में यह फैसला सिर्फ एक प्रशासनिक कदम माना जा रहा था, लेकिन जैसे-जैसे इसके आंकड़े सामने आए, मामला तूल पकड़ता चला गया। अब यह मुद्दा सुप्रीम

NEET PG 2025 Cutoff: नीट पीजी 2025 को लेकर एक ऐसा फैसला सामने आया है, जिसने देश की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने राउंड-2 काउंसलिंग के बाद सभी श्रेणियों के लिए क्वालिफाइंग परसेंटाइल में भारी कटौती कर दी है। इस निर्णय ने न सिर्फ मेडिकल स्टूडेंट्स बल्कि डॉक्टर समुदाय और शिक्षा विशेषज्ञों को भी असमंजस में डाल दिया है। शुरुआत में यह फैसला सिर्फ एक प्रशासनिक कदम माना जा रहा था, लेकिन जैसे-जैसे इसके आंकड़े सामने आए, मामला तूल पकड़ता चला गया। अब यह मुद्दा सुप्रीम

I-PAC ED Raid: देश की राजनीति में एक बार फिर केंद्र और राज्य के अधिकारों की सीमा को लेकर बहस तेज हो गई है। राजनीतिक रणनीतिकारों की चर्चित कंपनी आई-पैक (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) और उसके निदेशक प्रतीक जैन के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी के दौरान कथित हस्तक्षेप का मामला अब सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच चुका है। इस पूरे घटनाक्रम में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है, जहां अदालत ने उन्हें नोटिस जारी करते हुए ईडी के आरोपों को “बेहद गंभीर” बताया है। यह मामला केवल एक छापेमारी या दस्तावेजों

I-PAC ED Raid: देश की राजनीति में एक बार फिर केंद्र और राज्य के अधिकारों की सीमा को लेकर बहस तेज हो गई है। राजनीतिक रणनीतिकारों की चर्चित कंपनी आई-पैक (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) और उसके निदेशक प्रतीक जैन के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी के दौरान कथित हस्तक्षेप का मामला अब सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच चुका है। इस पूरे घटनाक्रम में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है, जहां अदालत ने उन्हें नोटिस जारी करते हुए ईडी के आरोपों को “बेहद गंभीर” बताया है। यह मामला केवल एक छापेमारी या दस्तावेजों

I-PAC ED Raid: पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गई है। कोलकाता में आई-पैक के दफ्तर पर हुई प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी अब केवल एक कानूनी विवाद नहीं रह गई, बल्कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुंच चुका है। प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार और पुलिस प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। ईडी का कहना है कि जांच के दौरान न केवल एजेंसी के कामकाज में बाधा डाली गई, बल्कि साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ तक की गई। यही कारण है कि अब यह मामला देश की

I-PAC ED Raid: पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गई है। कोलकाता में आई-पैक के दफ्तर पर हुई प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी अब केवल एक कानूनी विवाद नहीं रह गई, बल्कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुंच चुका है। प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार और पुलिस प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। ईडी का कहना है कि जांच के दौरान न केवल एजेंसी के कामकाज में बाधा डाली गई, बल्कि साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ तक की गई। यही कारण है कि अब यह मामला देश की

Romeo-Juliet Clause: भारत में कानून का उद्देश्य अपराध रोकना और पीड़ित को न्याय दिलाना होता है, लेकिन जब वही कानून निर्दोषों के लिए सजा बन जाए, तब सवाल उठना लाज़मी है। सुप्रीम कोर्ट ने किशोरों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाले कानून पॉक्सो एक्ट के बढ़ते दुरुपयोग पर गंभीर चिंता जताते हुए एक बेहद संवेदनशील और व्यावहारिक सुझाव दिया है—‘रोमियो-जूलियट क्लॉज’ को कानून का हिस्सा बनाने का। पॉक्सो एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पॉक्सो जैसे सख्त कानून का

Romeo-Juliet Clause: भारत में कानून का उद्देश्य अपराध रोकना और पीड़ित को न्याय दिलाना होता है, लेकिन जब वही कानून निर्दोषों के लिए सजा बन जाए, तब सवाल उठना लाज़मी है। सुप्रीम कोर्ट ने किशोरों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाले कानून पॉक्सो एक्ट के बढ़ते दुरुपयोग पर गंभीर चिंता जताते हुए एक बेहद संवेदनशील और व्यावहारिक सुझाव दिया है—‘रोमियो-जूलियट क्लॉज’ को कानून का हिस्सा बनाने का। पॉक्सो एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पॉक्सो जैसे सख्त कानून का

