Rashtra Bharat Logo

पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत, जानिए क्या है पूरा मामला

पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत, जानिए क्या है पूरा मामला
पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत (File Photo)

सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को असम में दर्ज मामले में अग्रिम जमानत दे दी है। अदालत ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता को संविधान के तहत महत्वपूर्ण बताते हुए गिरफ्तारी पर राहत दी। कोर्ट ने जांच में सहयोग, सबूतों से छेड़छाड़ न करने और बिना अनुमति विदेश न जाने जैसी शर्तें लगाईं।

Updated:
·by
Dipali Kumari
Dipali Kumari
Share:

विषयसूची

Pawan Khera: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उन्हें असम में दर्ज एक मामले में अग्रिम जमानत देते हुए साफ कहा कि किसी भी नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को हल्के में नहीं लिया जा सकता। जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।

असम के सीएम की पत्नी से जुड़ा है मामला

यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा को लेकर दिए गए कथित बयान से जुड़ा है। पवन खेड़ा पर आरोप है कि उन्होंने रिंकी भुइयां सरमा के पासपोर्ट और विदेशों में संपत्ति को लेकर गंभीर दावे किए थे, जिसके बाद उनके खिलाफ असम में केस दर्ज किया गया। इस पूरे विवाद ने राजनीतिक माहौल भी गर्म कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 हर व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा देता है, इसलिए बिना उचित आधार किसी की आजादी को खतरे में नहीं डाला जा सकता। अदालत ने माना कि दोनों पक्षों की ओर से आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए हैं, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया का उद्देश्य व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करना भी है।

कई शर्तों के साथ मिली जमानत

कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन केस नंबर 04/2026 में पवन खेड़ा की गिरफ्तारी की नौबत आती है, तो उन्हें अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाए। हालांकि इसके साथ अदालत ने कुछ सख्त शर्तें भी लगाई हैं। पवन खेड़ा को जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करना होगा और जब भी पुलिस बुलाएगी, उन्हें उपस्थित होना पड़ेगा। इसके अलावा वे किसी भी साक्ष्य से छेड़छाड़ नहीं कर सकेंगे और सक्षम अदालत की अनुमति के बिना देश छोड़कर बाहर नहीं जा पाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत देते समय जिन तथ्यों और दस्तावेजों पर विचार किया गया, उनका केस के अंतिम फैसले से कोई सीधा संबंध नहीं माना जाएगा। ट्रायल कोर्ट कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से आगे की कार्रवाई करेगा।

इससे पहले पवन खेड़ा को असम की निचली अदालत और गुवाहाटी हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली थी। तेलंगाना हाईकोर्ट से मिली अस्थायी ट्रांजिट बेल के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। अब शीर्ष अदालत के इस फैसले ने उन्हें तत्काल गिरफ्तारी के खतरे से राहत दे दी है।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।

Dipali Kumari

Dipali Kumari

दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।