बिना प्रत्यक्ष साक्ष्य के हत्या मामले में दोषसिद्धि, नागपुर पुलिस अधिकारियों का सम्मान

Nagpur Police Murder Case Conviction Honour: नागपुर के एमआईडीसी पुलिस थाना क्षेत्र में 2021 के नाबालिग अपहरण और हत्या मामले में बिना प्रत्यक्ष साक्ष्य के पुलिस ने परिस्थितिजन्य, तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच की। 11 दिनों में आरोपपत्र दाखिल हुआ और आरोपी को दोहरी आजीवन कारावास की सजा मिली। सफल जांच के लिए 25 अगस्त 2026 को पुलिस अधिकारियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
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नागपुर हत्या मामले में पुलिस की सफल जांच
Nagpur Police Murder Case Conviction Honour: नागपुर की एमआईडीसी पुलिस को एक नाबालिग बच्चे के अपहरण-हत्या मामले में सफल दोषसिद्धि के लिए आज, 25 अगस्त 2026 को पुणे स्थित अपराध अन्वेषण विभाग में सम्मानित किया गया।
यह मामला वर्ष 2021 का है, जब एमआईडीसी पुलिस थाना क्षेत्र में नाबालिग बच्चे के अपहरण और हत्या का मामला दर्ज हुआ था। अपराध क्रमांक 307/21 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 364(अ) और 302 में केस दर्ज किया गया।
पुलिस के पास कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं था। इसके बावजूद अधिकारियों ने परिस्थितिजन्य, तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर गहन जांच की और मात्र 11 दिनों में मजबूत आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।

बिना प्रत्यक्ष साक्ष्य के आरोपी को दोषी ठहराया गया
न्यायालय ने इन साक्ष्यों को महत्वपूर्ण मानते हुए आरोपी को दोषी करार दिया और दोहरी आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस प्रभावी अनुसंधान के लिए यह मामला महाराष्ट्र के वर्ष 2023 के बेस्ट कन्विक्शन (Best Conviction) पुरस्कार के लिए पात्र ठहरा था।
आज पुणे में माननीय पुलिस महानिरीक्षक सुनील फुलारी के हाथों संबंधित अधिकारियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया। सम्मानित होने वालों में एमआईडीसी पुलिस थाना के पुलिस निरीक्षक दिनेश लबडे और नागपुर अपराध शाखा के पुलिस कर्मचारी क्रमांक 14032 दीपक दासरवार शामिल रहे।
बिना प्रत्यक्ष गवाह के केवल तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के दम पर आरोपी को कठोर सजा दिलाना नागपुर पुलिस की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