Supreme Court Stray Dogs: देशभर में आवारा कुत्तों का मुद्दा कोई नया नहीं है, लेकिन समय के साथ यह समस्या सिर्फ पशु कल्याण तक सीमित नहीं रह गई है। यह अब सीधे तौर पर आम आदमी की सुरक्षा, बच्चों की जिंदगी और सार्वजनिक स्थलों की व्यवस्था से जुड़ चुकी है। सुप्रीम कोर्ट में इस विषय पर चल रही सुनवाई ने एक बार फिर इस जटिल और संवेदनशील मुद्दे को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने जो टिप्पणियां कीं, वे सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक चेतावनी की तरह भी देखी जा रही हैं। पीठ

Supreme Court Stray Dogs: देशभर में आवारा कुत्तों का मुद्दा कोई नया नहीं है, लेकिन समय के साथ यह समस्या सिर्फ पशु कल्याण तक सीमित नहीं रह गई है। यह अब सीधे तौर पर आम आदमी की सुरक्षा, बच्चों की जिंदगी और सार्वजनिक स्थलों की व्यवस्था से जुड़ चुकी है। सुप्रीम कोर्ट में इस विषय पर चल रही सुनवाई ने एक बार फिर इस जटिल और संवेदनशील मुद्दे को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने जो टिप्पणियां कीं, वे सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक चेतावनी की तरह भी देखी जा रही हैं। पीठ

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर से चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। SIR यानी Summary of Inclusion and Revision प्रक्रिया को लेकर आम लोगों को हो रही परेशानियों का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को चिट्ठी लिखी है। इतना ही नहीं, ममता बनर्जी ने कहा है कि वह इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगी और जरूरत पड़ी तो खुद ही लोगों की तरफ से पैरवी करेंगी। रविवार को गंगासागर में मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर से चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। SIR यानी Summary of Inclusion and Revision प्रक्रिया को लेकर आम लोगों को हो रही परेशानियों का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को चिट्ठी लिखी है। इतना ही नहीं, ममता बनर्जी ने कहा है कि वह इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगी और जरूरत पड़ी तो खुद ही लोगों की तरफ से पैरवी करेंगी। रविवार को गंगासागर में मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि

उत्तर प्रदेश के उन्नाव रेप केस ने एक बार फिर से सुर्खियां बटोरी हैं। भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट ने जो सशर्त जमानत दी थी, उस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। यह मामला देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि इसमें एक नाबालिग के साथ रेप और सत्ता के दुरुपयोग के गंभीर आरोप शामिल हैं। 29 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए कुलदीप सिंह सेंगर को मिली राहत पर विराम लगा दिया। इस फैसले से पीड़िता पक्ष को

उत्तर प्रदेश के उन्नाव रेप केस ने एक बार फिर से सुर्खियां बटोरी हैं। भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट ने जो सशर्त जमानत दी थी, उस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। यह मामला देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि इसमें एक नाबालिग के साथ रेप और सत्ता के दुरुपयोग के गंभीर आरोप शामिल हैं। 29 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए कुलदीप सिंह सेंगर को मिली राहत पर विराम लगा दिया। इस फैसले से पीड़िता पक्ष को

सर्वोच्च न्यायालय का तिहासिक फैसला देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बार फिर न्याय की उम्मीद जगाई है। उत्तर प्रदेश के उन्नाव में 2017 में हुए दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को रोक दिया जिसमें पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत को मंजूरी दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली छुट्टी की पीठ ने यह अहम फैसला सुनाया। इस पीठ में जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह भी शामिल थे। सेंगर को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने पीड़िता

सर्वोच्च न्यायालय का तिहासिक फैसला देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बार फिर न्याय की उम्मीद जगाई है। उत्तर प्रदेश के उन्नाव में 2017 में हुए दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को रोक दिया जिसमें पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत को मंजूरी दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली छुट्टी की पीठ ने यह अहम फैसला सुनाया। इस पीठ में जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह भी शामिल थे। सेंगर को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने पीड़िता

Unnao Rape Case: उन्नाव दुष्कर्म मामला एक बार फिर देश की सबसे बड़ी अदालत के दरवाजे पर पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दी गई उम्रकैद की सजा को निलंबित किए जाने के फैसले के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय कल 29 दिसंबर को सुनवाई करेगा। यह सुनवाई न केवल एक व्यक्ति विशेष से जुड़ा मामला है, बल्कि इसमें कानून की व्याख्या, जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और पीड़ितों को मिलने वाले न्याय के सवाल भी जुड़े हुए हैं। यह मामला ऐसे समय में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष आया है,

Unnao Rape Case: उन्नाव दुष्कर्म मामला एक बार फिर देश की सबसे बड़ी अदालत के दरवाजे पर पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दी गई उम्रकैद की सजा को निलंबित किए जाने के फैसले के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय कल 29 दिसंबर को सुनवाई करेगा। यह सुनवाई न केवल एक व्यक्ति विशेष से जुड़ा मामला है, बल्कि इसमें कानून की व्याख्या, जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और पीड़ितों को मिलने वाले न्याय के सवाल भी जुड़े हुए हैं। यह मामला ऐसे समय में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष आया है,

Unnao Rape Case: उन्नाव दुष्कर्म कांड एक बार फिर देश की सर्वोच्च अदालत के दरवाजे तक पहुंच गया है। यह मामला केवल एक आरोपी या एक फैसले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस न्यायिक संवेदनशीलता की परीक्षा भी है, जिस पर आम नागरिक का भरोसा टिका होता है। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित करते हुए उन्हें सशर्त जमानत दी गई थी। सीबीआई की सुप्रीम कोर्ट में दखल की वजह दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में कुलदीप

Unnao Rape Case: उन्नाव दुष्कर्म कांड एक बार फिर देश की सर्वोच्च अदालत के दरवाजे तक पहुंच गया है। यह मामला केवल एक आरोपी या एक फैसले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस न्यायिक संवेदनशीलता की परीक्षा भी है, जिस पर आम नागरिक का भरोसा टिका होता है। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित करते हुए उन्हें सशर्त जमानत दी गई थी। सीबीआई की सुप्रीम कोर्ट में दखल की वजह दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में कुलदीप

राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के संकट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कई अहम फैसले लिए हैं। बुधवार को हुई सुनवाई में देश की सबसे बड़ी अदालत ने दिल्ली बॉर्डर पर टोल टैक्स की वसूली रोकने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कंस्ट्रक्शन मजदूरों को राहत देने और वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए कई सख्त निर्देश भी जारी किए हैं। यह फैसला दिल्ली-NCR में रहने वाले करोड़ों लोगों के लिए राहत भरा साबित हो सकता है। दिल्ली बॉर्डर पर टोल वसूली को मिली रोक सुप्रीम कोर्ट ने NHAI और MCD को दिल्ली बॉर्डर पर लगे 9 टोल प्लाजा

राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के संकट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कई अहम फैसले लिए हैं। बुधवार को हुई सुनवाई में देश की सबसे बड़ी अदालत ने दिल्ली बॉर्डर पर टोल टैक्स की वसूली रोकने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कंस्ट्रक्शन मजदूरों को राहत देने और वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए कई सख्त निर्देश भी जारी किए हैं। यह फैसला दिल्ली-NCR में रहने वाले करोड़ों लोगों के लिए राहत भरा साबित हो सकता है। दिल्ली बॉर्डर पर टोल वसूली को मिली रोक सुप्रीम कोर्ट ने NHAI और MCD को दिल्ली बॉर्डर पर लगे 9 टोल प्लाजा

देश की सर्वोच्च अदालत ने बुधवार को एक अहम फैसला लेते हुए केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन से अदालत परिसर में होने वाली अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए ठोस सुझाव मांगे हैं। यह कदम पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई के साथ हुई एक शर्मनाक घटना के बाद उठाया गया है, जब एक वकील ने अदालत कक्ष में उनकी ओर जूता फेंकने का प्रयास किया था। न्यायालय की चिंता और पहल मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए व्यापक दिशानिर्देश तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया।

देश की सर्वोच्च अदालत ने बुधवार को एक अहम फैसला लेते हुए केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन से अदालत परिसर में होने वाली अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए ठोस सुझाव मांगे हैं। यह कदम पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई के साथ हुई एक शर्मनाक घटना के बाद उठाया गया है, जब एक वकील ने अदालत कक्ष में उनकी ओर जूता फेंकने का प्रयास किया था। न्यायालय की चिंता और पहल मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए व्यापक दिशानिर्देश तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया।

देश की सर्वोच्च अदालत में बुधवार को एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने सभी को हैरान कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने एक महिला वकील ने जमकर हंगामा किया। यह घटना उस समय हुई जब महिला वकील ने अपनी दोस्त की हत्या से जुड़े एक मामले का उल्लेख करते हुए पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, जब उन्होंने अदालत की प्रक्रिया का पालन करने से इनकार कर दिया तो सुरक्षाकर्मियों को उन्हें कोर्ट रूम से बाहर निकालना पड़ा। कैसे शुरू हुआ पूरा मामला यह घटना नई दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट

देश की सर्वोच्च अदालत में बुधवार को एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने सभी को हैरान कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने एक महिला वकील ने जमकर हंगामा किया। यह घटना उस समय हुई जब महिला वकील ने अपनी दोस्त की हत्या से जुड़े एक मामले का उल्लेख करते हुए पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, जब उन्होंने अदालत की प्रक्रिया का पालन करने से इनकार कर दिया तो सुरक्षाकर्मियों को उन्हें कोर्ट रूम से बाहर निकालना पड़ा। कैसे शुरू हुआ पूरा मामला यह घटना नई दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट

एक मत से सुनाया गया, आस्था से ऊपर सैन्य अनुशासन भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय सेना में किसी भी प्रकार का निजी धार्मिक मत, सैन्य अनुशासन से ऊपर नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट ने एक पूर्व ईसाई अधिकारी सैमुअल कमलेसन की याचिका ठुकराते हुए कहा कि सेना में ऐसे लोग नहीं रह सकते जो निजी आस्था के आधार पर वैध आदेश का पालन करने से इनकार करें। अदालत ने उनके व्यवहार को सेना की गरिमा के विरुद्ध और अत्यधिक अनुशासनहीन बताया। इस फैसले के बाद भारत की सेना और धर्मनिरपेक्षता पर चल रही चर्चा

एक मत से सुनाया गया, आस्था से ऊपर सैन्य अनुशासन भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय सेना में किसी भी प्रकार का निजी धार्मिक मत, सैन्य अनुशासन से ऊपर नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट ने एक पूर्व ईसाई अधिकारी सैमुअल कमलेसन की याचिका ठुकराते हुए कहा कि सेना में ऐसे लोग नहीं रह सकते जो निजी आस्था के आधार पर वैध आदेश का पालन करने से इनकार करें। अदालत ने उनके व्यवहार को सेना की गरिमा के विरुद्ध और अत्यधिक अनुशासनहीन बताया। इस फैसले के बाद भारत की सेना और धर्मनिरपेक्षता पर चल रही चर्चा

सुप्रीम कोर्ट का कठोर रुख सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत के आदेश में तुच्छ त्रुटि का हवाला देकर उसकी अवहेलना करना पूरी तरह अनुचित है। यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश की जेल प्रशासन द्वारा एक अंडरट्रायल कैदी की रिहाई में 28 दिनों की देरी के मामले में की गई, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के जमानत आदेश में केवल एक उपधारा का उल्लेख छूट गया था। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने स्पष्ट किया कि मामूली त्रुटि के आधार पर किसी भी व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में रखना न्याय के सिद्धांतों के

सुप्रीम कोर्ट का कठोर रुख सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत के आदेश में तुच्छ त्रुटि का हवाला देकर उसकी अवहेलना करना पूरी तरह अनुचित है। यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश की जेल प्रशासन द्वारा एक अंडरट्रायल कैदी की रिहाई में 28 दिनों की देरी के मामले में की गई, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के जमानत आदेश में केवल एक उपधारा का उल्लेख छूट गया था। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने स्पष्ट किया कि मामूली त्रुटि के आधार पर किसी भी व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में रखना न्याय के सिद्धांतों के

नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि अदालतें राज्यपाल या राष्ट्रपति पर विधेयकों को मंजूरी देने के लिए समय सीमा नहीं लगा सकतीं। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि तमिलनाडु विधेयक मामले में इस वर्ष की शुरुआत में लागू की गई डीम्ड एसेंट की अवधारणा संविधान की भावना के विरुद्ध है और शक्ति पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन करती है। संविधान पीठ का महत्वपूर्ण निर्णय भारत के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने तमिलनाडु विधेयक फैसले के बाद दिए गए राष्ट्रपति संदर्भ पर जवाब देते

नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि अदालतें राज्यपाल या राष्ट्रपति पर विधेयकों को मंजूरी देने के लिए समय सीमा नहीं लगा सकतीं। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि तमिलनाडु विधेयक मामले में इस वर्ष की शुरुआत में लागू की गई डीम्ड एसेंट की अवधारणा संविधान की भावना के विरुद्ध है और शक्ति पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन करती है। संविधान पीठ का महत्वपूर्ण निर्णय भारत के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने तमिलनाडु विधेयक फैसले के बाद दिए गए राष्ट्रपति संदर्भ पर जवाब देते